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कहीं अपनों के लिए न बन जाएं पराए: बेटिंग-नशे की लत लोगों को धकेल रही डिप्रेशन के दलदल में, तबाह हो रहे परिवार

Sat, 11 Feb 2023 06:00 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sat, 11 Feb 2023 06:00 AM IST
सार

सीपरी बाजार निवासी केंद्रीय कर्मचारी ने सट्टेबाजी में हारी इस रकम के लिए जीपीएफ तक से पैसा निकाल लिया। जब पूरी रकम खाली हो गई तो बैंक से लोन लेकर सट्टा खेला। उसकी पत्नी बेटियों की शादी को लेकर इस कदर चिंतित है कि वो भी अवसाद का शिकार हो गई हैं।

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Husband lost 25 lakhs in betting, now how will three daughters get married?
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

मेरा पति सट्टेबाजी में 25 लाख रुपये हार गया है। अब मेरी बेटियों की शादी कैसे होगी। मोटी रकम हारने के बाद वह डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करने का प्रयास कर चुका है। मुझे डर है कि कहीं फिर से आत्महत्या करने की कोशिश न करे। डॉक्टर साहब इसे ठीक कर दीजिए। मनोचिकित्सकों के पास ऐसे कई मामले पहुंच रहे हैं, जिसमें किशोर, युवक ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी में मोटी रकम हारने पर मानसिक अवसाद में पहुंच जा रहे हैं।

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सीपरी बाजार निवासी केंद्रीय कर्मचारी ने सट्टेबाजी में हारी इस रकम के लिए जीपीएफ तक से पैसा निकाल लिया। जब पूरी रकम खाली हो गई तो बैंक से लोन लेकर सट्टा खेला। उसकी पत्नी बेटियों की शादी को लेकर इस कदर चिंतित है कि वो भी अवसाद का शिकार हो गई हैं। पति और पत्नी दोनों का डिप्रेशन का इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि इन दिनों कई मोबाइल एप चल रहे हैं, जिनके जरिए लोग गेमिंग, सट्टेबाजी से लेकर लॉटरी तक में ऑनलाइन पैसा लगा रहे हैं।
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खासकर 20 से 35 साल के लोग जल्द पैसा कमाने की चाह में अलग-अलग एप पर ऑनलाइन पैसे लगाते रहते हैं। न जाने कितनों की रकम इसमें डूब चुकी है और परिवार तबाह हो गए हैं। उनके पास हर महीने आठ से दस ऐसे किशोर और युवाओं को परिजन इलाज कराने के लिए लाते हैं, जो ऑनलाइन सट्टा, गेम और लॉटरी आदि में पैसा लगाने से डिप्रेशन में चले जाते हैं या फिर उनके अंदर आत्महत्या करने के भाव आने लगते हैं। एक-दो केस तो ऐसे होते हैं, जिसमें लोग आत्महत्या करने की कोशिश भी कर चुके होते हैं। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव ने बताया कि ऑनलाइन पैसा लगाना या सट्टेबाजी एक प्रकार का नशा है। जब वो अवसाद, घबराहट आदि का शिकार हो जाते हैं, तब परिजन उन्हें दिखाने लाते हैं। काउंसलिंग करने के बाद कई लोग ठीक भी हो जाते हैं या फिर ऑनलाइन पैसा लगाने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।

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केस-1
मां के बैंक अकाउंट से खर्च कर दिए 50 हजार

लहरगिर्द का रहने वाला 11वीं का छात्र ऑनलाइन मोबाइल गेमिंग का लती हो गया। वह व्यायाम करने की बात कहते हुए घर से पार्क निकल जाता और वहां बैठकर तीन-तीन घंटे मोबाइल पर गेम खेलकर पैसे लगाता रहता। उसके पास मां के बैंक खाते की पूरी जानकारी थी। मां के फोन से ही खेलता था और ओटीपी आने पर डिलीट (हटा) कर देता था। धीरे-धीरे वह 50 हजार रुपये हार गया। जानकारी होने पर जब मां ने उसे डांटा तो हाथ की नस काट ली। मां उसे मनोचिकित्सक के पास काउंसलिंग के लिए लेकर आई।

केस-2
लॉटरी में पैसा हारा तो गिरवी रख दिए पत्नी के जेवर

झांसी का एक युवक नशे का आदी था। वह मोबाइल पर ऑनलाइन लॉटरी में भी खूब पैसे लगाता था। धीरे-धीरे वह तीन-चार लाख रुपये हार गया। इसके बावजूद लत ऐसी लगी थी कि वो और पैसे लगाना चाहता था। जब पैसे नहीं बचे तो उसने पत्नी के जेवर गिरवी रख दिए। जबकि, उसकी एक साल पहले ही शादी हुई थी। पत्नी को जेवर नहीं मिले तो उसने पुलिस में शिकायत करने के धमकी दी। इस पर युवक ने सबकुछ कबूल दिया। नशे की लत छुड़ाने के लिए पत्नी उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर आई।

केस-3
सट्टेबाजी के शौक में ऑफिस से पैसे तक चुरा लिए

झांसी का रहने वाला एक युवक दूसरे राज्य में कर्मचारी है। कुछ महीने पहले उसे कार्यालय से पैसे चोरी करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। घर लौट आया तो उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगे। बुजुर्ग पिता उसे लेकर मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने उसकी काउंसलिंग शुरू की तो वह पैसे चुराने के लगे आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा। हालांकि, ये भी कहता रहा कि वह ऑनलाइन सट्टा खेलता है। उसके मन में आत्महत्या जैसे ख्याल न आए, इसके लिए डॉक्टर ने उसकी दवा शुरू की।

इन कारणों से बिगड़ जाते
- बच्चों की परवरिश पर परिजनों का ध्यान न होना।
- शुरू से बच्चे का बुरी संगत में पड़ जाना।
- नशे की लत लग जाना।

इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को एटीएम, नेट बैंकिंग आदि का पासवर्ड न बताएं।
- पॉकेट मनी दें, तो उसका हिसाब-किताब पूछें।
- कोई दोस्त सट्टेबाजी, शराब पीने वाला हो तो उससे दूर करें।

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