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मानवता शर्मशार : कूड़े के ढेर में मिला कन्या भ्रूण, पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, डीएनएन भी रखा सुरक्षित
Tue, 30 Sep 2025 06:19 AM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 30 Sep 2025 06:19 AM IST
सार
कूड़े के ढेर में कन्या भ्रूण मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। तीन दिन पहले शुक्रवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेन से कन्या भ्रूण बरामद हुआ था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
झांसी। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां मंदिरों समेत घर-घर पूजन के लिए कन्याएं खोजी जा रही हैं। वहीं, गर्भ में कन्या के होने का पता लगने पर गर्भपात करवाकर उसे कूड़े में फेंकने की घटना ने समाज को झकझोर दिया। बिजौली स्थित नगर निगम के प्रोसेसिंग प्लांट में रविवार को छह महीने का कन्या भ्रूण कूड़े के ढेर में मिला। प्रोसेसिंग प्लांट के कर्मचारियों ने भ्रूण मिलने की जानकारी प्रेमनगर पुलिस को दी। पुलिस ने सोमवार को उसका पोस्टमार्टम कराया है। ममता के आंचल से दूर करने वाली बेदर्द मां की पहचान के लिए उसका डीएनए नमूना भी सुरक्षित रखा गया है।
चिकित्सकों ने आशंका जताई कि कन्या भ्रूण होने की वजह समय पूर्व डिलिवरी कराए जाने के बाद यह अमानवीय घटना हुई होगी। बिजाैली प्लांट में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि किसी कूड़ा गाड़ी के जरिये यह भ्रूण बिजौली प्लांट पहुंचा। प्रोसेसिंग के दौरान कूड़े के साथ कन्या भ्रूण देख वहां तैनात कर्मचारियों का दिल धक्क से रह गया। प्रेमनगर थाने के निरीक्षक रवि श्रीवास्तव का कहना है कि छानबीन में यह मालूम नहीं चल सका कि यह भ्रूण किस इलाके में फेंका गया। मां का पता लगाने के लिए अस्पतालों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास के अस्पतालों और क्लीनिकों की पड़ताल की जाएगी ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।
दो वर्षों में मिल चुके 21 कन्या भ्रूण
कूड़े के ढेर में कन्या भ्रूण मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। तीन दिन पहले शुक्रवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेन से कन्या भ्रूण बरामद हुआ था। कई ऐसे केस हैं। कभी जन्म लेने से पहले ही कोख में बेटियों का दम घोंट दिया गया तो कभी उनके भ्रूण कूड़े-कचरे में कुत्तों का निवाला बनने के लिए फेंक दिए गए। बेटियां मां-बाप की गोद में भी सुरक्षित नहीं हैं। शायद तभी शहर के शिशु विहार में भी लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, पिछले दो वर्षों में झांसी और आसपास 21 कन्या भ्रूण मिल चुके।
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मां मैं तो तेरी परी थी, तू कहती तो रोती भी नहीं...
दुनिया कदम रखने से पहले दम तोड़ने वाली बेटी मानो यह कहते चल बसी.... मां, मैं तो तेरी परी थी। तू कहती तो रोती भी नहीं। बस तेरे ममता के आंचल से लिपटी रहती लेकिन समय से पहले ही तूने मुझे अपने से दूर करके यह कौन सी सजा दी है। मां तू जानती है, जब तूने मुझे कूड़े के ढेर में फेंका तब मेरी सांस चल रही थी। तू मुझे प्यार से सीने से चिपका लेती तो शायद मैं जिंदा हो जाती। आखिर मेरा कुसूर सिर्फ यही था कि मैं लड़की थी...। अगर मुझे बचा लिया जाता और समय से जन्म लेती, तब अपनी मां से शायद यही सवाल करती।
शिशु विहार में 27 बच्चों में 19 लड़कियां
झांसी स्थित शिशु विहार में इन दिनों 27 बच्चों में 19 लड़कियां हैं। यहां इन बच्चियों को उनके अपने ही छोड़ गए लेकिन संस्था इन्हें आश्रय देकर इनकी देखभाल कर रही है। संस्था की ओर से भवन परिसर के बाहर एक पालना भी लगाया गया है। कई लोग यहां बच्चियों को छोड़ चुके हैं। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, झांसी में 1000 लड़कों के मुकाबले 886 लड़कियां थीं। वर्ष 2011 में यह आंकड़ा 859 पहुंच गया था। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार वर्तमान में 1000 लड़कों के मुकाबले अब 927 लड़कियां हैं जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 915 था। ऐसे में आंकड़ों में अब बेटा-बेटी का अंतर घट रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि बेटियां कहीं मारी जा रहीं तो कहीं उनके भ्रूण सड़कों पर फेंके जा रहे हैं।
बीएनएस में दंड के कठोर प्रावधान
भ्रूण हत्या और अवैध लिंग परीक्षण रोकने के लिए पूर्व गर्भाधान और प्रसवपूर्व नैदानिक तकनीक (पीसीपीएनडीटी ) अधिनियम, 1994 लागू है। अधिवक्ता राकेश पटेरिया के मुताबिक, महिला की सहमति के बिना अगर गर्भपात कराया जाता है तब बीएनएस की धारा 89 के तहत आजीवन कारावास या 10 साल तक की जेल और जुर्माने से दंडनीय है। अगर किसी अजन्मे बच्चे को जन्म से रोकने के लिए या जन्म के बाद उसकी हत्या करने के इरादे से कोई कदम उठाया जाता है तो इसमें बीएनएस की धारा 92 के तहत 10 साल कैद और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
लिंग चयनात्मक गर्भपात को रोकने के लिए गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम के तहत भ्रूण की जांच कराने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की जेल और 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर यह सजा 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक के जुर्माने में तब्दील हो सकती है।
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चिकित्सकों ने आशंका जताई कि कन्या भ्रूण होने की वजह समय पूर्व डिलिवरी कराए जाने के बाद यह अमानवीय घटना हुई होगी। बिजाैली प्लांट में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि किसी कूड़ा गाड़ी के जरिये यह भ्रूण बिजौली प्लांट पहुंचा। प्रोसेसिंग के दौरान कूड़े के साथ कन्या भ्रूण देख वहां तैनात कर्मचारियों का दिल धक्क से रह गया। प्रेमनगर थाने के निरीक्षक रवि श्रीवास्तव का कहना है कि छानबीन में यह मालूम नहीं चल सका कि यह भ्रूण किस इलाके में फेंका गया। मां का पता लगाने के लिए अस्पतालों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आसपास के अस्पतालों और क्लीनिकों की पड़ताल की जाएगी ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।
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दो वर्षों में मिल चुके 21 कन्या भ्रूण
कूड़े के ढेर में कन्या भ्रूण मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है। तीन दिन पहले शुक्रवार को झांसी रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेन से कन्या भ्रूण बरामद हुआ था। कई ऐसे केस हैं। कभी जन्म लेने से पहले ही कोख में बेटियों का दम घोंट दिया गया तो कभी उनके भ्रूण कूड़े-कचरे में कुत्तों का निवाला बनने के लिए फेंक दिए गए। बेटियां मां-बाप की गोद में भी सुरक्षित नहीं हैं। शायद तभी शहर के शिशु विहार में भी लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, पिछले दो वर्षों में झांसी और आसपास 21 कन्या भ्रूण मिल चुके।
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मां मैं तो तेरी परी थी, तू कहती तो रोती भी नहीं...
दुनिया कदम रखने से पहले दम तोड़ने वाली बेटी मानो यह कहते चल बसी.... मां, मैं तो तेरी परी थी। तू कहती तो रोती भी नहीं। बस तेरे ममता के आंचल से लिपटी रहती लेकिन समय से पहले ही तूने मुझे अपने से दूर करके यह कौन सी सजा दी है। मां तू जानती है, जब तूने मुझे कूड़े के ढेर में फेंका तब मेरी सांस चल रही थी। तू मुझे प्यार से सीने से चिपका लेती तो शायद मैं जिंदा हो जाती। आखिर मेरा कुसूर सिर्फ यही था कि मैं लड़की थी...। अगर मुझे बचा लिया जाता और समय से जन्म लेती, तब अपनी मां से शायद यही सवाल करती।
शिशु विहार में 27 बच्चों में 19 लड़कियां
झांसी स्थित शिशु विहार में इन दिनों 27 बच्चों में 19 लड़कियां हैं। यहां इन बच्चियों को उनके अपने ही छोड़ गए लेकिन संस्था इन्हें आश्रय देकर इनकी देखभाल कर रही है। संस्था की ओर से भवन परिसर के बाहर एक पालना भी लगाया गया है। कई लोग यहां बच्चियों को छोड़ चुके हैं। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, झांसी में 1000 लड़कों के मुकाबले 886 लड़कियां थीं। वर्ष 2011 में यह आंकड़ा 859 पहुंच गया था। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार वर्तमान में 1000 लड़कों के मुकाबले अब 927 लड़कियां हैं जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 915 था। ऐसे में आंकड़ों में अब बेटा-बेटी का अंतर घट रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि बेटियां कहीं मारी जा रहीं तो कहीं उनके भ्रूण सड़कों पर फेंके जा रहे हैं।
बीएनएस में दंड के कठोर प्रावधान
भ्रूण हत्या और अवैध लिंग परीक्षण रोकने के लिए पूर्व गर्भाधान और प्रसवपूर्व नैदानिक तकनीक (पीसीपीएनडीटी ) अधिनियम, 1994 लागू है। अधिवक्ता राकेश पटेरिया के मुताबिक, महिला की सहमति के बिना अगर गर्भपात कराया जाता है तब बीएनएस की धारा 89 के तहत आजीवन कारावास या 10 साल तक की जेल और जुर्माने से दंडनीय है। अगर किसी अजन्मे बच्चे को जन्म से रोकने के लिए या जन्म के बाद उसकी हत्या करने के इरादे से कोई कदम उठाया जाता है तो इसमें बीएनएस की धारा 92 के तहत 10 साल कैद और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
लिंग चयनात्मक गर्भपात को रोकने के लिए गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम के तहत भ्रूण की जांच कराने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की जेल और 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर यह सजा 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक के जुर्माने में तब्दील हो सकती है।