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जोखिम से कैसे बचेंगी गर्भवतियां, जब आधों से ज्यादा की जांच ही नहीं हो रही
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झांसी। गर्भवतियों को जोखिम से बचाने के लिए कुछ जांचें कराना अनिवार्य है। झांसी में हालात ये हैं कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 44 फीसदी की ही एचआईवी और महज 10 प्रतिशत की सिफलिस की जांच हो पाई है। इसके अलावा अन्य जरूरी जांचों और टीकों में भी जिले के हालात ठीक नहीं हैं।
गर्भावस्था के दौरान कोई भी लापरवाही न सिर्फ मां, बल्कि बच्चे पर भी भारी पड़ सकती है। इसलिए हेपेटाइटिस-बी, एचआईवी, सिफलिस, ब्लड ग्रुप, शुगर, थायरायड जांचें गर्भवतियों के लिए अनिवार्य की गई हैं। इसके अलावा टिटनेस समेत कुछ टीके लगवाना भी जरूरी है। मगर वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों को देखें तो जिले की स्थिति सही नहीं है। साल भर में पंजीकृत हुईं 47624 गर्भवती महिलाओं में से 43380 को टिटनेस का पहला और 38528 को दूसरा टीका लगा है। आयरन फोलिक एसिड का पूरा कोर्स 43554 गर्भवतियों को चला है। जबकि, 36395 की ही चार बार प्रसव पूर्व जांच हुई हैं। सबसे अहम बात एचआईवी और सिफलिस जांच को लेकर सामने आई। आधे से भी कम यानी 21288 गर्भवती महिलाओं की ही एचआईवी और महज दस फीसदी यानी कि 4314 प्रतिशत की सिफलिस की जांच हो पाई है। जांच न होने पर बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
ये भी जानें
- 750 हाइपरटेंशन की रोगी मिलीं
- 1425 का हीमोग्लोबिन सात से कम मिला
- 1070 गंभीर एनीमिया की चपेट में मिलीं
एनएचएम के अंतर्गत मातृत्व स्वास्थ्य की सभी सेवाएं दिया जाना अहम है। इससे प्रसूता व नवजात शिशुओं का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित होगा। हर महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस आयोजित कर गर्भवती महिलाओं को मानक के अनुसार सभी सेवाएं देने की कोशिश की जा रही है। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।
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गर्भावस्था के दौरान कोई भी लापरवाही न सिर्फ मां, बल्कि बच्चे पर भी भारी पड़ सकती है। इसलिए हेपेटाइटिस-बी, एचआईवी, सिफलिस, ब्लड ग्रुप, शुगर, थायरायड जांचें गर्भवतियों के लिए अनिवार्य की गई हैं। इसके अलावा टिटनेस समेत कुछ टीके लगवाना भी जरूरी है। मगर वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों को देखें तो जिले की स्थिति सही नहीं है। साल भर में पंजीकृत हुईं 47624 गर्भवती महिलाओं में से 43380 को टिटनेस का पहला और 38528 को दूसरा टीका लगा है। आयरन फोलिक एसिड का पूरा कोर्स 43554 गर्भवतियों को चला है। जबकि, 36395 की ही चार बार प्रसव पूर्व जांच हुई हैं। सबसे अहम बात एचआईवी और सिफलिस जांच को लेकर सामने आई। आधे से भी कम यानी 21288 गर्भवती महिलाओं की ही एचआईवी और महज दस फीसदी यानी कि 4314 प्रतिशत की सिफलिस की जांच हो पाई है। जांच न होने पर बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
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- 1425 का हीमोग्लोबिन सात से कम मिला
- 1070 गंभीर एनीमिया की चपेट में मिलीं
एनएचएम के अंतर्गत मातृत्व स्वास्थ्य की सभी सेवाएं दिया जाना अहम है। इससे प्रसूता व नवजात शिशुओं का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित होगा। हर महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस आयोजित कर गर्भवती महिलाओं को मानक के अनुसार सभी सेवाएं देने की कोशिश की जा रही है। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।
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