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अनुपयोगी सामग्री को उपयोग में लाने की कला बताई

Thu, 31 Jan 2019 01:37 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Thu, 31 Jan 2019 01:37 AM IST
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how to use wastege matteriol
aprajita 100 miliun smiles - फोटो : amarujala
अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत बुधवार को ‘व्यर्थ को अर्थ’ कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें अनुपयोगी सामग्री को उपयोग में लाने की कला सिखाई गई। इस दौरान शपथ पत्र भरकर नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली गई।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में आयोजित कार्यशाला में ट्रेनर नीलम सारंगी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे विद्यार्थी जीवन में सिर्फ पाठ्यक्रम तक सिमट कर न रहें, बल्कि अपने ज्ञान को विस्तार दें। उन्होंने बताया कि घर में पौधे लगाने से पहले मिट्टी का ट्रीटमेंट जरूरी है। ये ट्रीटमेंट रसोई की बची हुई सब्जी, फल, चाय पत्ती आदि खाद्य सामग्रियों से किया जा सकता है। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट को इंटीरियर डेकोरेशन के काम में लाया जा सकता है। पुराने प्लास्टिक ग्लास, बोतल, जूते व अन्य सामग्रियों से घर सजाया जा सकता है। इसके अलावा पूजा के फूल और सब्जियों को भी नहीं फेंकना चाहिए। इससे एंजाइम बनाकर साफ-सफाई के काम में लाया जा सकता है। इस दौरान ट्रेनर ने अपनी बनाई हुई सामग्री का प्रदर्शन किया और बनाने के तरीके भी बताए।
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इस मौके पर प्रेमकुमार गौतम, जयराम कुटार, डा. मोहम्मद नईम, डा. अजय कुमार गुप्ता, डा. सुनीता, मुकुल वर्मा, दिलीप कुमार मौजूद रहे। आभार ललित कला संस्थान की समन्वयक डा. श्वेता पांडेय ने जताया।
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अमृता शेरगिल को श्रद्धांजलि
ललित कला संस्थान में मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अमृता शेरगिल को पोस्टरों में सजाया, जिनकी प्रदर्शनी भी लगाई गई।

कार्यशाला में मालूम चला कि जिन चीजों को हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, वे भी कितनी उपयोगी हो सकती हैं। कोई भी चीज व्यर्थ नहीं है, सभी को काम में लाया जा सकता है।
- रौनक सिरोठिया, बीएफए प्रथम वर्ष


अनुपयोगी सामग्री को उपयोगी बनाने के लिए महत्वपूर्ण है आपका दृष्टिकोण और नजरिया विकसित करने के लिए जानकारियां होना जरूरी है। कार्यशाला में ये जानने को मिला।

- रिया सिंह, बीएफए द्वितीय वर्ष
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बेकार को कैसे आकार दिया जाएगा, कार्यशाला में ये जानने को मिला। इस कला के माध्यम से बेहद कम खर्च पर हम सजावट के शानदार सामान बना सकते हैं।
- नंदिनी कुशवाहा, बीएफए द्वितीय वर्ष

कार्यशाला में पता चला कि कोई भी चीज बेकार नहीं है। सभी को उपयोग में लाया जा सकता है। ऐसी चीजें लोग खूब पसंद करते हैं। इससे रोजगार सृजन भी किया जा सकता है।
- दीक्षा दीक्षित, बीएफए तृतीय वर्ष
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