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इस बार होली पर देसी पिचकारियों की रहेगी धूम
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होली के लिए बाजारों में मिल रहे देशी मुखौटे व सजी पिचकारियां।
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झांसी। रंगोत्सव होली का पर्व नजदीक आ चुका है। महानगर के होली बाजार में एक से बढ़कर एक पिचकारियां बच्चों को लुभाने में लगी हैं। लेकिन इनमें इस बार चीन की पिचकारियां और रंग गुलाल बच्चों के लिए बाजार में नहीं है। इसकी वजह कोरोना वायरस का डर कारोबारियों में बना हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि जो पुराना माल बचा है। अब वही बेचा जा रहा है दिसंबर के बाद नया माल नहीं मंगाया है।
होली को लेकर स्थानीय बाजार में पिचकारी से लेकर रंग बिरंगे मुखौटे, स्प्रे, गुब्बारे, गुलाल आदि बाजार में बिकने शुरू हो गए हैं, जो इंदौर, दिल्ली, हाथरस, ग्वालियर आदि में निर्मित हैं। व्यापारियों के अनुसार होली में इनका कारोबार लगभग दो करोड़ रुपये का है। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक चीनी आइटमों को लेकर है।
इनके अनुसार होली पर चीन की पिचकारी, कई फ्लेवर में स्प्रे और रंगों की मांग रहती है। सस्ते होने के कारण इनकी बिक्री ज्यादा होती है। लेकिन इस साल कोरोना वायरस के डर से चीन की पिचकारी, मुखौटे, स्प्रे आदि नहीं मंगवाए गए हैं। सभी माल स्वदेशी है। इनके अनुसार चीन निर्मित पिचकारियों का जो पुराना माल है। उनमें भी 20 प्रतिशत दाम बढ़ गए हैं। यानि दस रुपये की पिचकारी अब 12 रुपये और उससे अधिक के दामों में बिक रही है। इसके अलावा आम खरीदार भी चीन क ी पिचकारी से परहेज कर रहा है।
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करोना वायरस के कारण दिसंबर के बाद से चीन से माल आना बंद हो गया है। मंगाना भी बंद कर दिया है। पुराना माल ही पिछले साल का बेच रहे हैं।
प्रदीप जैन चैनू, व्यापारी
इस बार बाजार में देशी पिचकारियां खूब आयी हैं। इसके साथ ही हर्बल कलर भी ऐसे आये हैं, जो पाउडर में भी हैं जो पानी में जल्द घुल जाएं।
सनी, पिचकारी व्यापारी
होली बाजार में आयी आकर्षक पिचकारियां
महानगर का होली बाजार इस बार कई खुशबूवाले हर्बल कलर उपलब्ध हैं। जो चंदन, केवड़ा के सुगंध दे रहे हैं। साथ ही, टेसू के फूल के सूखे कलर भी पाउडर में हैं। जो हरे, पीले, नारंगी, बैगनी आदि में हैं। इस बार बाजार में हर्बल कलरों की तमाम वैराइटी हैं। इसके साथ ही देशी पिचकारियां भी तीन रुपये से लेकर 500 रुपये तक में मौजूद हैं। इनकी खूबी यह है, कि यह चाइना क ी पिचकारियों से ज्यादा मजबूत हैं और सस्ती भी हैं। इनमें डोरेमोन पिचकारी, लाइट वाली बंदूक, स्पाइडर मैन, छोटा भीम, बोतल पिचकारी, फुब्बारा पिचकारी, स्प्रे आदि है। साथ ही देशी मुखौटे भी खूब आए है। जिनमें भालू, भूत, शेर आदि है।
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होली को लेकर स्थानीय बाजार में पिचकारी से लेकर रंग बिरंगे मुखौटे, स्प्रे, गुब्बारे, गुलाल आदि बाजार में बिकने शुरू हो गए हैं, जो इंदौर, दिल्ली, हाथरस, ग्वालियर आदि में निर्मित हैं। व्यापारियों के अनुसार होली में इनका कारोबार लगभग दो करोड़ रुपये का है। इसमें 50 प्रतिशत से अधिक चीनी आइटमों को लेकर है।
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इनके अनुसार होली पर चीन की पिचकारी, कई फ्लेवर में स्प्रे और रंगों की मांग रहती है। सस्ते होने के कारण इनकी बिक्री ज्यादा होती है। लेकिन इस साल कोरोना वायरस के डर से चीन की पिचकारी, मुखौटे, स्प्रे आदि नहीं मंगवाए गए हैं। सभी माल स्वदेशी है। इनके अनुसार चीन निर्मित पिचकारियों का जो पुराना माल है। उनमें भी 20 प्रतिशत दाम बढ़ गए हैं। यानि दस रुपये की पिचकारी अब 12 रुपये और उससे अधिक के दामों में बिक रही है। इसके अलावा आम खरीदार भी चीन क ी पिचकारी से परहेज कर रहा है।
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करोना वायरस के कारण दिसंबर के बाद से चीन से माल आना बंद हो गया है। मंगाना भी बंद कर दिया है। पुराना माल ही पिछले साल का बेच रहे हैं।
प्रदीप जैन चैनू, व्यापारी
इस बार बाजार में देशी पिचकारियां खूब आयी हैं। इसके साथ ही हर्बल कलर भी ऐसे आये हैं, जो पाउडर में भी हैं जो पानी में जल्द घुल जाएं।
सनी, पिचकारी व्यापारी
होली बाजार में आयी आकर्षक पिचकारियां
महानगर का होली बाजार इस बार कई खुशबूवाले हर्बल कलर उपलब्ध हैं। जो चंदन, केवड़ा के सुगंध दे रहे हैं। साथ ही, टेसू के फूल के सूखे कलर भी पाउडर में हैं। जो हरे, पीले, नारंगी, बैगनी आदि में हैं। इस बार बाजार में हर्बल कलरों की तमाम वैराइटी हैं। इसके साथ ही देशी पिचकारियां भी तीन रुपये से लेकर 500 रुपये तक में मौजूद हैं। इनकी खूबी यह है, कि यह चाइना क ी पिचकारियों से ज्यादा मजबूत हैं और सस्ती भी हैं। इनमें डोरेमोन पिचकारी, लाइट वाली बंदूक, स्पाइडर मैन, छोटा भीम, बोतल पिचकारी, फुब्बारा पिचकारी, स्प्रे आदि है। साथ ही देशी मुखौटे भी खूब आए है। जिनमें भालू, भूत, शेर आदि है।