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मुसीबत बने बिजली के बढ़े बिल
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 12 Jul 2017 01:02 AM IST
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- फोटो : demo pic
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महानगर के पांच हजार से अधिक उपभोक्ता पिछले तीन-चार महीनों से अधिक यूनिट का बिल आने से परेशान हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर तेज भाग रहे हैं। विभाग के पास भी कोई ऐसी मशीन नहीं, जिससे पता लगाया जा सके कि मीटर में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है। चेक मीटर लगवाने के लिए उपभोक्ता से 1080 रुपये जमा कराए जा रहे हैं।
बिजली विभाग में लगातार मीटर तेज भागने की शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दिसंबर 2016 से 22 से 23 घंटे बिजली उनको मिल रही है, लेकिन औसत बिल एक हजार से दो हजार के बीच ही आता था, लेकिन पिछले तीन-चार महीने से बिल बढ़कर तीन हजार से चार हजार तक पहुंच गया है। अधिकारी अधिक बिजली आना को कारण बता रहे हैं, जबकि वे पहले जितने संसाधनों का प्रयोग करते थे अब भी उतने ही कर रहे हैं। यहीं कारण है कि हर महीने पांच सौ के करीब उपभोक्ता चेक मीटर लगवाने के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। अधिशासी अभियंता (प्रथम) गौरव कुमार ने बताया कि पहले मेकेनिकल मीटर लगाए जाते थे, जो इतने संवेदनशील नहीं थे कि मामूली बिजली खपत को पकड़ सकें। लेकिन डिजिटल मीटर जीरो वाट बल्ब के इस्तेमाल की भी गणना कर लेता है। यानी खपत के 100वें भाग को भी पकड़ लेते हैं। पहले औसत 16 घंटे मिलती थी पर अब 22 घंटे बिजली मिल रही है। प्रति यूनिट रेट भी बढ़कर पांच रुपये पर पहुंच गए हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को लगता है कि बिजली बिल ज्यादा आ रहा है।
चेक मीटर से दूर करें भ्रम
अगर कोई उपभोक्ता चाहे तो वे निर्धारित फीस (1080 रुपये) जमा कर चेक मीटर लगवा सकते हैं। भवन में लगे और चेक मीटर से एक महीने की रीडिंग ली जाएगी। पता लग जाएगा कि मीटर खराब है या सही रीडिंग ले रहा है।
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इन कमियों से बढ़ता है बिजली बिल
- न्यूट्रल तार का ढीला होना, भवन में पुरानी फिटिंग, स्विच ऑन होने पर, जीरो वाट का बल्ब जलाने पर, लोकल कंपनी का इनवर्टर, बैटरी, लगातार मोबाइल फोन की चार्जिंग, रिमोट से टीवी बंद करने पर, इंडीकेटर का उपयोग करने पर।
ऐसे बचाएं बिजली
बिजली उपकरण फिटिंग में कहीं भी कट व स्पार्क़िग की जगह नहीं होनी चाहिए, मोबाइल चार्ज होने के बाद स्विच बंद कर दें, हर बोर्ड पर इंडीकेटर का उपयोग न करें, बिजली उपयोग करें, तभी स्विच खोलें, पानी भरने के बाद मोटर बंद कर दें, एलईडी और सीएफएल इस्तेमाल करें, ब्रांडेड इनवर्टर और बैटरी का ही इस्तेमाल करें।
फोटो
एक माह पहले दिया था प्रार्थना पत्र
पिछले चार माह से मेरे घर का बिजली बिल तीन हजार से ऊपर आने लगा है। इसके पहले डेढ़ हजार से ज्यादा कभी नहीं आया। पड़ोसियों के भी इसी औसत में बिल आते हैं। मगर, जब से अधिक राशि का बिल आने लगा है, मैं परेशान हूं। विभाग में एक माह पहले प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। - चंद्रशेखर, आईटीआई सिद्धेश्वर नगर।
क्या न करें
- मीटर खराब होना, मीटर के सीलों का टूटा पाया जाना, मीटर के पूर्व केबिल में ज्वाइंट होने, चेंज ओवर या कट आउट लगाना।
- मीटर के अंदर खपत कम करने के लिए शंट या रिमोट लगाना।
- स्वीकृत भार से ज्यादा भार का प्रयोग करना।
- कटे हुए कनेक्शन को बिना बकाया जमा कराए चालू करना।
- पड़ोसी को बिजली बेचना, खरीदना या फर्जी हलफनामा देकर कनेक्शन लेना।
- बिजली लाइनों से कटिया डालकर बिजली का प्रयोग करना।
- मीटर के साथ छेड़खानी कर ऊर्जा खपत को बाधित करना।
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महानगर के पांच हजार से अधिक उपभोक्ता पिछले तीन-चार महीनों से अधिक यूनिट का बिल आने से परेशान हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर तेज भाग रहे हैं। विभाग के पास भी कोई ऐसी मशीन नहीं, जिससे पता लगाया जा सके कि मीटर में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है। चेक मीटर लगवाने के लिए उपभोक्ता से 1080 रुपये जमा कराए जा रहे हैं।
बिजली विभाग में लगातार मीटर तेज भागने की शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दिसंबर 2016 से 22 से 23 घंटे बिजली उनको मिल रही है, लेकिन औसत बिल एक हजार से दो हजार के बीच ही आता था, लेकिन पिछले तीन-चार महीने से बिल बढ़कर तीन हजार से चार हजार तक पहुंच गया है। अधिकारी अधिक बिजली आना को कारण बता रहे हैं, जबकि वे पहले जितने संसाधनों का प्रयोग करते थे अब भी उतने ही कर रहे हैं। यहीं कारण है कि हर महीने पांच सौ के करीब उपभोक्ता चेक मीटर लगवाने के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं। अधिशासी अभियंता (प्रथम) गौरव कुमार ने बताया कि पहले मेकेनिकल मीटर लगाए जाते थे, जो इतने संवेदनशील नहीं थे कि मामूली बिजली खपत को पकड़ सकें। लेकिन डिजिटल मीटर जीरो वाट बल्ब के इस्तेमाल की भी गणना कर लेता है। यानी खपत के 100वें भाग को भी पकड़ लेते हैं। पहले औसत 16 घंटे मिलती थी पर अब 22 घंटे बिजली मिल रही है। प्रति यूनिट रेट भी बढ़कर पांच रुपये पर पहुंच गए हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को लगता है कि बिजली बिल ज्यादा आ रहा है।
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चेक मीटर से दूर करें भ्रम
अगर कोई उपभोक्ता चाहे तो वे निर्धारित फीस (1080 रुपये) जमा कर चेक मीटर लगवा सकते हैं। भवन में लगे और चेक मीटर से एक महीने की रीडिंग ली जाएगी। पता लग जाएगा कि मीटर खराब है या सही रीडिंग ले रहा है।
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इन कमियों से बढ़ता है बिजली बिल
- न्यूट्रल तार का ढीला होना, भवन में पुरानी फिटिंग, स्विच ऑन होने पर, जीरो वाट का बल्ब जलाने पर, लोकल कंपनी का इनवर्टर, बैटरी, लगातार मोबाइल फोन की चार्जिंग, रिमोट से टीवी बंद करने पर, इंडीकेटर का उपयोग करने पर।
ऐसे बचाएं बिजली
बिजली उपकरण फिटिंग में कहीं भी कट व स्पार्क़िग की जगह नहीं होनी चाहिए, मोबाइल चार्ज होने के बाद स्विच बंद कर दें, हर बोर्ड पर इंडीकेटर का उपयोग न करें, बिजली उपयोग करें, तभी स्विच खोलें, पानी भरने के बाद मोटर बंद कर दें, एलईडी और सीएफएल इस्तेमाल करें, ब्रांडेड इनवर्टर और बैटरी का ही इस्तेमाल करें।
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एक माह पहले दिया था प्रार्थना पत्र
पिछले चार माह से मेरे घर का बिजली बिल तीन हजार से ऊपर आने लगा है। इसके पहले डेढ़ हजार से ज्यादा कभी नहीं आया। पड़ोसियों के भी इसी औसत में बिल आते हैं। मगर, जब से अधिक राशि का बिल आने लगा है, मैं परेशान हूं। विभाग में एक माह पहले प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। - चंद्रशेखर, आईटीआई सिद्धेश्वर नगर।
क्या न करें
- मीटर खराब होना, मीटर के सीलों का टूटा पाया जाना, मीटर के पूर्व केबिल में ज्वाइंट होने, चेंज ओवर या कट आउट लगाना।
- मीटर के अंदर खपत कम करने के लिए शंट या रिमोट लगाना।
- स्वीकृत भार से ज्यादा भार का प्रयोग करना।
- कटे हुए कनेक्शन को बिना बकाया जमा कराए चालू करना।
- पड़ोसी को बिजली बेचना, खरीदना या फर्जी हलफनामा देकर कनेक्शन लेना।
- बिजली लाइनों से कटिया डालकर बिजली का प्रयोग करना।
- मीटर के साथ छेड़खानी कर ऊर्जा खपत को बाधित करना।