{"_id":"62fd3c36a47ab844585a71a3","slug":"hey-kanhaiya-you-have-been-fighting-between-up-and-mp-again-jhansi-news-jhs22688989","type":"story","status":"publish","title_hn":"हे कन्हैया, यूपी और एमपी के बीच मारी मारी फिर रही तुम्हारी गैया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हे कन्हैया, यूपी और एमपी के बीच मारी मारी फिर रही तुम्हारी गैया
विज्ञापन
झांसी। कान्हा की प्रिय गैया आज मारी-मारी फिर रही है। यूपी और एमपी के बीच तो रोज इसे लेकर विवाद होने लगा है। यूपी वाले सड़कों पर घूम रहीं गैया को एमपी की सीमा में खदेड़ देते हैं तो एमपी वाले यूपी की तरफ हांक रहे हैं। दोनों ही राज्यों की पुलिस तक भी विवाद पहुंचने लगा है लेकिन हल कुछ नहीं निकल सका। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक झांसी मंडल में आज भी 29 हजार से अधिक गायें सड़कों पर हैं।
यूं तो बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं की समस्या खत्म करने के लिए गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। झांसी में स्थाई एवं अस्थाई मिलाकर कुल 276 गो-आश्रय स्थल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां 37, 531 गोवंश ही संरक्षित हैं जबकि जनपद में कुल करीब 52 हजार अन्ना गोवंश चिन्हित हुए हैं। इस तरह झांसी में ही 15 हजार गोवंश सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। यही हाल ललितपुर एवं जालौन का है। ललितपुर में 8 हजार एवं जालौन में 6 हजार गोवंश सड़कोें पर घूम रहे हैं। इनको न खाना मिलता है, ना पानी। इनके पुर्नवास का भी कोई इंतजाम नहीं है। वहीं, गो-आश्रय स्थलों के रख रखाव में ग्राम पंचायतों को भी हिस्सेदारी करनी होती है। अपने हिस्से का खर्च बचाने की खातिर गो-आश्रय स्थलों पर क्षमता के मुताबिक गोवंश नहीं रखे जाते। झांसी में बंगरा, मऊरानीपुर, मोंठ, गरौठा ब्लॉक की गोशालाओं में क्षमता से करीब पचास फीसदी कम गोवंश हैं। बड़ी संख्या में यह आवारा गोवंश ललितपुर राजमार्ग, बबीना राजमार्ग, कानपुर हाइवे समेत अन्य स्थानों पर दिखाई पड़ते हैं। समय पर खाना न मिलने से यह गोवंश सड़क किनारे पड़े दूषित खाद्य एवं पॉलीथिन खाकर ही गुजारा कर रहे हैं।
भूसा महंगा होने की वजह से छोड़े जा रहे गोवंश
भूसा के दाम में तेजी बनी हुई है। इस समय भी भूसा करीब 1500-1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। एक गोवंश पर रोजाना करीब दस किलो भूसा का खर्च है जबकि अधिकतम चार लीटर दूध ही मिल पाता है। काफी महंगा होने की वजह से पशुपालक गाय को बाहर छोड़ दे रहे हैं।
विज्ञापन
अन्ना गोवंश को गो-आश्रय स्थलों पर रखने की व्यवस्था है। इनकी निगरानी भी रखी जाती है। आवारा गोवंश की शिकायत मिलने पर उनकी खोज कराकर इनको आश्रय स्थल भेजा जाता है। गो-आश्रय स्थालों में भूसा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
डा.विवेक कुमार
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
यूं तो बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं की समस्या खत्म करने के लिए गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। झांसी में स्थाई एवं अस्थाई मिलाकर कुल 276 गो-आश्रय स्थल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां 37, 531 गोवंश ही संरक्षित हैं जबकि जनपद में कुल करीब 52 हजार अन्ना गोवंश चिन्हित हुए हैं। इस तरह झांसी में ही 15 हजार गोवंश सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। यही हाल ललितपुर एवं जालौन का है। ललितपुर में 8 हजार एवं जालौन में 6 हजार गोवंश सड़कोें पर घूम रहे हैं। इनको न खाना मिलता है, ना पानी। इनके पुर्नवास का भी कोई इंतजाम नहीं है। वहीं, गो-आश्रय स्थलों के रख रखाव में ग्राम पंचायतों को भी हिस्सेदारी करनी होती है। अपने हिस्से का खर्च बचाने की खातिर गो-आश्रय स्थलों पर क्षमता के मुताबिक गोवंश नहीं रखे जाते। झांसी में बंगरा, मऊरानीपुर, मोंठ, गरौठा ब्लॉक की गोशालाओं में क्षमता से करीब पचास फीसदी कम गोवंश हैं। बड़ी संख्या में यह आवारा गोवंश ललितपुर राजमार्ग, बबीना राजमार्ग, कानपुर हाइवे समेत अन्य स्थानों पर दिखाई पड़ते हैं। समय पर खाना न मिलने से यह गोवंश सड़क किनारे पड़े दूषित खाद्य एवं पॉलीथिन खाकर ही गुजारा कर रहे हैं।
विज्ञापन
भूसा महंगा होने की वजह से छोड़े जा रहे गोवंश
भूसा के दाम में तेजी बनी हुई है। इस समय भी भूसा करीब 1500-1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। एक गोवंश पर रोजाना करीब दस किलो भूसा का खर्च है जबकि अधिकतम चार लीटर दूध ही मिल पाता है। काफी महंगा होने की वजह से पशुपालक गाय को बाहर छोड़ दे रहे हैं।
विज्ञापन
अन्ना गोवंश को गो-आश्रय स्थलों पर रखने की व्यवस्था है। इनकी निगरानी भी रखी जाती है। आवारा गोवंश की शिकायत मिलने पर उनकी खोज कराकर इनको आश्रय स्थल भेजा जाता है। गो-आश्रय स्थालों में भूसा की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
डा.विवेक कुमार
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी