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गुमनावारा में हैंडपंपों ने भी छोड़ा साथ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Mar 2017 12:40 AM IST
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गुमनावारा में हैंडपंपों ने भी छोड़ा साथ
- फोटो : demo
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गर्मी की शुरुआत में ही गुमनावारा और मेडिकल कालेज के आसपास के मोहल्ले पानी के जबर्दस्त संकट से जूझ रहे हैं। ज्यादातर हैंडपंप सूख गए हैं और उनमें से एक बूंद भी पानी नहीं मिल रहा है।
महानगर का मेडिकल कालेज इलाका ड्राई क्षेत्र में आता है। यहां गुमनावारा, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी और करगुवांजी जैसे क्षेत्रों को विकसित हुए 17 साल बीत चुके हैं, मगर आज भी यहां पेयजल आपूर्ति के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। भूगर्भ जलस्तर इस कदर नीचे जा रहा है कि दस साल पहले करवाई गई बोरिंग का भी लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों ने हाल ही बोरिंग करवाई और अब पानी बेच रहे हैं। आसपास इलाके में पाइप लाइन भी बिछा दी है और इसकेे जरिए घरों तक पानी पहुंचा रहे हैं। पानी के कनेक्शन के लिए पांच हजार रुपये जमानत राशि और फिर हर महीने 12 सौ रुपये तक वसूल रहे हैं। यह पूरा धंधा अवैध है, पर किसी को चिंता नहीं है।
लोगों का दर्द
दस साल पहले मैंने मकान बनाने की शुरूआत की थी, तब एक घंटे लगातार बोरिंग के जरिए पानी मिल जाता था। अब बोरिंग सूख गई है। इसके बाद दो और बोरिंग डेढ़ सौ फीट गहराई तक करा चुके हैं, मगर आधे घंटे में एक-दो बाल्टी से ज्यादा पानी नहीं निकलता है।
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चिरंजी लाल तिवारी
सात मिनट में खाली हो जाता है टैंकर
मई और जून में ही जल संस्थान द्वारा यहां टैंकर भेजे जाते हैं। चूंकि, परेशान परिवार इतने अधिक हैं कि सात मिनट में ही एक टैंकर खाली हो जाता है। आसपास की गलियों में चार हैंडपंप लगे हैं, मगर उनमें भी पानी नहीं आ रहा है।
क्रांति कुमार शर्मा
खरीदना पड़ता है पीने का पानी
टैंकर का पानी बिना साफ किए (ट्रीटमेंट) के मुहैया करवाया जाता है। लगातार ऐसा पानी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है। इस कारण हमें पीने के पानी के लिए प्रतिदिन 20 रुपये का कंटेनर खरीदना पड़ता है।
आशीष पटेल
नतीजा सिफर
पानी की समस्या को दूर कराने के लिए में स्थानीय लोगों के साथ कई बार जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी, जल संस्थान, जल निगम और नगर निगम के अधिकारियों के पास चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
प्रदीप सिंह चौहान
सुझाव
- मेडिकल कॉलेज की पाइप लाइन से इस क्षेत्र को जोड़ा जा सकता है।
- वीरांगना नगर में ट्यूबवेल वाली लाइन से भी पानी दिया जा सकता है।
- श्याम चौपड़ा नारायण बाग पर भी ट्यूबवेल लगाया जा सकता है।
पाइप लाइन डलने पर ही दूर होगी समस्या
जल निगम ने पेयजल महायोजना के अंतर्गत इन क्षेत्रों को शामिल कर रखा है। पाइप लाइन बिछने के बाद ही पानी उपलब्ध करा सकेंगे। गर्मियों में शासन से पैसा मिलने पर जल संस्थान इन क्षेत्रों में तीन माह तक लगातार टैंकरों से पानी पहुंचाता हैं।
एपी यादव, अधिशासी अभियंता जल निगम
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महानगर का मेडिकल कालेज इलाका ड्राई क्षेत्र में आता है। यहां गुमनावारा, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी और करगुवांजी जैसे क्षेत्रों को विकसित हुए 17 साल बीत चुके हैं, मगर आज भी यहां पेयजल आपूर्ति के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। भूगर्भ जलस्तर इस कदर नीचे जा रहा है कि दस साल पहले करवाई गई बोरिंग का भी लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों ने हाल ही बोरिंग करवाई और अब पानी बेच रहे हैं। आसपास इलाके में पाइप लाइन भी बिछा दी है और इसकेे जरिए घरों तक पानी पहुंचा रहे हैं। पानी के कनेक्शन के लिए पांच हजार रुपये जमानत राशि और फिर हर महीने 12 सौ रुपये तक वसूल रहे हैं। यह पूरा धंधा अवैध है, पर किसी को चिंता नहीं है।
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लोगों का दर्द
दस साल पहले मैंने मकान बनाने की शुरूआत की थी, तब एक घंटे लगातार बोरिंग के जरिए पानी मिल जाता था। अब बोरिंग सूख गई है। इसके बाद दो और बोरिंग डेढ़ सौ फीट गहराई तक करा चुके हैं, मगर आधे घंटे में एक-दो बाल्टी से ज्यादा पानी नहीं निकलता है।
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चिरंजी लाल तिवारी
सात मिनट में खाली हो जाता है टैंकर
मई और जून में ही जल संस्थान द्वारा यहां टैंकर भेजे जाते हैं। चूंकि, परेशान परिवार इतने अधिक हैं कि सात मिनट में ही एक टैंकर खाली हो जाता है। आसपास की गलियों में चार हैंडपंप लगे हैं, मगर उनमें भी पानी नहीं आ रहा है।
क्रांति कुमार शर्मा
खरीदना पड़ता है पीने का पानी
टैंकर का पानी बिना साफ किए (ट्रीटमेंट) के मुहैया करवाया जाता है। लगातार ऐसा पानी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है। इस कारण हमें पीने के पानी के लिए प्रतिदिन 20 रुपये का कंटेनर खरीदना पड़ता है।
आशीष पटेल
नतीजा सिफर
पानी की समस्या को दूर कराने के लिए में स्थानीय लोगों के साथ कई बार जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी, जल संस्थान, जल निगम और नगर निगम के अधिकारियों के पास चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर है।
प्रदीप सिंह चौहान
सुझाव
- मेडिकल कॉलेज की पाइप लाइन से इस क्षेत्र को जोड़ा जा सकता है।
- वीरांगना नगर में ट्यूबवेल वाली लाइन से भी पानी दिया जा सकता है।
- श्याम चौपड़ा नारायण बाग पर भी ट्यूबवेल लगाया जा सकता है।
पाइप लाइन डलने पर ही दूर होगी समस्या
जल निगम ने पेयजल महायोजना के अंतर्गत इन क्षेत्रों को शामिल कर रखा है। पाइप लाइन बिछने के बाद ही पानी उपलब्ध करा सकेंगे। गर्मियों में शासन से पैसा मिलने पर जल संस्थान इन क्षेत्रों में तीन माह तक लगातार टैंकरों से पानी पहुंचाता हैं।
एपी यादव, अधिशासी अभियंता जल निगम