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हाल ए आंगनबाड़ी: कहीं दरक रहीं इमारत, कहीं अव्यवस्थाएं हावी
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झांसी। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को बेसिक शिक्षा के साथ समाहित करने की तैयारी में जुटी है। निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉड्यूल की बराबरी करते हुए इन्हें प्री प्राइमरी के तौर पर संचालित करने का खाका खींचा गया है। बच्चों को कुपोषण मुक्त करने का जिम्मा संभाले आंगनबाड़ी केंद्र ही कुपोषण के शिकार हैं। हालात यह हैं कि केंद्रों पर न तो बच्चों के बैठने का पर्याप्त इंतजाम है और न ही अन्य व्यवस्थाएं हैं। इसके साथ ही कई केंद्र तो इस हाल में हैं कि कभी भी गिर सकते हैं। अमर उजाला टीम ने महानगर के आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की, तो सरकार की योजना की हकीकत सामने आई।
जर्जर इमारत में खतरे में जान
महानगर के गुदरी इलाके में आंगनबाड़ी केंद्र एक जर्जर भवन में चलता है। सालों से चल रहे इस केंद्र की स्थिति को सुधारने की कोई पहल नहीं की गई है। हालात यह हैं कि एक कमरे में चलने वाले केंद्र में न तो प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था और न ही पानी का इंतजाम है। हैंडपंप काफी समय से खराब पड़ा है। करीब 50 बच्चों का पोषण स्तर सुधारने की कवायद के लिए बने केंद्र को खुद ही पोषण की दरकार है। इसके साथ ही केंद्र के बाहर भी गंदगी का आलम है।
एक कमरे में चलता है केंद्र
उन्नाव गेट अंदर स्थित आंगनबाड़ी केेंद्र एक घर के कमरे में संचालित होता है। यहां पर करीब 75 बच्चे और 13 धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। केंद्र पर बच्चों के खेलकूद के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। केंद्र संचालिका कार्यकर्ता रामकली बताती हैं कि पिछले दिनों प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन उसके बाद से कुछ भी बताया नहीं गया। केंद्र पर बच्चे जमीन पर बैठते हैं। हर महीने पोषाहार दिया जाता है, लेकिन केंद्र पर शिक्षण सामग्री नहीं है। कार्यकर्ता ने बताया कि महीनों तक केंद्र का किराया तक नहीं दिया जाता।
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भांडेरी गेट केंद्र भी बदहाल
भांडेरी गेट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भी कुछ ऐसा ही है। यह केंद्र भी घर में किराये पर कमरे में संचालित होता है। यहां न तो शिक्षण सामग्री है और न ही बच्चों के बैठने का पर्याप्त इंतजाम है। केंद्र पर 40 बच्चे पंजीकृत हैं। केंद्र का बोर्ड भी जमीन पर लगा हुआ है। बाहर से देखने पर पता ही नहीं चलता कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र है। केंद्र पर मिलीं सहायिका लक्ष्मी ने बताया कि 10 साल से केंद्र चल रहा है। यहां केवल पोषाहार बांटने तक ही गतिविधियां सीमित हैं।
उन्नाव गेट केंद्र भी कुपोषित
उन्नाव गेट बाहर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भी व्यवस्थाएं खराब हैं। किराये के भवन में चलने वाले इस केंद्र पर करीब 111 बच्चों का पंजीकरण है। जबकि 26 गर्भवतियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। केंद्र पर स्थित कक्ष में इतनी व्यवस्था नहीं है कि पूरे बच्चे बैठ सकें। ऐसे में घर के बाहर स्थित आंगन में कार्यकर्ता बच्चों को खेल खिलाती हैं। यहां कार्यरत कार्यकर्ता हेमलता ने बताया कि केंद्र का किराया मिलता नहीं है। 2007 से केंद्र चल रहा है। प्री प्राइमरी शुरू कराने के लिए कहा गया है, लेकिन व्यवस्था मुहैया नहीं कराई गई हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी में तब्दील करने का काम बेसिक शिक्षा विभाग के पास है। इसकेे लिए कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग कराई गई है। महानगर में जिन केंद्रों की हालत खराब हैं, वहां पर व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा।
नरेंद्र सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जर्जर इमारत में खतरे में जान
महानगर के गुदरी इलाके में आंगनबाड़ी केंद्र एक जर्जर भवन में चलता है। सालों से चल रहे इस केंद्र की स्थिति को सुधारने की कोई पहल नहीं की गई है। हालात यह हैं कि एक कमरे में चलने वाले केंद्र में न तो प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था और न ही पानी का इंतजाम है। हैंडपंप काफी समय से खराब पड़ा है। करीब 50 बच्चों का पोषण स्तर सुधारने की कवायद के लिए बने केंद्र को खुद ही पोषण की दरकार है। इसके साथ ही केंद्र के बाहर भी गंदगी का आलम है।
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एक कमरे में चलता है केंद्र
उन्नाव गेट अंदर स्थित आंगनबाड़ी केेंद्र एक घर के कमरे में संचालित होता है। यहां पर करीब 75 बच्चे और 13 धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। केंद्र पर बच्चों के खेलकूद के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। केंद्र संचालिका कार्यकर्ता रामकली बताती हैं कि पिछले दिनों प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन उसके बाद से कुछ भी बताया नहीं गया। केंद्र पर बच्चे जमीन पर बैठते हैं। हर महीने पोषाहार दिया जाता है, लेकिन केंद्र पर शिक्षण सामग्री नहीं है। कार्यकर्ता ने बताया कि महीनों तक केंद्र का किराया तक नहीं दिया जाता।
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भांडेरी गेट केंद्र भी बदहाल
भांडेरी गेट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का भी कुछ ऐसा ही है। यह केंद्र भी घर में किराये पर कमरे में संचालित होता है। यहां न तो शिक्षण सामग्री है और न ही बच्चों के बैठने का पर्याप्त इंतजाम है। केंद्र पर 40 बच्चे पंजीकृत हैं। केंद्र का बोर्ड भी जमीन पर लगा हुआ है। बाहर से देखने पर पता ही नहीं चलता कि यहां आंगनबाड़ी केंद्र है। केंद्र पर मिलीं सहायिका लक्ष्मी ने बताया कि 10 साल से केंद्र चल रहा है। यहां केवल पोषाहार बांटने तक ही गतिविधियां सीमित हैं।
उन्नाव गेट केंद्र भी कुपोषित
उन्नाव गेट बाहर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में भी व्यवस्थाएं खराब हैं। किराये के भवन में चलने वाले इस केंद्र पर करीब 111 बच्चों का पंजीकरण है। जबकि 26 गर्भवतियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। केंद्र पर स्थित कक्ष में इतनी व्यवस्था नहीं है कि पूरे बच्चे बैठ सकें। ऐसे में घर के बाहर स्थित आंगन में कार्यकर्ता बच्चों को खेल खिलाती हैं। यहां कार्यरत कार्यकर्ता हेमलता ने बताया कि केंद्र का किराया मिलता नहीं है। 2007 से केंद्र चल रहा है। प्री प्राइमरी शुरू कराने के लिए कहा गया है, लेकिन व्यवस्था मुहैया नहीं कराई गई हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी में तब्दील करने का काम बेसिक शिक्षा विभाग के पास है। इसकेे लिए कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग कराई गई है। महानगर में जिन केंद्रों की हालत खराब हैं, वहां पर व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा।
नरेंद्र सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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