{"_id":"6054e88f8ebc3e590c0a16ec","slug":"gurugram-aayurvedic-college-not-find-any-dead-body-jhansi-news-jhs191258190","type":"story","status":"publish","title_hn":"हेडिंग एक: गुरुग्राम से सात सालों से आयुर्वेदिक कॉलेज को नहीं मिला कोई शव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हेडिंग एक: गुरुग्राम से सात सालों से आयुर्वेदिक कॉलेज को नहीं मिला कोई शव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस की पढ़ाई के दौरान छात्रों को शरीर रचना की वास्तविक कम किताबी जानकारी ज्यादा मिल पा रही है। ऐसा कॉलेज को दान किए हुए शरीर नहीं मिल पाने के कारण हो रहा है। कॉलेज को गुरुग्राम की संस्था से शव मिल जाता था, जो अब पिछले सात वर्षों में नहीं मिला है। ऐसे में प्रिजर्व कर रखे हुए शरीर के अंगों से ही विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जा रही है।
बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में साढ़े चार साल का बीएएमएस कोर्स होता है। जबकि, एक साल की इंटर्नशिप कराई जाती है। मौजूदा समय में बीएएमएस प्रथम वर्ष में 50 छात्रों का बैच होता है। इन छात्रों को पहले ही साल की पढ़ाई में शव विच्छेदन कराकर बारीकियों के बारे में बताया जाता है। मगर आयुर्वेदिक कॉलेज में पिछले सात सालों में किसी का भी दान किया हुआ शरीर नहीं मिल पाया है। इस कारण प्रिजर्व किए हुए अंगों के आधार पर ही छात्रों को शरीर रचना से संबंधित जानकारियां दी जा रही हैं। बताया गया कि आयुर्वेदिक कॉलेज में गुरुग्राम की एक संस्था से विच्छेदन के लिए शरीर मिल जाता था, जो कि अब नहीं मिल पा रहा है। आयुर्वेदिक कॉलेज के अधिकारी लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि वह शरीर दान करने के लिए आगे आएं, ताकि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को अच्छा ज्ञान मिल सके।
हर साल पांच शवों की जरूरत
नियमानुसार 10 विद्यार्थियों के ग्रुप बनाकर शव विच्छेदन कराया जाता है। शव विच्छेदन करने की भी प्रक्रिया होती है। इस दौरान छात्रों को हर अंगों की बारीकियां सिखाई जाती हैं। चूंकि, आयुर्वेदिक कॉलेज में 50 छात्रों का बैच होता है, ऐसे में हर साल पांच शवों की जरूरत है।
विज्ञापन
कॉलेज को गुरुग्राम से दान किया हुआ शव प्राप्त हो जाता था, जो कि पिछले कई सालों से नहीं मिला है। लगातार इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी शरीर दान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज।
पिछले छह-सात सालों से कॉलेज को कोई शव नहीं मिल पाने के बावजूद विद्यार्थियों को प्रिजर्व कर रखे अंगों से हर संभव जानकारी दी जा रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए शरीर दान जरूर करें। - डॉ. अंकुर दीक्षित, प्रवक्ता, शरीर रचना विभाग।
विज्ञापन
बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में साढ़े चार साल का बीएएमएस कोर्स होता है। जबकि, एक साल की इंटर्नशिप कराई जाती है। मौजूदा समय में बीएएमएस प्रथम वर्ष में 50 छात्रों का बैच होता है। इन छात्रों को पहले ही साल की पढ़ाई में शव विच्छेदन कराकर बारीकियों के बारे में बताया जाता है। मगर आयुर्वेदिक कॉलेज में पिछले सात सालों में किसी का भी दान किया हुआ शरीर नहीं मिल पाया है। इस कारण प्रिजर्व किए हुए अंगों के आधार पर ही छात्रों को शरीर रचना से संबंधित जानकारियां दी जा रही हैं। बताया गया कि आयुर्वेदिक कॉलेज में गुरुग्राम की एक संस्था से विच्छेदन के लिए शरीर मिल जाता था, जो कि अब नहीं मिल पा रहा है। आयुर्वेदिक कॉलेज के अधिकारी लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि वह शरीर दान करने के लिए आगे आएं, ताकि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को अच्छा ज्ञान मिल सके।
विज्ञापन
हर साल पांच शवों की जरूरत
नियमानुसार 10 विद्यार्थियों के ग्रुप बनाकर शव विच्छेदन कराया जाता है। शव विच्छेदन करने की भी प्रक्रिया होती है। इस दौरान छात्रों को हर अंगों की बारीकियां सिखाई जाती हैं। चूंकि, आयुर्वेदिक कॉलेज में 50 छात्रों का बैच होता है, ऐसे में हर साल पांच शवों की जरूरत है।
विज्ञापन
कॉलेज को गुरुग्राम से दान किया हुआ शव प्राप्त हो जाता था, जो कि पिछले कई सालों से नहीं मिला है। लगातार इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। साथ ही लोगों को भी शरीर दान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - डॉ. केदारनाथ यादव, प्राचार्य, बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज।
पिछले छह-सात सालों से कॉलेज को कोई शव नहीं मिल पाने के बावजूद विद्यार्थियों को प्रिजर्व कर रखे अंगों से हर संभव जानकारी दी जा रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए शरीर दान जरूर करें। - डॉ. अंकुर दीक्षित, प्रवक्ता, शरीर रचना विभाग।