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कोरोना थमा तो अब फंगल इंफेक्शन बढ़ा, हर रोज 500 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में
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कोरोना थमा तो अब फंगल इंफेक्शन बढ़ा, हर रोज 500 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में
झांसी। कोरोना वायरस थमने के बाद अब फंगल इंफेक्शन लोगों को अपना शिकार बना रहा है। उमस भरी गर्मी में शरीर पर पसीना जम जाने की वजह से यह दिक्कत हो जाती है। वहीं, रसोई में गर्मी में घंटों काम करने के कारण कई महिलाओं को भी यह बीमारी हो रही है। सरकारी और प्राइवेट नर्सिंगहोमों, क्लीनिकों की ओपीडी मिलाकर रोजाना 500 मरीज इस बीमारी का इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
फंगल इंफेक्शन एक प्रकार की लाल गाल चकत्ते के साथ होने वाली खुजली है, जिसे आम भाषा में दाद कहते हैं। दरअसल, गर्मी और उमस में शरीर के कई हिस्सों में पसीना जमा होने लगता है। उन हिस्सों में सीलन के कारण बैक्टीरिया (एसपरिगिलोसिस) पैदा हो जाते हैं, जो फंगल इंफेक्शन का कारण बनते हैं। इससे शरीर में खुजली शुरू हो जाती है। यहां लाल चकत्ते और दाने निकलने लगते हैं। सामान्य तौर पर यह जानलेवा नहीं होते हैं लेकिन समय से उपचार नहीं होने पर यह तेजी से फैलते हैं। प्रभावित जगह की त्वचा को नष्ट कर देते हैं, जिससे चोट लगने पर यहां घाव हो जाता है। यह घाव बाद में नासूर बन जाते हैं, जो ठीक नहीं होने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। फंगल इंफेक्शन के और भी कई कारण होते हैं। व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर भी इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। मधुमेह पीड़ितों में इस इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ लोगों को धूप और पसीने से बचाव करने और सूती कपड़े पहनने की सलाह दे रहे हैं।
ब्लैक फंगस समझकर डर जाते
इन दिनों कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के भी कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में फंगल इंफेक्शन होने पर कई लोग इसे ब्लैक फंगस समझकर डर जाते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचने पर वह सीधे पूछने लगते हैं कि उन्हें ब्लैक फंगस तो नहीं हो गया।
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कहां-कहां होता फंगल इंफेक्शन
- सिर
- हथेली
- पेट
- चेहरे
- नाखून
- उंगलियां
- गर्दन
ये ध्यान दें
- रोज नहाएं और नमी को पूरी तरह पोंछे
- कभी भी गीले कपड़े न पहनें
- साबुन, तौलिया, कपड़ों को साझा न करें
- सूती और ढीले कपड़े पहनें
- धुले कपड़ों को सूरज की रोशनी में सुखाएं
ओपीडी में 70 प्रतिशत मरीज तो फंगल इंफेक्शन के आ रहे हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में पसीने का जमाव होने से लोग फंगल इंफेक्शन का शिकार हो रहे हैं। लोग शुरूआत में बिना चिकित्सक को दिखाए मेडिकल स्टोर से ट्यूब लेकर लगाते रहते हैं। इससे मर्ज काफी बढ़ जाता है। ये इंफेक्शन नायलॉन, गीले, टाइट व सिंथेटिक के कपड़े पहनने की वजह से भी फैल रहा है। - डॉ. प्रतीक शिवहरे, त्वचा रोग विशेषज्ञ।
कई मरीज खुद से इलाज करने लगते हैं तो अंदर-अंदर फंगल इंफेक्शन बढ़ता जाता है। बाद में जब विशेषज्ञ के पास आते हैं, तब तक दवाओं के खिलाफ शरीर में रेजिटेंस पैदा हो जाता है। फिर दवाएं असर नहीं करती हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए फंगस मर तो जाता है मगर बाद में शरीर गीला होने पर इंफेक्शन दोबारा हो जाता है। इसलिए विशेषज्ञ की सलाह पर दवाएं लें। - डॉ. नीरज श्रीवास्तव, त्वचा रोग विशेषज्ञ।
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झांसी। कोरोना वायरस थमने के बाद अब फंगल इंफेक्शन लोगों को अपना शिकार बना रहा है। उमस भरी गर्मी में शरीर पर पसीना जम जाने की वजह से यह दिक्कत हो जाती है। वहीं, रसोई में गर्मी में घंटों काम करने के कारण कई महिलाओं को भी यह बीमारी हो रही है। सरकारी और प्राइवेट नर्सिंगहोमों, क्लीनिकों की ओपीडी मिलाकर रोजाना 500 मरीज इस बीमारी का इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
फंगल इंफेक्शन एक प्रकार की लाल गाल चकत्ते के साथ होने वाली खुजली है, जिसे आम भाषा में दाद कहते हैं। दरअसल, गर्मी और उमस में शरीर के कई हिस्सों में पसीना जमा होने लगता है। उन हिस्सों में सीलन के कारण बैक्टीरिया (एसपरिगिलोसिस) पैदा हो जाते हैं, जो फंगल इंफेक्शन का कारण बनते हैं। इससे शरीर में खुजली शुरू हो जाती है। यहां लाल चकत्ते और दाने निकलने लगते हैं। सामान्य तौर पर यह जानलेवा नहीं होते हैं लेकिन समय से उपचार नहीं होने पर यह तेजी से फैलते हैं। प्रभावित जगह की त्वचा को नष्ट कर देते हैं, जिससे चोट लगने पर यहां घाव हो जाता है। यह घाव बाद में नासूर बन जाते हैं, जो ठीक नहीं होने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। फंगल इंफेक्शन के और भी कई कारण होते हैं। व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर भी इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। मधुमेह पीड़ितों में इस इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ लोगों को धूप और पसीने से बचाव करने और सूती कपड़े पहनने की सलाह दे रहे हैं।
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ब्लैक फंगस समझकर डर जाते
इन दिनों कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के भी कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में फंगल इंफेक्शन होने पर कई लोग इसे ब्लैक फंगस समझकर डर जाते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचने पर वह सीधे पूछने लगते हैं कि उन्हें ब्लैक फंगस तो नहीं हो गया।
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कहां-कहां होता फंगल इंफेक्शन
- सिर
- हथेली
- पेट
- चेहरे
- नाखून
- उंगलियां
- गर्दन
ये ध्यान दें
- रोज नहाएं और नमी को पूरी तरह पोंछे
- कभी भी गीले कपड़े न पहनें
- साबुन, तौलिया, कपड़ों को साझा न करें
- सूती और ढीले कपड़े पहनें
- धुले कपड़ों को सूरज की रोशनी में सुखाएं
ओपीडी में 70 प्रतिशत मरीज तो फंगल इंफेक्शन के आ रहे हैं। शरीर के विभिन्न हिस्सों में पसीने का जमाव होने से लोग फंगल इंफेक्शन का शिकार हो रहे हैं। लोग शुरूआत में बिना चिकित्सक को दिखाए मेडिकल स्टोर से ट्यूब लेकर लगाते रहते हैं। इससे मर्ज काफी बढ़ जाता है। ये इंफेक्शन नायलॉन, गीले, टाइट व सिंथेटिक के कपड़े पहनने की वजह से भी फैल रहा है। - डॉ. प्रतीक शिवहरे, त्वचा रोग विशेषज्ञ।
कई मरीज खुद से इलाज करने लगते हैं तो अंदर-अंदर फंगल इंफेक्शन बढ़ता जाता है। बाद में जब विशेषज्ञ के पास आते हैं, तब तक दवाओं के खिलाफ शरीर में रेजिटेंस पैदा हो जाता है। फिर दवाएं असर नहीं करती हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए फंगस मर तो जाता है मगर बाद में शरीर गीला होने पर इंफेक्शन दोबारा हो जाता है। इसलिए विशेषज्ञ की सलाह पर दवाएं लें। - डॉ. नीरज श्रीवास्तव, त्वचा रोग विशेषज्ञ।