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गार्ड परीक्षा प्रकरण: साक्ष्य हैं फिर भी जांच की जगह दबाने का प्रयास में लगा रेल प्रशासन
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झांसी। रेलवे गार्ड परीक्षा में तीन से पांच लाख रुपये लेकर पेपर उपलब्ध कराने के मामले में तमाम साक्ष्य सामने आने के बाद भी प्रशासन शांत है। इस मामले को लगातार दबाने का प्रयास चल रहा है। जबकि कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि ऑडियो वायरल में जिन कर्मियों से बातचीत हो रही है, उनसे अभी तक पूछताछ क्यों नहीं की गई। इस प्रकरण में बिचौलिए तक पहुंचाने वाले एक कर्मचारी की भी पिछले दिनों मौत हो गई। इससे मामला और रहस्यमय हो गया है। जो कर्मचारी रुपये देने के बाद भी उत्तीर्ण नहीं हुआ, उस पर लोगों को भेजकर दबाव बनाया जा रहा है।
मंडल प्रशासन ने गार्डों के 84 पद भरने के लिए 23 फरवरी 2020 को विभागीय परीक्षा का आयोजन किया था। परीक्षा में 110 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे, जिसमें 100 प्रश्नों के उत्तर देने थे। इस परीक्षा का परिणाम 30 जुलाई को घोषित किया गया था। मगर, 10 अगस्त इस परीक्षा को लेकर 18 से अधिक ऑडियो वायरल हुए, जिसमें वाणिज्य और इंजीनियरिंग विभाग के दो कर्मियों के बीच की बातचीत की 18 से अधिक बार की रिकार्डिंग है। इंजीनियरिंग विभाग का कर्मचारी
(प्वाइंट्समैन) दूसरे से कह रहा है कि उसने उसके माध्यम से अधिकारी को तीन लाख रुपये परीक्षा में उत्तीर्ण कराने के दिए थे, लेकिन इसके बाद भी वह फेल हो गया। जबकि अन्य सभी कर्मी जिन्होंने रुपये दिए थे। वे परीक्षा में सफल हो गए। इस पर वाणिज्य कर्मी का कहना था कि आपको प्रश्न पत्र उत्तर सहित उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बाद भी आप उत्तीर्ण नहीं हो सके तो इसमें मेरी और अधिकारी की क्या गलती है। मैं और दूसरे कर्मी (ऑडियो में उनके भी नाम लिए गए) कैसे सफल हो गए? इस पर दूसरे कर्मी ने कहा कि अगर उसके रुपये वापस नहीं मिले तो वह थाने में रिपोर्ट दर्ज करा देगा। एक वीडियो में प्वाइंट्समैन एक दूसरे कर्मी से बात कर रहा है कि उसके माध्यम से ही वह वाणिज्य कर्मी के पास पहुंचा था। वह रुपये दिलाने में मदद करे। हालांकि, इस रेलकर्मी की कुछ दिन पहले मौत हो गई।
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इस मामले में डीआरएम संदीप माथुर का कहना था कि परीक्षा को निरस्त कराने के उद्देश्य से ऑडियो को बनाया गया है। अगर कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच करवाई जाएगी। अमर उजाला ने इस मामले को अपने 13 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं, रेलवे के दूसरे कर्मचारियों को उम्मीद थी कि ऑडियो में जिन कर्मियों के बीच बातचीत हो रही है, उनको सभी पहचानते हैं। निश्चित ही रेल प्रशासन जल्द ही उन कर्मचारियों को बुलाकर पूछताछ करेगा और हकीकत सामने आ जाएगी। उन अधिकारियों का भी पता लग जाता जो इस कारनामे में शामिल हैं। मगर फजीहत से बचने के लिए रेल प्रशासन ने अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है। उधर, प्वांइट्समैन कर्मी का कहना है कि उसके पास चार लोग आए थे, जो बदतमीजी कर उससे मामले को दबाने के कह रहे थे। उन्होंने मोबाइल स्विच ऑफ रखने और एक हफ्ते में रुपये लौटाने का आश्वासन दिया।
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मंडल प्रशासन ने गार्डों के 84 पद भरने के लिए 23 फरवरी 2020 को विभागीय परीक्षा का आयोजन किया था। परीक्षा में 110 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे, जिसमें 100 प्रश्नों के उत्तर देने थे। इस परीक्षा का परिणाम 30 जुलाई को घोषित किया गया था। मगर, 10 अगस्त इस परीक्षा को लेकर 18 से अधिक ऑडियो वायरल हुए, जिसमें वाणिज्य और इंजीनियरिंग विभाग के दो कर्मियों के बीच की बातचीत की 18 से अधिक बार की रिकार्डिंग है। इंजीनियरिंग विभाग का कर्मचारी
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(प्वाइंट्समैन) दूसरे से कह रहा है कि उसने उसके माध्यम से अधिकारी को तीन लाख रुपये परीक्षा में उत्तीर्ण कराने के दिए थे, लेकिन इसके बाद भी वह फेल हो गया। जबकि अन्य सभी कर्मी जिन्होंने रुपये दिए थे। वे परीक्षा में सफल हो गए। इस पर वाणिज्य कर्मी का कहना था कि आपको प्रश्न पत्र उत्तर सहित उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बाद भी आप उत्तीर्ण नहीं हो सके तो इसमें मेरी और अधिकारी की क्या गलती है। मैं और दूसरे कर्मी (ऑडियो में उनके भी नाम लिए गए) कैसे सफल हो गए? इस पर दूसरे कर्मी ने कहा कि अगर उसके रुपये वापस नहीं मिले तो वह थाने में रिपोर्ट दर्ज करा देगा। एक वीडियो में प्वाइंट्समैन एक दूसरे कर्मी से बात कर रहा है कि उसके माध्यम से ही वह वाणिज्य कर्मी के पास पहुंचा था। वह रुपये दिलाने में मदद करे। हालांकि, इस रेलकर्मी की कुछ दिन पहले मौत हो गई।
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इस मामले में डीआरएम संदीप माथुर का कहना था कि परीक्षा को निरस्त कराने के उद्देश्य से ऑडियो को बनाया गया है। अगर कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच करवाई जाएगी। अमर उजाला ने इस मामले को अपने 13 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं, रेलवे के दूसरे कर्मचारियों को उम्मीद थी कि ऑडियो में जिन कर्मियों के बीच बातचीत हो रही है, उनको सभी पहचानते हैं। निश्चित ही रेल प्रशासन जल्द ही उन कर्मचारियों को बुलाकर पूछताछ करेगा और हकीकत सामने आ जाएगी। उन अधिकारियों का भी पता लग जाता जो इस कारनामे में शामिल हैं। मगर फजीहत से बचने के लिए रेल प्रशासन ने अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है। उधर, प्वांइट्समैन कर्मी का कहना है कि उसके पास चार लोग आए थे, जो बदतमीजी कर उससे मामले को दबाने के कह रहे थे। उन्होंने मोबाइल स्विच ऑफ रखने और एक हफ्ते में रुपये लौटाने का आश्वासन दिया।