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पंचायतों ने फर्मों से जीएसटी वसूल किए बगैर कर दिया 100 करोड़ का भुगतान
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झांसी। जनपद की ग्राम पंचायतों व ब्लाकों से पिछले एक साल में जीएसटी वसूल किए बगैर ही काम करने वाली फर्मों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। वाणिज्य कर विभाग द्वारा इसका आकलन किया जा रहा है। इसके बाद सभी से वसूली की जाएगी।
जनपद में 496 ग्राम पंचायतें हैं, परंतु इनमें से अधिकांश का जीएसटी में पंजीकरण नहीं है। कमोबेश यही स्थिति आठों ब्लॉकों की भी है। जबकि, सरकार ने साल 2018 में अनिवार्य रुप से जीएसटी पंजीकरण कराने का नियम लागू किया था। बावजूद, ध्यान नहीं दिया गया। अब वाणिज्य कर विभाग द्वारा इसकी जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल पिछले एक साल का ब्योरा खंगाला गया है, जिसमें सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान ग्राम पंचायतों व ब्लॉकों की ओर से विभिन्न कार्यों के लिए फर्मों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। नियमानुसार इस भुगतान पर छह से 28 प्रतिशत तक की जीएसटी वसूली जानी थी। लेकिन, अब तक की जांच में जीएसटी वसूली का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इस मनमानी से सरकार को राजस्व की कितनी क्षति हुई, इसके लिए भुगतान का बिंदुवार ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद वसूली की जाएगी। साथ ही अभियान चलाकर सभी ग्राम पंचायतों का जीएसटी पंजीकरण भी कराया जाएगा।
जांच में पिछले एक साल में लगभग 100 करोड़ रुपये का भुगतान होना सामने आया है। इस भुगतान पर सरकार को मिलने वाले राजस्व का आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद वसूली होगी। इसके अलावा अभियान चलाकर ग्राम पंचायतों का जीएसटी पंजीकरण कराया जाएगा।
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- अरुण कुमार सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर - विशेष अनुसंधान शाखा
ये भी जानिए...
- पंचायतों में जीएसटी कटौती के साथ टीडीएस कटौती का भी नियम है। ठेकेदारों से सीधे काम कराने पर ये नियम लागू होता है। लेकिन, ज्यादातर पंचायतों ने ये कटौती नहीं की।
- कटौती की रकम राजस्व खाते में जमा की जाती है। कटौती न करना वित्तीय अनियमितता में आता है।
- जुर्माने के साथ जमा करनी होगी रकम। जीएसटी के साथ टीडीएस की भी होगी वसूली।
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जनपद में 496 ग्राम पंचायतें हैं, परंतु इनमें से अधिकांश का जीएसटी में पंजीकरण नहीं है। कमोबेश यही स्थिति आठों ब्लॉकों की भी है। जबकि, सरकार ने साल 2018 में अनिवार्य रुप से जीएसटी पंजीकरण कराने का नियम लागू किया था। बावजूद, ध्यान नहीं दिया गया। अब वाणिज्य कर विभाग द्वारा इसकी जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल पिछले एक साल का ब्योरा खंगाला गया है, जिसमें सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान ग्राम पंचायतों व ब्लॉकों की ओर से विभिन्न कार्यों के लिए फर्मों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। नियमानुसार इस भुगतान पर छह से 28 प्रतिशत तक की जीएसटी वसूली जानी थी। लेकिन, अब तक की जांच में जीएसटी वसूली का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इस मनमानी से सरकार को राजस्व की कितनी क्षति हुई, इसके लिए भुगतान का बिंदुवार ब्योरा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद वसूली की जाएगी। साथ ही अभियान चलाकर सभी ग्राम पंचायतों का जीएसटी पंजीकरण भी कराया जाएगा।
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जांच में पिछले एक साल में लगभग 100 करोड़ रुपये का भुगतान होना सामने आया है। इस भुगतान पर सरकार को मिलने वाले राजस्व का आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद वसूली होगी। इसके अलावा अभियान चलाकर ग्राम पंचायतों का जीएसटी पंजीकरण कराया जाएगा।
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- अरुण कुमार सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर - विशेष अनुसंधान शाखा
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- पंचायतों में जीएसटी कटौती के साथ टीडीएस कटौती का भी नियम है। ठेकेदारों से सीधे काम कराने पर ये नियम लागू होता है। लेकिन, ज्यादातर पंचायतों ने ये कटौती नहीं की।
- कटौती की रकम राजस्व खाते में जमा की जाती है। कटौती न करना वित्तीय अनियमितता में आता है।
- जुर्माने के साथ जमा करनी होगी रकम। जीएसटी के साथ टीडीएस की भी होगी वसूली।