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Jhansi News: वैवाहिक जश्न पर जीएसटी की नजर, सात लाख खर्च पर एक लाख तक का टैक्स

Thu, 23 Jan 2025 01:46 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2025 01:46 AM IST
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GST eyes wedding celebrations, tax up to Rs 1 lakh on expenditure of Rs 7 lakh

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। इस शादी सीजन में महानगर में लगभग चार हजार से ज्यादा घरों में शहनाई गूंजेंगी। ऐसे में वर और वधू पक्ष की ओर से खूब खरीदारी की जाएगी। इसमें खर्च होगा तो सरकार को टैक्स भी अदा करना पड़ेगा। एक शादी में कम से कम पांच से सात लाख रुपये तक खर्च होते हैं। ऐसे में सात लाख रुपये पर करीब एक लाख रुपये जीएसटी देनी पड़ेगी।

शादी समारोह के प्रमुख खर्चों में कपड़े-फुटवियर, ज्वेलरी, मैरिज हाॅल, टेंट-पंडाल, सजावट-लाइट्स, वीडियोग्राफी, बैंड-बाजा, ब्यूटी पार्लर, कैटरिंग, शादी कार्ड आदि शामिल रहते हैं। ऐसे में जहां से इन सर्विस को लेंगे, उनसे पक्के बिल के साथ जीएसटी भी अदा करना पड़ेगा। हालांकि, ज्यादातर लोग पक्के बिल लेते नहीं है। इस वजह से वह जीएसटी चुकाने से बच जाते हैं।
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ऐसे समझें जीएसटी की हिस्सेदारी



अगर एक शादी में मैरिज गार्डन और कैटरिंग सर्विसेज पर अलग-अलग 1.50 लाख रुपये खर्च आता है तो प्रत्येक पर जीएसटी की हिस्सेदारी 27000 रुपये हुई। 50000 रुपये के टेंट के खर्च पर जीएसटी की हिस्सेदारी 9000 रुपये हुई। इसी तरह, अगर 1.50 से 2 लाख रुपये की गोल्ड ज्वेलरी खरीदते हैं तो उसमें जीएसटी की हिस्सेदारी 3000 से 4000 रुपये रहेगी। दो लाख के अन्य खर्च पर 5 से 28 प्रतिशत तक जीएसटी अदा करनी पड़ती है।
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कुछ प्रमुख सर्विसेज और खरीदारी पर जीएसटी



कपड़े और फुटवियर - 5 से 12 फीसदी



गोल्ड ज्वेलरी - 3 फीसदी



मैरिज गार्डन - 18 फीसदी



टेंट - 18 फीसदी



लाइट - 18 फीसदी



सजावट - 18 फीसदी



बैंड बाजा - 18 फीसदी



फोटो-वीडियो - 18 फीसदी



ब्यूटी पार्लर - 18 फीसदी



कैटरिंग - 5 से 18 फीसदी

बस-टैक्सी सर्विस - 5 फीसदी

बातचीत

विवाह घर समेत अन्य सर्विस जो भी दी जाती हैं, उसमें पक्के बिल पर ग्राहक से 18 प्रतिशत जीएसटी ली जाती है। - विवेक दत्त स्वामी, केंद्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड विवाह स्थल एसोसिएशन



शादी-विवाह समेत अन्य कार्यक्रम में फोटो और वीडियोग्राफी के लिए जो भी बुकिंग करता है, उन उपभोक्ताओं को टैक्स भी अदा करना पड़ता है। - कमलेश कुशवाहा, फोटोग्राफर


वर्जन



बाजार से आप जो सामान एवं सर्विस लेते हैं, उनका पक्का बिल जरूर लें ताकि विभाग को भी राजस्व की प्राप्ति हो सके। पक्का बिल लेने से आपको कई फायदे भी हैं। - पुनीत अग्निहोत्री, डिप्टी कमिश्नर, जीएसटी
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