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इंजीनियरिंग छात्रों का ग्रुप भूखों को खिला रहा खाना, निर्धनों को पढ़ा रहा
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झांसी। भूखों को खाना खिलाने और निर्धन बच्चों को पढ़ाने के लिए बीआईईटी से इंजीनियरिंग करने वाले छात्रों ने एक ग्रुप बनाया है। शिक्षण संस्थानों की मेस में बचने वाले खाने को ग्रुप के सदस्य इकट्ठा करते हैं। खुद के पैसे जोड़कर खरीदी गई वैन से रोज इसे बांटते हैं। इसके अलावा नवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को रोजाना पढ़ाते भी हैं।
बीआईईटी से पासआउट बृजेश यादव इस ग्रुप के प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि वह अक्सर सड़क किनारे झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोगों को खाने के लिए तरसते देखते थे तो बहुत दुख होता था। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को अच्छी शिक्षा और मार्गदर्शन मिल सके, इसलिए उन्हें पढ़ाने की इच्छा होती थी। उन्होंने अपनी यह भावना इंजीनियरिंग कर रहे कुछ साथियों को बताई। सात-आठ दोस्त जनसेवा के इस काम के लिए आगे आए। बृजेश ने बताया कि बीआईईटी की ही मेस में रोजाना खाना बच जाता था। ऐसे में शुरू में इसे ही गरीबों को वितरित करना शुरू किया।
इसके बाद कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों की भी मेस से खाना एकत्र करने लगे। बृजेश बताते हैं कि रोजाना खाना बांटने के दौरान ऑटो करना पड़ता था। ऐसे में किराया का काफी पैसा खर्च होता था। बाद में सभी छात्रों ने स्कॉलरशिप का पैसा इकट्ठा करके एक पुरानी वैन खरीद ली। अब रोजाना सखी के हनुमान मंदिर के पास झोपड़ पट्टी, मेडिकल कॉलेज के आसपास फुटपाथ पर रहने वालों और बस स्टैंड के पीछे जाकर जरूरतमंदों को भोजन वितरित करते हैं।
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दो महीने पहले शुरू की लाइब्रेरी में पढ़ रहे 150 छात्र
झांसी। बृजेश ने बताया कि दो महीने पहले ग्रुप के सभी सदस्यों ने मिलकर बड़ागांव में बस स्टैंड के पास लाइब्रेरी शुरू की है। ग्रुप के सदस्यों ने अपनी किताबें यहां रखी हैं। कुछ खरीदी भी हैं। यहां पर कोर्स की पढ़ाई के अलावा छात्रों को इंजीनियरिंग की भी तैयारी कराई जा रही है। प्रवीर कुमार, विवेक पांडेय, अंकुश सिंह, शुभम सिंह, अमन यादव मिलकर छात्रों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं। कक्षा नौ से 12वीं तक के 150 छात्र पढ़ने आते हैं। बताया कि समय-समय पर बड़े-बड़े पदों पर नियुक्त सीनियर्स वर्चुअल छात्रों को अहम टिप्स देते हैं।
सीनियर ने दुबई से भेजे चार क्विंटल कपड़े बांटे
झांसी। बृजेश ने कहा कि उनके सीनियर शिवमोहन दुबई मेट्रो में कार्यरत हैं। उन्होंने वहां से कुछ महीने पहले चार क्विंटल कपड़ा भेजा था, जिसे ग्रुप के सभी सदस्यों ने मिलकर जरूरतमंदों को बांटा।
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बीआईईटी से पासआउट बृजेश यादव इस ग्रुप के प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि वह अक्सर सड़क किनारे झोपड़ पट्टी में रहने वाले लोगों को खाने के लिए तरसते देखते थे तो बहुत दुख होता था। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को अच्छी शिक्षा और मार्गदर्शन मिल सके, इसलिए उन्हें पढ़ाने की इच्छा होती थी। उन्होंने अपनी यह भावना इंजीनियरिंग कर रहे कुछ साथियों को बताई। सात-आठ दोस्त जनसेवा के इस काम के लिए आगे आए। बृजेश ने बताया कि बीआईईटी की ही मेस में रोजाना खाना बच जाता था। ऐसे में शुरू में इसे ही गरीबों को वितरित करना शुरू किया।
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इसके बाद कुछ अन्य शिक्षण संस्थानों की भी मेस से खाना एकत्र करने लगे। बृजेश बताते हैं कि रोजाना खाना बांटने के दौरान ऑटो करना पड़ता था। ऐसे में किराया का काफी पैसा खर्च होता था। बाद में सभी छात्रों ने स्कॉलरशिप का पैसा इकट्ठा करके एक पुरानी वैन खरीद ली। अब रोजाना सखी के हनुमान मंदिर के पास झोपड़ पट्टी, मेडिकल कॉलेज के आसपास फुटपाथ पर रहने वालों और बस स्टैंड के पीछे जाकर जरूरतमंदों को भोजन वितरित करते हैं।
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दो महीने पहले शुरू की लाइब्रेरी में पढ़ रहे 150 छात्र
झांसी। बृजेश ने बताया कि दो महीने पहले ग्रुप के सभी सदस्यों ने मिलकर बड़ागांव में बस स्टैंड के पास लाइब्रेरी शुरू की है। ग्रुप के सदस्यों ने अपनी किताबें यहां रखी हैं। कुछ खरीदी भी हैं। यहां पर कोर्स की पढ़ाई के अलावा छात्रों को इंजीनियरिंग की भी तैयारी कराई जा रही है। प्रवीर कुमार, विवेक पांडेय, अंकुश सिंह, शुभम सिंह, अमन यादव मिलकर छात्रों को नि:शुल्क पढ़ाते हैं। कक्षा नौ से 12वीं तक के 150 छात्र पढ़ने आते हैं। बताया कि समय-समय पर बड़े-बड़े पदों पर नियुक्त सीनियर्स वर्चुअल छात्रों को अहम टिप्स देते हैं।
सीनियर ने दुबई से भेजे चार क्विंटल कपड़े बांटे
झांसी। बृजेश ने कहा कि उनके सीनियर शिवमोहन दुबई मेट्रो में कार्यरत हैं। उन्होंने वहां से कुछ महीने पहले चार क्विंटल कपड़ा भेजा था, जिसे ग्रुप के सभी सदस्यों ने मिलकर जरूरतमंदों को बांटा।