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ग्रासलैंड ने गोद लिए जिले के 37 गांव
झांसी/ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2016 01:12 AM IST
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झांसी। किसानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़ने व उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) ने जिले के 37 गांव गोद लिए हैं। संस्थान द्वारा चयनित ग्रामों में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
प्राकृतिक आपदा के शिकार जिले के गांवों की तस्वीर भयावह है। खेत सूखे पड़े हैं और खलिहान खाली। अन्नदाता दाने-दाने को मोहताज हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए केंद्र सरकार की ‘मेरा गांव - मेरा गौरव’ योजना के तहत आईजीएफआरआई ने जिले के 37 गांवों को गोद लिया है। इन ग्रामों में संस्थान की गतिविधियां जारी हैं। मृदा का परीक्षण कर स्वास्थ्य कार्ड जारी कर दिए गए हैं।
किसानों को चारा वाली फसलों के बीच मक्का, एमपी चरी, बाजरा, जई, बरसीम आदि का वितरण किया गया है। पशु स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से दवाओं का वितरण किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी को संतुलित आहार व हरे चारे के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा गोष्ठियां आयोजित कर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि के उन्नत तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
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जिले के यह गांव लिए गोद
आईजीएफआरआई ने जिले के 37 ग्रामों को गोद लिया है। इनमें भोजला, रुंदकरारी, प्रीतमपुरा, हस्तिनापुर, पाड़री, केशवपुर, मथनपुरा, रामपुरा, बेहटा, बरल, लिधोरा, मोड़खुर्द, बरथा, गणेशपुरा, पुनावली कला, ढिकौली, डोमागोर, सारमऊ, कोठड़ा, रमैयापुरा, बझेरा, महेबा, गुलारा, तोर बरेठा, अंबावाय, केल्थरा, करारी खुर्द, चमरौआ, कोटी, किल्चवारा, खजराहा खुर्द, खजराहा बुजुर्ग, गंधारी, डेरा गंधारी, लाम्चा, चिटगांव व रावतपुरा शामिल हैं।
एमपी के 28 व कर्नाटक के 10 गांव भी लिए गोद
झांसी जनपद के 31 ग्रामों के अलावा आईजीएफआरआई द्वारा मध्य प्रदेश के 28 व कर्नाटक के 10 गांव भी गोद लिए गए हैं। मध्य प्रदेश में दतिया जिले के 23 व टीकमगढ़ के पांच गांव गोद लिए गए हैं। जबकि, कर्नाटक के धारवाड़ जिले के 10 गांव गोद लिए हैं।
चयनित ग्रामों के किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। ताकि, प्रकृति की विषम परिस्थितियों के बाद उनकी कृषि व्यवस्था प्रभावित न हो। चयनित ग्रामों में संस्थान की गतिविधियां जारी हैं।
- पी के घोष, निदेशक - आईजीएफआरआई
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प्राकृतिक आपदा के शिकार जिले के गांवों की तस्वीर भयावह है। खेत सूखे पड़े हैं और खलिहान खाली। अन्नदाता दाने-दाने को मोहताज हैं। इस स्थिति में सुधार के लिए केंद्र सरकार की ‘मेरा गांव - मेरा गौरव’ योजना के तहत आईजीएफआरआई ने जिले के 37 गांवों को गोद लिया है। इन ग्रामों में संस्थान की गतिविधियां जारी हैं। मृदा का परीक्षण कर स्वास्थ्य कार्ड जारी कर दिए गए हैं।
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किसानों को चारा वाली फसलों के बीच मक्का, एमपी चरी, बाजरा, जई, बरसीम आदि का वितरण किया गया है। पशु स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से दवाओं का वितरण किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी को संतुलित आहार व हरे चारे के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा गोष्ठियां आयोजित कर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि के उन्नत तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
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जिले के यह गांव लिए गोद
आईजीएफआरआई ने जिले के 37 ग्रामों को गोद लिया है। इनमें भोजला, रुंदकरारी, प्रीतमपुरा, हस्तिनापुर, पाड़री, केशवपुर, मथनपुरा, रामपुरा, बेहटा, बरल, लिधोरा, मोड़खुर्द, बरथा, गणेशपुरा, पुनावली कला, ढिकौली, डोमागोर, सारमऊ, कोठड़ा, रमैयापुरा, बझेरा, महेबा, गुलारा, तोर बरेठा, अंबावाय, केल्थरा, करारी खुर्द, चमरौआ, कोटी, किल्चवारा, खजराहा खुर्द, खजराहा बुजुर्ग, गंधारी, डेरा गंधारी, लाम्चा, चिटगांव व रावतपुरा शामिल हैं।
एमपी के 28 व कर्नाटक के 10 गांव भी लिए गोद
झांसी जनपद के 31 ग्रामों के अलावा आईजीएफआरआई द्वारा मध्य प्रदेश के 28 व कर्नाटक के 10 गांव भी गोद लिए गए हैं। मध्य प्रदेश में दतिया जिले के 23 व टीकमगढ़ के पांच गांव गोद लिए गए हैं। जबकि, कर्नाटक के धारवाड़ जिले के 10 गांव गोद लिए हैं।
चयनित ग्रामों के किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। ताकि, प्रकृति की विषम परिस्थितियों के बाद उनकी कृषि व्यवस्था प्रभावित न हो। चयनित ग्रामों में संस्थान की गतिविधियां जारी हैं।
- पी के घोष, निदेशक - आईजीएफआरआई