{"_id":"677045df6dcf17ec800e2471","slug":"gram-pea-and-wheat-crops-got-respite-from-rain-jhansi-news-c-131-1-ltp1001-126616-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: बारिश से चना, मटर और गेहूं की फसलों को मिली संजीवनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: बारिश से चना, मटर और गेहूं की फसलों को मिली संजीवनी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मौसम का मिजाज तेजी से बदला। रात में झमाझम बारिश हुई तो दिन में हल्की धूप रही। और शाम चार बजते ही बादल व कोहरा छा जाने से फिर सर्दी बढ़ गई। शुक्रवार रात में सर्वाधिक बारिश मड़ावरा तहसील क्षेत्र में हुई तो सबसे कम सदर क्षेत्र में दर्ज की गई। बारिश से किसानों को रबी फसलों की सिंचाई से राहत मिल गई है।
तीन दिनों से मौसम में उतार चढ़ाव चल रहा है। शुक्रवार दिन में धूप निकलने से जहां गर्मी का अहसास हुआ तो रात में झमाझम बारिश होने से ठंडक हो गई। उधर, मड़ावरा तहसील के धौरीसागर गांव के मजरा सकरा में रात तीन बजे रूप नारायन यादव के घर पर गाज गिर गई। इसकी चपेट में आने से भैंसा व गर्भवती गाय मर गई। उसकी 40 वर्षीय पत्नी रानी मामूली रूप से झुलस गई।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे से शनिवार सुबह आठ बजे तक औसतन 14 मिमी बारिश हुई। दिन में भी पाली सहित कई क्षेत्रों में रिमझिम बारिश होती रही। यह बारिश चना, गेहूं व सरसों के लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
किसानों को रहता है ‘मावठ’ का इंतजार : सर्दी में बारिश को बुंदेलखंडी भाषा में मावठ कहा जाता है। किसानों को इसका विशेष इंतजार रहता है, क्योंकि इस बारिश से फसलों को फायदा होता है। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए खर्च नहीं करना पड़ता। किसान जब नहर या अन्य संसाधन से पानी देता है तो उसे ठंड में खेत पर जाना पड़ता है, उससे भी मावठ का पानी बचाता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
गेहूं में अब एक पानी की बचत : गेहूं की फसल में तीन पानी देने होते हैं, जिसमें एक पानी तो किसान पहले दे चुका है, लेकिन अब दूसरा पानी नहीं देना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि एक एकड़ में करीब 10 लीटर डीजल इंजन में लग जाता है, जो कि एक हजार रुपये का होता है। इस पानी से करीब 20 दिन तक पानी नहीं देना होगा।
00000000000000
बारिश से अब फसलों को पानी नहीं देना होगा। यह आसमान से पानी रूपी अमृत बरसा है। विगत दो दिनों से तापमान में बढ़ोतरी से चिंता बढ़ रही थी, लेकिन प्रकृति ने बारिश का वरदान दे दिया।-कनई यादव, किसान
-- -- -- -- -- -- -- -
बारिश की बूंदों ने फसलों में जान फूंक दी है। मावठ का किसानों को इंतजार रहता है। 24 घंटे में हुई बारिश से कई क्षेत्रों में पानी भर गया है। गेहूं की फसल में एक पानी नहींं देना होगा।-मोनू मिश्रा किसान।
0000000000
इतने इलाके में बोई गई यह फसल
अनाज - क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
गेहूं - 198062
चना - 17279
मटर - 79616
मसूर- 24718
सरसों- 24097
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आधे शहर की सप्लाई रही बाधित : बारिश के चलते रात में फीडर नंबर एक पर फाल्ट होने से इस क्षेत्र से जुड़े घरों में सप्लाई सुबह बहाल हो सकी। इधर, नेहरू नगर में फाल्ट होने से इससे जुड़े कई मोहल्लों में सप्लाई बंद रही। अधिकारियों का कहना है कि इंसुलेटर खराब होने से सप्लाई बाधित रही। फीडर नंबर तीन में फाल्ट होने से सप्लाई रात में बाधित रही। कई मोहल्लों में खंभे में करंट उतरने से भी लोग परेशान रहे।
-- -- -- -- --
यह बारिश रबी की सभी फसलों के लिए लाभदायक है। सरसों, चना, मटर, जौ एवं गेहूं की वृद्धि अच्छी होगी तथा सिंचाई की बचत हुई। मटर, चना एवं सरसों की फसलों में पाला से होने वाले नुकसान की आशंका कम हो गई है। और वर्षा होने की दशा में किसानों को पानी की निकासी की व्यवस्था करनी पड़ेगी। विगत कई दिनों से तापमान में वृद्धि देखी जा रही थी, उसका भी दलहन, तिलहन, गेहूं एवं जौ आदि की फसलों पर कम असर होगा।-डॉ सुशील कुमार चतुर्वेदी, निदेशक शोध, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
विज्ञापन
ललितपुर। मौसम का मिजाज तेजी से बदला। रात में झमाझम बारिश हुई तो दिन में हल्की धूप रही। और शाम चार बजते ही बादल व कोहरा छा जाने से फिर सर्दी बढ़ गई। शुक्रवार रात में सर्वाधिक बारिश मड़ावरा तहसील क्षेत्र में हुई तो सबसे कम सदर क्षेत्र में दर्ज की गई। बारिश से किसानों को रबी फसलों की सिंचाई से राहत मिल गई है।
तीन दिनों से मौसम में उतार चढ़ाव चल रहा है। शुक्रवार दिन में धूप निकलने से जहां गर्मी का अहसास हुआ तो रात में झमाझम बारिश होने से ठंडक हो गई। उधर, मड़ावरा तहसील के धौरीसागर गांव के मजरा सकरा में रात तीन बजे रूप नारायन यादव के घर पर गाज गिर गई। इसकी चपेट में आने से भैंसा व गर्भवती गाय मर गई। उसकी 40 वर्षीय पत्नी रानी मामूली रूप से झुलस गई।
विज्ञापन
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे से शनिवार सुबह आठ बजे तक औसतन 14 मिमी बारिश हुई। दिन में भी पाली सहित कई क्षेत्रों में रिमझिम बारिश होती रही। यह बारिश चना, गेहूं व सरसों के लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है।
विज्ञापन
किसानों को रहता है ‘मावठ’ का इंतजार : सर्दी में बारिश को बुंदेलखंडी भाषा में मावठ कहा जाता है। किसानों को इसका विशेष इंतजार रहता है, क्योंकि इस बारिश से फसलों को फायदा होता है। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए खर्च नहीं करना पड़ता। किसान जब नहर या अन्य संसाधन से पानी देता है तो उसे ठंड में खेत पर जाना पड़ता है, उससे भी मावठ का पानी बचाता है।
गेहूं में अब एक पानी की बचत : गेहूं की फसल में तीन पानी देने होते हैं, जिसमें एक पानी तो किसान पहले दे चुका है, लेकिन अब दूसरा पानी नहीं देना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि एक एकड़ में करीब 10 लीटर डीजल इंजन में लग जाता है, जो कि एक हजार रुपये का होता है। इस पानी से करीब 20 दिन तक पानी नहीं देना होगा।
00000000000000
बारिश से अब फसलों को पानी नहीं देना होगा। यह आसमान से पानी रूपी अमृत बरसा है। विगत दो दिनों से तापमान में बढ़ोतरी से चिंता बढ़ रही थी, लेकिन प्रकृति ने बारिश का वरदान दे दिया।-कनई यादव, किसान
बारिश की बूंदों ने फसलों में जान फूंक दी है। मावठ का किसानों को इंतजार रहता है। 24 घंटे में हुई बारिश से कई क्षेत्रों में पानी भर गया है। गेहूं की फसल में एक पानी नहींं देना होगा।-मोनू मिश्रा किसान।
0000000000
इतने इलाके में बोई गई यह फसल
अनाज - क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
गेहूं - 198062
चना - 17279
मटर - 79616
मसूर- 24718
सरसों- 24097
आधे शहर की सप्लाई रही बाधित : बारिश के चलते रात में फीडर नंबर एक पर फाल्ट होने से इस क्षेत्र से जुड़े घरों में सप्लाई सुबह बहाल हो सकी। इधर, नेहरू नगर में फाल्ट होने से इससे जुड़े कई मोहल्लों में सप्लाई बंद रही। अधिकारियों का कहना है कि इंसुलेटर खराब होने से सप्लाई बाधित रही। फीडर नंबर तीन में फाल्ट होने से सप्लाई रात में बाधित रही। कई मोहल्लों में खंभे में करंट उतरने से भी लोग परेशान रहे।
यह बारिश रबी की सभी फसलों के लिए लाभदायक है। सरसों, चना, मटर, जौ एवं गेहूं की वृद्धि अच्छी होगी तथा सिंचाई की बचत हुई। मटर, चना एवं सरसों की फसलों में पाला से होने वाले नुकसान की आशंका कम हो गई है। और वर्षा होने की दशा में किसानों को पानी की निकासी की व्यवस्था करनी पड़ेगी। विगत कई दिनों से तापमान में वृद्धि देखी जा रही थी, उसका भी दलहन, तिलहन, गेहूं एवं जौ आदि की फसलों पर कम असर होगा।-डॉ सुशील कुमार चतुर्वेदी, निदेशक शोध, रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।