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ग्राम पंचायतों के अनुदान पर ‘कोरोना की कैंची’
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gram panchayat grant
झांसी। ग्राम पंचायतों को मिलने वाले अनुदान में पचास फीसदी की कटौती कर दी गई है। पचास फीसदी की भारी-भरकम कटौती होने से ग्राम पंचायतों के सामने तमाम विकास कार्यों को कराने को लेकर संकट पैदा हो गया।
ग्राम पंचायतों को पंद्रहवें वित्त आयोग एवं पंचम वित्त आयोग के जरिए वित्तीय मदद मुहैया कराई जाती है। इस वित्तीय वर्ष में पंचम वित्त आयोग के जरिए जनपद को करीब नौ करोड़ रुपये आवंटित हुए लेकिन, इनमें से पचास फीसदी धनराशि ही पंचायतों को आंवटित होगी जबकि शेष पचास फीसदी धनराशि जिला स्वास्थ्य समिति को दिए जाने की तैयारी है। अफसरों का कहना है कि इन पैसों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए इस्तेमाल में लाई जानी वाली सामग्रियों पर खर्च किए जाएंगे। इनमें उपकरण समेत दवा, पीपीई किट, कोरोना जांच किट समेत अन्य की खरीद होनी है। हालांकि इसके पहले ही 496 ग्राम पंचायतों को कोरोना जांच किट खरीदवाई जा चुकीं। ग्राम पंचायतों की ओर से थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर, सैनिटाइजर, एन-95 मास्क, ग्लव्स आदि खरीद चुके हैं लेकिन, उसके बाद अब जिला स्वास्थ्य समिति को दिए जाने के नाम पर पंचायतों की रकम में फिर कटौती हुई है।
पचास फीसदी की भारी-भरकम रकम में कटौती होने से पंचायतों की ओर से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा। संभावना जताई जा रही कि बजट कटौती होने से भुगतान रुक जाएगा। इससे तमाम कार्यों के ठप पड़ जाने की आशंका है। हालांकि पंचायत राज अधिकारियों का कहना है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अब अधिक शेष नहीं बचा है। उनको जितनी रकम दी गई, वह नवंबर माह तक खर्च कर देनी होगी। ऐसे में तीन माह के भीतर खर्च करने के लिए पंचायतों के पास पर्याप्त रकम रहेगी। डीपीआरओ का कहना है कि अभी इस संबंध में स्वास्थ्य समिति की जानकारी भेज दी गई है। शासनादेश के मुताबिक बजट आवंटित किया जाएगा।
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पहले से सवालों के घेरे में कोरोना किट खरीद
पंचायतों को मिलने वाले अनुदान में पचास फीसदी की कटौती करके उसके जरिए फिर से कोरोना बचाव उपकरणों की खरीद की तैयारी है जबकि इसके पहले हुई खरीद अब तक सवालों के घेरे में है। पहले खरीदे गए उपकरण बाजार मूल्य से करीब तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए थे जिसकी जांच अभी चल रही है। गड़बड़ी के आरोपों के चलते ही इन उपकरणों के लिए भुगतान पर भी रोक लगाई गई है। इसी बीच फिर से नए उपकरणों के खरीद की तैयारी भी शुरू हो गई।
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ग्राम पंचायतों को पंद्रहवें वित्त आयोग एवं पंचम वित्त आयोग के जरिए वित्तीय मदद मुहैया कराई जाती है। इस वित्तीय वर्ष में पंचम वित्त आयोग के जरिए जनपद को करीब नौ करोड़ रुपये आवंटित हुए लेकिन, इनमें से पचास फीसदी धनराशि ही पंचायतों को आंवटित होगी जबकि शेष पचास फीसदी धनराशि जिला स्वास्थ्य समिति को दिए जाने की तैयारी है। अफसरों का कहना है कि इन पैसों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए इस्तेमाल में लाई जानी वाली सामग्रियों पर खर्च किए जाएंगे। इनमें उपकरण समेत दवा, पीपीई किट, कोरोना जांच किट समेत अन्य की खरीद होनी है। हालांकि इसके पहले ही 496 ग्राम पंचायतों को कोरोना जांच किट खरीदवाई जा चुकीं। ग्राम पंचायतों की ओर से थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर, सैनिटाइजर, एन-95 मास्क, ग्लव्स आदि खरीद चुके हैं लेकिन, उसके बाद अब जिला स्वास्थ्य समिति को दिए जाने के नाम पर पंचायतों की रकम में फिर कटौती हुई है।
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पचास फीसदी की भारी-भरकम रकम में कटौती होने से पंचायतों की ओर से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा। संभावना जताई जा रही कि बजट कटौती होने से भुगतान रुक जाएगा। इससे तमाम कार्यों के ठप पड़ जाने की आशंका है। हालांकि पंचायत राज अधिकारियों का कहना है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अब अधिक शेष नहीं बचा है। उनको जितनी रकम दी गई, वह नवंबर माह तक खर्च कर देनी होगी। ऐसे में तीन माह के भीतर खर्च करने के लिए पंचायतों के पास पर्याप्त रकम रहेगी। डीपीआरओ का कहना है कि अभी इस संबंध में स्वास्थ्य समिति की जानकारी भेज दी गई है। शासनादेश के मुताबिक बजट आवंटित किया जाएगा।
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पहले से सवालों के घेरे में कोरोना किट खरीद
पंचायतों को मिलने वाले अनुदान में पचास फीसदी की कटौती करके उसके जरिए फिर से कोरोना बचाव उपकरणों की खरीद की तैयारी है जबकि इसके पहले हुई खरीद अब तक सवालों के घेरे में है। पहले खरीदे गए उपकरण बाजार मूल्य से करीब तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए थे जिसकी जांच अभी चल रही है। गड़बड़ी के आरोपों के चलते ही इन उपकरणों के लिए भुगतान पर भी रोक लगाई गई है। इसी बीच फिर से नए उपकरणों के खरीद की तैयारी भी शुरू हो गई।