फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Global warming

प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है ग्लोबल वार्मिंग

Thu, 18 Jun 2015 12:37 AM IST
झांसी / ब्यूरो
झांसी / ब्यूरो Updated Thu, 18 Jun 2015 12:37 AM IST
विज्ञापन
बुधवार को सार्क देशों के कृषि वानिकी विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन पर मंथन किया। उन्होंने  ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण प्रकृति से अनावश्यक छेड़छाड़ को माना। विशेषज्ञों ने दुनिया को बचाने के लिए प्रकृति के बचाव का सुझाव दिया।
विज्ञापन

बुधवार को ‘कृषि वानिकी प्रणालियों में तकनीकी उन्नति, सार्क देशों में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकी हेतु रणनीति’ विषय पर केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक कृषि वानिकी डा. बी मोहन कुमार ने लघु एवं सीमांत कृषकों के लिए कृषि वानिकी पद्धति पर ज्यादा जोर देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने केरल में प्रचलित नारियल आधारित कृषि वानिकी पद्धति को लघु एवं सीमांत किसानों के लिए उपयोगी बताया। सुझाव दिया कि इस पद्धति को बंाग्लादेश व श्रीलंका को अपनाना चाहिए। उन्होंने उत्तर भारत में प्रचलित पॉपुलर, अमरूद, आम, आंवला, सू बबूल, बेर आधारित पद्धति को किसानों के खेत तक पहुंचाने की सिफारिश की। साथ ही मध्य भारत में संतरा आधारित कृषि वानिकी को छोटे एवं सीमांत किसानों तक पहुंचाए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि  मेड़ पर सागौन, महुआ, शीशम लगाने से ज्यादा तापमान होने पर फसलों की सुरक्षा होती है। खेत की मेड़ पर वन चरागाह कृषि वानिकी पद्धति अपनानी चाहिए।  किसान मवेशियों के लिए बहुवर्षीय चारा जैसे, हाथी घास(नैपियर) लगाकर साल भर हरे चारे की उपलब्धता हासिल कर सकते हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन बना रहेगा।
विज्ञापन

बंाग्लादेश के प्रतिनिधि शेख मोहम्मद ने होम गार्डन संबंधित कृषि वानिकी पद्धतियों पर प्रकाश डाला। अंतर्राष्ट्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केंद्र एशिया के डायरेक्टर जावेद रिज्वी ने तकनीकी सत्र द्वितीय की अध्यक्षता की। इस सत्र में मालदीव, श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने कृषकों के यहां अपनाई जाने वाली कृषि उद्यान एवं कृषि वानिकी पद्धतियों का विस्तृत प्रजेंटेशन किया। साथ ही नेपाल, पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने वहां की कृषि वानिकी पद्धतियों के बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने बताया कि पेड़ों की नौ प्रजातियां सभी सार्क देशों में अपनाई गई हैं, जिसमें आंवला एवं बेर आधारित कृषि वानिकी पद्धति ज्यादा लोकप्रिय है। अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने कृषि वानिकी पद्धतियों एवं जलवायु परिवर्तन से होने वाले प्रभावों पर प्रजेंटेशन दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे पूर्व केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डा. अनिल कुमार गर्ग ने विदेशी अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरपी द्विवेदी, प्रशासनिक अधिकारी जेएल शर्मा, वित्त अधिकारी एसबी शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन प्रधान वैज्ञानिक डा. रजा हैदर रिज्वी ने किया। आभार प्रधान वैज्ञानिक डा. एके हांडा ने जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed