{"_id":"6a5b06da27b37b01da0d2313","slug":"garhmau-lake-could-transform-bundelkhand-s-tourism-landscape-2026-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"झांसी: गढ़मऊ झील बदल सकती है बुंदेलखंड की पर्यटन तस्वीर, संभावनाएं अपार; विभागीय तालमेल न होने से अटकी योजनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झांसी: गढ़मऊ झील बदल सकती है बुंदेलखंड की पर्यटन तस्वीर, संभावनाएं अपार; विभागीय तालमेल न होने से अटकी योजनाएं
Sun, 19 Jul 2026 07:03 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sun, 19 Jul 2026 07:03 PM IST
सार
गढ़मऊ झील वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए सैर-सपाटे और पिकनिक का पसंदीदा ठिकाना रही है, लेकिन पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद विभागीय तालमेल न होने की वजह से यहां योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।
विज्ञापन
गढ़मऊ झील।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रानी लक्ष्मीबाई के किले के लिए प्रसिद्ध झांसी से 12 किलोमीटर दूर एक ऐसा प्राकृतिक पर्यटन स्थल भी है, जो सुनियोजित विकास होने पर बुंदेलखंड के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। नैनीताल जैसी दिखने वाली गढ़मऊ झील वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए सैर-सपाटे और पिकनिक का पसंदीदा ठिकाना रही है, लेकिन पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद विभागीय तालमेल न होने की वजह से यहां योजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।
बड़ी संख्या में आते हैं लोग
झांसी-कानपुर मार्ग के निकट स्थित गढ़मऊ झील कई किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। बरसात के मौसम में झील लबालब भर जाती है और चारों ओर फैली हरियाली, दूर-दूर तक नजर आने वाली पहाड़ियां तथा शांत वातावरण इसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल का आकर्षक स्वरूप देते हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग प्रकृति के बीच समय बिताने पहुंचते हैं।
जल पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं
पिछले कुछ वर्षों में जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने गढ़मऊ को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में पहल की। इसे झांसी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हुए यहां आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई, लेकिन स्थानीय निवासी पूजा पाल का कहना है कि योजनाओं की रफ्तार बेहद धीमी रही। आज भी यहां पर्यटकों के लिए पर्याप्त संकेतक, स्वच्छ शौचालय, कैफेटेरिया, बच्चों के मनोरंजन क्षेत्र और व्यवस्थित पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आशुतोष भार्गव का मानना है कि गढ़मऊ में जल पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। यदि यहां बोटिंग, कायाकिंग और अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू की जाएं तो यह स्थल झांसी ही नहीं, पूरे बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है।
विज्ञापन
झांसी पर्यटन सर्किट को मिलेगा नया आयाम
गढ़मऊ की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। इसे झांसी किला, रानी महल और राजकीय संग्रहालय जैसे ऐतिहासिक स्थलों के साथ पर्यटन सर्किट में जोड़ा जा सकता है। इससे झांसी आने वाले पर्यटक ऐतिहासिक धरोहरों के साथ प्राकृतिक पर्यटन का भी आनंद ले सकेंगे और शहर में उनका ठहराव बढ़ेगा।
दो विभागों के बीच अटका विकास
गढ़मऊ झील के विकास की योजना फिलहाल पर्यटन और सिंचाई विभाग के बीच अटकी हुई है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के अनुसार, सिंचाई विभाग की अनापत्ति (एनओसी) मिलने के बाद ही पर्यटन विकास के कार्य शुरू किए जा सकेंगे।
इनका यह है कहना
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (बेतवा प्रखंड) ब्रजेश पोरवाल का कहना है कि पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार 24 करोड़ रुपये जमा कराए जाने हैं, जो अभी तक जमा नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि यदि झील में जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू करनी हैं तो इसके लिए शासन स्तर से भी अनुमति लेना आवश्यक होगा।
विज्ञापन
बड़ी संख्या में आते हैं लोग
झांसी-कानपुर मार्ग के निकट स्थित गढ़मऊ झील कई किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। बरसात के मौसम में झील लबालब भर जाती है और चारों ओर फैली हरियाली, दूर-दूर तक नजर आने वाली पहाड़ियां तथा शांत वातावरण इसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल का आकर्षक स्वरूप देते हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग प्रकृति के बीच समय बिताने पहुंचते हैं।
विज्ञापन
जल पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं
पिछले कुछ वर्षों में जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने गढ़मऊ को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में पहल की। इसे झांसी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हुए यहां आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई, लेकिन स्थानीय निवासी पूजा पाल का कहना है कि योजनाओं की रफ्तार बेहद धीमी रही। आज भी यहां पर्यटकों के लिए पर्याप्त संकेतक, स्वच्छ शौचालय, कैफेटेरिया, बच्चों के मनोरंजन क्षेत्र और व्यवस्थित पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आशुतोष भार्गव का मानना है कि गढ़मऊ में जल पर्यटन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। यदि यहां बोटिंग, कायाकिंग और अन्य जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू की जाएं तो यह स्थल झांसी ही नहीं, पूरे बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है।
विज्ञापन
झांसी पर्यटन सर्किट को मिलेगा नया आयाम
गढ़मऊ की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। इसे झांसी किला, रानी महल और राजकीय संग्रहालय जैसे ऐतिहासिक स्थलों के साथ पर्यटन सर्किट में जोड़ा जा सकता है। इससे झांसी आने वाले पर्यटक ऐतिहासिक धरोहरों के साथ प्राकृतिक पर्यटन का भी आनंद ले सकेंगे और शहर में उनका ठहराव बढ़ेगा।
दो विभागों के बीच अटका विकास
गढ़मऊ झील के विकास की योजना फिलहाल पर्यटन और सिंचाई विभाग के बीच अटकी हुई है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के अनुसार, सिंचाई विभाग की अनापत्ति (एनओसी) मिलने के बाद ही पर्यटन विकास के कार्य शुरू किए जा सकेंगे।
इनका यह है कहना
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (बेतवा प्रखंड) ब्रजेश पोरवाल का कहना है कि पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार 24 करोड़ रुपये जमा कराए जाने हैं, जो अभी तक जमा नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि यदि झील में जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू करनी हैं तो इसके लिए शासन स्तर से भी अनुमति लेना आवश्यक होगा।