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मेडिकल कॉलेज को ही बना रखा था ठगी का अड्डा
Mon, 21 Oct 2019 07:07 PM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 21 Oct 2019 07:07 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
झांसी। डीआईजी की स्पेशल टीम द्वारा पकड़े गए गैंग ने मेडिकल कॉलेज को ही ठगी का अड्डा बना रखा था। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सरकारी कोटे से एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने का नाम देकर वीर विष्णु कुमार सिंह व बी निर्र्मया रेड्डी को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी स्थित एक कार्यालय ले जाकर फंसाया था। ओपीडी में बाकायदा सभी प्रक्रियाएं ऐसे पूरी कराई थीं कि दोनों धोखा खा गए थे।
पकड़ा गया गिरोह नीट परीक्षा में चयन न होने वाले छात्र-छात्राओं को शिकार बनाकर फंसाता था। इस ठगी में गार्ड समेत दो अन्य भी सहयोग करते थे। पुलिस ने अन्य फरार साथियोें को दबोचने के लिए दबिश देना शुरू कर दी है। कर्नाटक के इरन्ना निलया श्रीनगर कॉलोनी ताना लाल रोड बेल्लारी निवासी बी ईश्वरा रेड्डी ने थाना नवाबाद में तहरीर देते हुए बताया कि उनकी पुत्री बी निर्मया एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। उनका संपर्क नोएडा की एक एजेंसी से हुआ था। एजेंसी संचालक ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में निर्मया का प्रवेश कराने की बात कही थी। जिसके एवज में बीस लाख रुपये की मांग की गई थी। इसके बाद छात्रा परिवार सहित झांसी आ गई थी। रेलवे स्टेशन के पास बने एक होटल में सभी को ठहराया गया था। 25 अगस्त को छात्रा व उसके परिजनों को मेडिकल कॉलेज बुलाया गया, वहां ओपीडी बिल्डिंग के दूसरे तल पर बने एक कार्यालय को जालसाजी के लिए इस्तेमाल किया गया था। डॉक्टर के कार्यालय में ही छात्रा के प्रवेश से संबंधित सभी फॉर्म भरवाए गए थे।
होटल ले जाकर पैसे का लेनदेन हुआ। छात्रा के परिजनों ने जालसाजों को 20 लाख रुपये भी दे दिए थे, जहां बाद में प्रवेश न होने पर छात्रा व उसके परिजनों को ठगी का पता चला था। इधर, पीड़ित मथुरा निवासी वीर विष्णु कुमार सिंह को फंसाकर आठ लाख रुपये वसूल किए थे। एक साथ लाखों की ठगी सामने आने के बाद डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने पूरे मामले को गंभीरता से लेकर एक स्पेशल टीम बनाई थी। टीम ने दो पीड़ितों से बयान दर्ज कर कई जानकारियां लेकर पड़ताल शुरू कर दी थी। मोबाइल की कॉल डिटेल से लेकर अन्य जानकारियां भी जुटाना शुरू कर दिया था। इसी बीच टीम को पता चला कि पकड़े गए पांचों आरोपी कुछ और छात्रों को ठगी का शिकार बनाने झांसी आए हैं, जिस पर टीम ने लोकेशन ट्रेस कर पांचों आरोपियों को मेडिकल बाईपास के पास से पकड़ लिया।
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बताया गया है कि ओपीडी बिल्डिंग के दूसरे तल पर एक कार्यालय में दोपहर र्ढाई बजे के बाद छात्र-छात्राओं को बुलाया जाता था। जहां सारी कागजी प्रक्रियाएं उनके सामने पूरी कराते थे, ऐसे में छात्र-छात्राएं भी धोखा खा गए थे। ठगी के कारोबार में एक गार्ड समेत दो लोग भी शामिल हैं। पूछताछ में पहचान उजागर होने के बाद पुलिस ने पकड़ने के लिए दबिश दी, लेकिन गार्ड समेत दोनों भाग निकले। पुलिस टीम ने तीनों की तलाश शुरू कर दी है। दो अन्य बाहरी युवकों को भी दबोचने के लिए दबिश दी जा रही है।
तीन सीटों पर लाखों का खेल
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए 150 सीटें हैं, इनमें से 147 अलग-अलग श्रेणियों वालों के लिए हैं, जबकि तीन सीटें कोटे वालों के लिए आवंटित रहती हैं। ऐेसे में तीन सीटों पर ही लाखों की सौैदा करते थे। वर्तमान में यह तीन सीटें नेपाल के छात्र-छात्राओं को मिल चुकी हैं।
खातों में भी जमा होती थी रकम
ठगी का शिकार हुए छात्र-छात्राओं से खातों में भी रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस ने खातों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकांश खाते दिल्ली के ही बताए जा रहे हैं। जिन मोबाइल नंबरों से फोन पर बात की जाती थी, वह भी फर्जी होते थे। पर्र्सनल नंबर व असली नाम किसी को भी नहीं बताए जाते थे।
नोएडा से शुरू होती थी ठगी
नोएडा के सेक्टर-62 आईथम टॉवर कार्यालय नंबर 833 में माइंड मूवर के नाम से ठगी का अवैध कारोबार चलता था। जहां छात्र-छात्राओं को बुलाकर पूरी बातचीत होती थी। कुछ समय पहले मामले पकड़ मेें आने के बाद कार्यालय मेरठ शिफ्ट कर दिया गया था। यह गिरोह नोएडा, दिल्ली, मेरठ व झांसी से लेकर अन्य स्थानों पर सक्रिय होकर ठगी कर रहा है।
दस दिन में निकाले थे 52 लाख
दिल्ली के एक प्राइवेट बैंक में गैंग के सदस्यों का खाता था। पड़ताल के दौरान पता चला है कि दस दिन के भीतर 52 लाख रुपये गिरोह के सदस्यों ने निकाले थे। पकड़ा गया गैंग मौज मस्ती पर भी रकम खर्चा करता था। एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए सभी हवाई जहाज का प्रयोग करते थे।
टीम को मिलेगा 40 हजार रुपये का पुरस्कार
एडीजी प्रेमप्रकाश ने डीआईजी की टीम मेें शामिल परिक्षेत्रीय कार्यालय के उपनिरीक्षक मोहम्मद मतीन खान, उपनिरीक्षक त्रदीप सिंह, बड़ागांव थानाध्यक्ष सुधीर पवार, रक्सा थानाध्यक्ष व सर्वलांस प्रभारी विजय कुमार पांडे, विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक परमेंद्र सिंह, नवाबाद उपनिरीक्षक कुलभूषण सिंह, धीरेंद्र सिंह, प्रहलाद सिंह, करन सिंह, प्रमोद कुमार, पवन कुमार, आकाश, संदीप व रामजी को चालीस हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
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पकड़ा गया गिरोह नीट परीक्षा में चयन न होने वाले छात्र-छात्राओं को शिकार बनाकर फंसाता था। इस ठगी में गार्ड समेत दो अन्य भी सहयोग करते थे। पुलिस ने अन्य फरार साथियोें को दबोचने के लिए दबिश देना शुरू कर दी है। कर्नाटक के इरन्ना निलया श्रीनगर कॉलोनी ताना लाल रोड बेल्लारी निवासी बी ईश्वरा रेड्डी ने थाना नवाबाद में तहरीर देते हुए बताया कि उनकी पुत्री बी निर्मया एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। उनका संपर्क नोएडा की एक एजेंसी से हुआ था। एजेंसी संचालक ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में निर्मया का प्रवेश कराने की बात कही थी। जिसके एवज में बीस लाख रुपये की मांग की गई थी। इसके बाद छात्रा परिवार सहित झांसी आ गई थी। रेलवे स्टेशन के पास बने एक होटल में सभी को ठहराया गया था। 25 अगस्त को छात्रा व उसके परिजनों को मेडिकल कॉलेज बुलाया गया, वहां ओपीडी बिल्डिंग के दूसरे तल पर बने एक कार्यालय को जालसाजी के लिए इस्तेमाल किया गया था। डॉक्टर के कार्यालय में ही छात्रा के प्रवेश से संबंधित सभी फॉर्म भरवाए गए थे।
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होटल ले जाकर पैसे का लेनदेन हुआ। छात्रा के परिजनों ने जालसाजों को 20 लाख रुपये भी दे दिए थे, जहां बाद में प्रवेश न होने पर छात्रा व उसके परिजनों को ठगी का पता चला था। इधर, पीड़ित मथुरा निवासी वीर विष्णु कुमार सिंह को फंसाकर आठ लाख रुपये वसूल किए थे। एक साथ लाखों की ठगी सामने आने के बाद डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने पूरे मामले को गंभीरता से लेकर एक स्पेशल टीम बनाई थी। टीम ने दो पीड़ितों से बयान दर्ज कर कई जानकारियां लेकर पड़ताल शुरू कर दी थी। मोबाइल की कॉल डिटेल से लेकर अन्य जानकारियां भी जुटाना शुरू कर दिया था। इसी बीच टीम को पता चला कि पकड़े गए पांचों आरोपी कुछ और छात्रों को ठगी का शिकार बनाने झांसी आए हैं, जिस पर टीम ने लोकेशन ट्रेस कर पांचों आरोपियों को मेडिकल बाईपास के पास से पकड़ लिया।
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बताया गया है कि ओपीडी बिल्डिंग के दूसरे तल पर एक कार्यालय में दोपहर र्ढाई बजे के बाद छात्र-छात्राओं को बुलाया जाता था। जहां सारी कागजी प्रक्रियाएं उनके सामने पूरी कराते थे, ऐसे में छात्र-छात्राएं भी धोखा खा गए थे। ठगी के कारोबार में एक गार्ड समेत दो लोग भी शामिल हैं। पूछताछ में पहचान उजागर होने के बाद पुलिस ने पकड़ने के लिए दबिश दी, लेकिन गार्ड समेत दोनों भाग निकले। पुलिस टीम ने तीनों की तलाश शुरू कर दी है। दो अन्य बाहरी युवकों को भी दबोचने के लिए दबिश दी जा रही है।
तीन सीटों पर लाखों का खेल
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए 150 सीटें हैं, इनमें से 147 अलग-अलग श्रेणियों वालों के लिए हैं, जबकि तीन सीटें कोटे वालों के लिए आवंटित रहती हैं। ऐेसे में तीन सीटों पर ही लाखों की सौैदा करते थे। वर्तमान में यह तीन सीटें नेपाल के छात्र-छात्राओं को मिल चुकी हैं।
खातों में भी जमा होती थी रकम
ठगी का शिकार हुए छात्र-छात्राओं से खातों में भी रकम जमा कराई जाती थी। पुलिस ने खातों की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकांश खाते दिल्ली के ही बताए जा रहे हैं। जिन मोबाइल नंबरों से फोन पर बात की जाती थी, वह भी फर्जी होते थे। पर्र्सनल नंबर व असली नाम किसी को भी नहीं बताए जाते थे।
नोएडा से शुरू होती थी ठगी
नोएडा के सेक्टर-62 आईथम टॉवर कार्यालय नंबर 833 में माइंड मूवर के नाम से ठगी का अवैध कारोबार चलता था। जहां छात्र-छात्राओं को बुलाकर पूरी बातचीत होती थी। कुछ समय पहले मामले पकड़ मेें आने के बाद कार्यालय मेरठ शिफ्ट कर दिया गया था। यह गिरोह नोएडा, दिल्ली, मेरठ व झांसी से लेकर अन्य स्थानों पर सक्रिय होकर ठगी कर रहा है।
दस दिन में निकाले थे 52 लाख
दिल्ली के एक प्राइवेट बैंक में गैंग के सदस्यों का खाता था। पड़ताल के दौरान पता चला है कि दस दिन के भीतर 52 लाख रुपये गिरोह के सदस्यों ने निकाले थे। पकड़ा गया गैंग मौज मस्ती पर भी रकम खर्चा करता था। एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए सभी हवाई जहाज का प्रयोग करते थे।
टीम को मिलेगा 40 हजार रुपये का पुरस्कार
एडीजी प्रेमप्रकाश ने डीआईजी की टीम मेें शामिल परिक्षेत्रीय कार्यालय के उपनिरीक्षक मोहम्मद मतीन खान, उपनिरीक्षक त्रदीप सिंह, बड़ागांव थानाध्यक्ष सुधीर पवार, रक्सा थानाध्यक्ष व सर्वलांस प्रभारी विजय कुमार पांडे, विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक परमेंद्र सिंह, नवाबाद उपनिरीक्षक कुलभूषण सिंह, धीरेंद्र सिंह, प्रहलाद सिंह, करन सिंह, प्रमोद कुमार, पवन कुमार, आकाश, संदीप व रामजी को चालीस हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।