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नालों का पानी बर्बाद कर रहा झांसी के केवड़े की सुगंध
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झांसी। एक समय था जब झांसी में पैदा होने वाले केवड़े के फूलों से नारायण बाग महकता था। लेकिन अब शहर के नालों का पानी नारायण बाग में होकर जाने के कारण केवड़े काबाग बर्बाद हो रहा है।
नारायण बाग में उद्यान विभाग का आफिस है। यहीं उद्यान विभाग ने केवड़े का बाग लगा रखा है। कुछ साल पहले तक इस बाग की नीलामी होती थी। इसमें कन्नौज के बड़े इत्र व्यापारी झांसी आकर केवड़े की नीलामी में बोली लगाते थे। इसके बाद व्यापारी बाग से फूलों को तुड़वाकर अपने साथ ले जाते थे। इस केवड़े से कन्नौज में इत्र तैयार किया जाता था, जोकि यूपी के कई शहरों के अलावा देश-विदेश तक बेचा जाता था। इधर, तीन-चार वर्षों से इस बाग की दुर्दशा हो रही है। बाग के अंदर नालों का पानी घुसने की वजह से केवड़े के कई पौधे मर रहे हैं। उद्यान विभाग द्वारा लगातार इसके लिए कवायद की जा रही है। लेकिन सारे पौधे बच नहीं पा रहे हैं। इससे विभाग को काफी नुकसान भी हो रहा है। वहीं, अब व्यापारी भी नीलामी के लिए नहीं आ रहे।
असल में नारायण बाग के सामने लक्ष्मी तालाब है। इसमें शहर के कई नालों का पानी गिरता है। शहर में कुछ वर्ष पहले लक्ष्मी तालाब का सौंदर्यीकरण शुरू हुआ तो नालों को दूसरी तरफ डायवर्ट कर दिया गया। इस कारण से नालों का पानी नारायण बाग के अंदर घुसने लगा और धीरे-धीरे केवड़े के बाग तक पहुंच गया। इससे बाग में बड़ा दलदल हो गया और पानी भरा रहने से पौधों को नुकसान पहुंचने लगा। उधर, विभाग ने बाग की नीलामी शुरू की तो पता चला कि दलदल में तमाम जहरीले सांप और अजगर पैदा हो गए हैं। इससे व्यापारी बाग में जाने से डरने लगे। इससे नीलामी भी नहीं हो पाई। ऐसे में धीरे-धीरे केवड़े के पौधे मरने लगे।
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उद्यान विभाग के उपनिदेशक उद्यान विनय कुमार यादव ने बताया कि नाले का गंदा पानी आने की वजह से इसमें पन्नी, कूड़ा करकट जमा हो रहा है। इस कारण कई पौधे खराब हो रहे हैं। इनके संरक्षण के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
कई गांवों से होकर पहूज नदी में जा रहा गंदा पानी
झांसी। लक्ष्मी तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। ऐसे में शहर का गंदा पानी लक्ष्मी तालाब से ना जाकर नारायण बाग से होते हुए सीधा गढ़मऊ, मुस्तरा, टांकोरी, लेबा गांव होकर पहूज नदी में जाकर मिल रहा है। पहले यह पानी लक्ष्मी तालाब से होकर आता था तो इसमें सिल्ट, कूड़ा-कचरा नहीं आता था, लेकिन अब लगभग तीन-चार साल से कचरा सीधा आ रहा है। जिससे नारायण बाग में लगे पौधों को नुकसान हो रहा है।
बरसात में ओवरफ्लो हो जाता है नाला
झांसी। बरसात के मौसम में नाले ओवरफ्लो होने की वजह से पूरे बाग में गंदा पानी फैल जाता है। इससे अन्य पौधे बर्बाद हो रहे हैं। ऐसे में उद्यान विभाग में लगे केवड़े के अलावा अर्जुन आदि के पौधे नष्ट हो रहे हैं।
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नारायण बाग में उद्यान विभाग का आफिस है। यहीं उद्यान विभाग ने केवड़े का बाग लगा रखा है। कुछ साल पहले तक इस बाग की नीलामी होती थी। इसमें कन्नौज के बड़े इत्र व्यापारी झांसी आकर केवड़े की नीलामी में बोली लगाते थे। इसके बाद व्यापारी बाग से फूलों को तुड़वाकर अपने साथ ले जाते थे। इस केवड़े से कन्नौज में इत्र तैयार किया जाता था, जोकि यूपी के कई शहरों के अलावा देश-विदेश तक बेचा जाता था। इधर, तीन-चार वर्षों से इस बाग की दुर्दशा हो रही है। बाग के अंदर नालों का पानी घुसने की वजह से केवड़े के कई पौधे मर रहे हैं। उद्यान विभाग द्वारा लगातार इसके लिए कवायद की जा रही है। लेकिन सारे पौधे बच नहीं पा रहे हैं। इससे विभाग को काफी नुकसान भी हो रहा है। वहीं, अब व्यापारी भी नीलामी के लिए नहीं आ रहे।
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असल में नारायण बाग के सामने लक्ष्मी तालाब है। इसमें शहर के कई नालों का पानी गिरता है। शहर में कुछ वर्ष पहले लक्ष्मी तालाब का सौंदर्यीकरण शुरू हुआ तो नालों को दूसरी तरफ डायवर्ट कर दिया गया। इस कारण से नालों का पानी नारायण बाग के अंदर घुसने लगा और धीरे-धीरे केवड़े के बाग तक पहुंच गया। इससे बाग में बड़ा दलदल हो गया और पानी भरा रहने से पौधों को नुकसान पहुंचने लगा। उधर, विभाग ने बाग की नीलामी शुरू की तो पता चला कि दलदल में तमाम जहरीले सांप और अजगर पैदा हो गए हैं। इससे व्यापारी बाग में जाने से डरने लगे। इससे नीलामी भी नहीं हो पाई। ऐसे में धीरे-धीरे केवड़े के पौधे मरने लगे।
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उद्यान विभाग के उपनिदेशक उद्यान विनय कुमार यादव ने बताया कि नाले का गंदा पानी आने की वजह से इसमें पन्नी, कूड़ा करकट जमा हो रहा है। इस कारण कई पौधे खराब हो रहे हैं। इनके संरक्षण के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
कई गांवों से होकर पहूज नदी में जा रहा गंदा पानी
झांसी। लक्ष्मी तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। ऐसे में शहर का गंदा पानी लक्ष्मी तालाब से ना जाकर नारायण बाग से होते हुए सीधा गढ़मऊ, मुस्तरा, टांकोरी, लेबा गांव होकर पहूज नदी में जाकर मिल रहा है। पहले यह पानी लक्ष्मी तालाब से होकर आता था तो इसमें सिल्ट, कूड़ा-कचरा नहीं आता था, लेकिन अब लगभग तीन-चार साल से कचरा सीधा आ रहा है। जिससे नारायण बाग में लगे पौधों को नुकसान हो रहा है।
बरसात में ओवरफ्लो हो जाता है नाला
झांसी। बरसात के मौसम में नाले ओवरफ्लो होने की वजह से पूरे बाग में गंदा पानी फैल जाता है। इससे अन्य पौधे बर्बाद हो रहे हैं। ऐसे में उद्यान विभाग में लगे केवड़े के अलावा अर्जुन आदि के पौधे नष्ट हो रहे हैं।