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सरकारी असलाह की आस नहीं, निजी के लिए चक्कर लगा रहे वन कर्मी
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झांसी। वन तस्करों से मुकाबले के लिए वन कर्मियों के पास आधुनिक हथियारों की कमी है। जिले की सात रेंजों में कुल छह ही असलहे हैं। वह भी काफी पुरानी तकनीक के हैं। मोंठ और बबीना रेंज में तो एक भी असलहा नहीं है। हथियारों की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया। मांग पूरी नहीं होने पर वन कर्मियों द्वारा निजी असलाह लेने के लिए लाइसेंस को आवेदन किए हैं। लेकिन सालों बीत जाने के बाद जाने के बाद भी किसी भी वन कर्मी को लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।
जिले के वन क्षेत्र में सागौन, शीशम, खैर, आम, महुआ सहित कई प्रजातियों के बेशकीमती पेड़ लगे हुए हैं। जिनकी सुरक्षा के लिए जिले में झांसी, बबीना, चिरगांव, मोंठ, मऊरानीपुर, गुरसरांय, बामौर सहित कुल सात रेंज बनाई गई हैं। वनों की रक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजरों) को दी गई है। लेकिन असलहों की कमी होने के कारण वनों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। जबकि प्रत्येक रेंज में लगभग पांच असलहा होेना जरूरी है। आलम यह है कि बबीना और मोंठ रेंज में एक भी असलहा नहीं होने के कारण वनों की रक्षा लाठी और डंडों के सहारे ही हो रही है। असलहों की कमी को दूर करने के लिए कई बार लिखित रूप से मांग की गई है। लेकिन मांग को पूरा नहीं किया गया है। जिसके चलते वन कर्मियों द्वारा निजी असलाह के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। लेकिन सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी लाइसेंस को जारी नहीं किया गया है।
इस संबंध में जिला वन अधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि विभाग में कई सालों से असलाह की कमी है। विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है। कई वन कर्मियों द्वारा निजी असलाह के लिए आवेदन किया है। लेकिन लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।
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जिले के वन क्षेत्र में सागौन, शीशम, खैर, आम, महुआ सहित कई प्रजातियों के बेशकीमती पेड़ लगे हुए हैं। जिनकी सुरक्षा के लिए जिले में झांसी, बबीना, चिरगांव, मोंठ, मऊरानीपुर, गुरसरांय, बामौर सहित कुल सात रेंज बनाई गई हैं। वनों की रक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजरों) को दी गई है। लेकिन असलहों की कमी होने के कारण वनों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। जबकि प्रत्येक रेंज में लगभग पांच असलहा होेना जरूरी है। आलम यह है कि बबीना और मोंठ रेंज में एक भी असलहा नहीं होने के कारण वनों की रक्षा लाठी और डंडों के सहारे ही हो रही है। असलहों की कमी को दूर करने के लिए कई बार लिखित रूप से मांग की गई है। लेकिन मांग को पूरा नहीं किया गया है। जिसके चलते वन कर्मियों द्वारा निजी असलाह के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है। लेकिन सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी लाइसेंस को जारी नहीं किया गया है।
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इस संबंध में जिला वन अधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि विभाग में कई सालों से असलाह की कमी है। विभागीय अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है। कई वन कर्मियों द्वारा निजी असलाह के लिए आवेदन किया है। लेकिन लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।
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