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बुंदेलखंड की धरती पर जल्द लौटेंगे विदेशी मेहमान
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झांसी। बुंदेलखंड के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह नवंबर के बाद दोबारा विदेशी मेहमानों के आने की उम्मीद है। अभी चार्टर्ड फ्लाइट्स से गोवा समेत देश के कई पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों का आना शुरू हो गया है। शुरुआत में फ्री इंडीविजुअल टूरिस्ट ग्रुप (एक से पांच की संख्या में विदेशी) आएंगे। जबकि पचास से अधिक संख्या वाले बड़े समूह को आने में अभी एक साल का वक्त और लग सकता है। कोरोना काल के कारण पिछले दो साल से विदेशी पर्यटकों को आना बंद है।
कोरोना काल से पहले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो, ओरछा के अलावा झांसी, बरुआसागर, देवगढ़, चंदेरी के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह जुलाई से पंद्रह सितंबर तक स्पेनिश और इटेलियन ग्रुप भारत आते थे। इसी तरह अक्तूबर से फरवरी तक अमेरिकन, ब्रिटिश, ताइवान, मैक्सिको, चाइना, जापान, कोरिया के ग्रुप आते थे। हर साल 20 हजार से 25 हजार विदेशी पर्यटक आते थे। यह ग्रुप पहले हवाई जहाज से नई दिल्ली आते थे और फिर आगरा घूमने के बाद शताब्दी एक्सप्रेस और गतिमान एक्सप्रेस से झांसी आते थे। इसके बाद रेलवे स्टेशन से उनको टूरिस्ट बसें दर्शनीय स्थलों पर तक ले जातीं थीं। मगर, कोरोना की आहट के साथ ही साल 2020 के शुरूआत से ही विदेशी पर्यटकों ने बुंदेलखंड में आना बंद कर दिया था। तब से बुंदेलखंड का टूरिस्ट उद्योग पूरी तरह ठप पड़ा है। विदेशी पर्यटकों ने 15 अक्तूबर के बाद से दोबारा भारत आना शुरू कर दिया है। टूर कंपनियों के मुताबिक बुंदेलखंड में 15 नवंबर के बाद एक से पांच की संख्या के छोटे समूहों में विदेशियों के आने की उम्मीद है।
एक हजार से अधिक लोगों को दोबारा मिल सकेगा काम
बुंदेलखंड के पर्यटन उद्योग को हर साल विदेशी पर्यटकों से 50 करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, ट्रेवल्स, टूर ऑपरेटर व अन्य कारोबारी शामिल हैं। साथ ही इस काम में एजेंट, गाइड, ड्राइवर समेत एक हजार लोग जुड़े थे। कोरोना काल में इनमें अधिकांश का रोजगार छीन गया। कंपनियों ने कह दिया कि दोबारा काम शुरू होने पर ही उनको बुलाया जाएगा।
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फोरलेन से सुगम होगा बस का सफर
झांसी से खजुराहो की दूरी 180 किलोमीटर है। विदेशी पर्यटकों को यह दूरी बस से तय करनी पड़ती है। अभी तक इस मार्ग की सड़क छोटी होने के कारण सफर तय करने में पांच से छह घंटे लग जाते थे, लेकिन अब यह मार्ग फोरलेन हो गया है। इससे सफर तीन से चार घंटे में ही पूरा हो जाएगा।
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कोरोना काल से पहले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो, ओरछा के अलावा झांसी, बरुआसागर, देवगढ़, चंदेरी के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए पंद्रह जुलाई से पंद्रह सितंबर तक स्पेनिश और इटेलियन ग्रुप भारत आते थे। इसी तरह अक्तूबर से फरवरी तक अमेरिकन, ब्रिटिश, ताइवान, मैक्सिको, चाइना, जापान, कोरिया के ग्रुप आते थे। हर साल 20 हजार से 25 हजार विदेशी पर्यटक आते थे। यह ग्रुप पहले हवाई जहाज से नई दिल्ली आते थे और फिर आगरा घूमने के बाद शताब्दी एक्सप्रेस और गतिमान एक्सप्रेस से झांसी आते थे। इसके बाद रेलवे स्टेशन से उनको टूरिस्ट बसें दर्शनीय स्थलों पर तक ले जातीं थीं। मगर, कोरोना की आहट के साथ ही साल 2020 के शुरूआत से ही विदेशी पर्यटकों ने बुंदेलखंड में आना बंद कर दिया था। तब से बुंदेलखंड का टूरिस्ट उद्योग पूरी तरह ठप पड़ा है। विदेशी पर्यटकों ने 15 अक्तूबर के बाद से दोबारा भारत आना शुरू कर दिया है। टूर कंपनियों के मुताबिक बुंदेलखंड में 15 नवंबर के बाद एक से पांच की संख्या के छोटे समूहों में विदेशियों के आने की उम्मीद है।
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एक हजार से अधिक लोगों को दोबारा मिल सकेगा काम
बुंदेलखंड के पर्यटन उद्योग को हर साल विदेशी पर्यटकों से 50 करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, ट्रेवल्स, टूर ऑपरेटर व अन्य कारोबारी शामिल हैं। साथ ही इस काम में एजेंट, गाइड, ड्राइवर समेत एक हजार लोग जुड़े थे। कोरोना काल में इनमें अधिकांश का रोजगार छीन गया। कंपनियों ने कह दिया कि दोबारा काम शुरू होने पर ही उनको बुलाया जाएगा।
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फोरलेन से सुगम होगा बस का सफर
झांसी से खजुराहो की दूरी 180 किलोमीटर है। विदेशी पर्यटकों को यह दूरी बस से तय करनी पड़ती है। अभी तक इस मार्ग की सड़क छोटी होने के कारण सफर तय करने में पांच से छह घंटे लग जाते थे, लेकिन अब यह मार्ग फोरलेन हो गया है। इससे सफर तीन से चार घंटे में ही पूरा हो जाएगा।