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इनके लिए तो बेटियां ही बेटे हैं, उनकी सलामती को रखती हैं व्रत
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झांसी। ओस की बूंद सी कही जाने वाली बेटियां सबको प्यारी होती हैं। महानगर में तमाम परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने की बात हो या उनको मुसीबत से बचाने की, मां ने खुद को आगे कर बेटियों को सलामत किया। उनके लिए मां व्रत भी रखती हैं। महानगर में कई मां ऐसी हैं, जो बेटियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद उनके साथ अस्पताल में क्वारंटीन रही। एक मां तो अपनी बेटी के साथ अस्पताल में रहकर महामारी को मात दी। आज अहोई अष्टमी है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सलामती के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन कई मां बेटियों के लिए व्रत रखेंगीं।
15 दिन अस्पताल में बिताए
महानगर के मिशन कंपाउंड निवासी राजेश अग्रवाल और डिंपल अग्रवाल की बेटी दीपाली अग्रवाल उनकी लाडली है। अप्रैल में दीपाली को कोरोना ने जकड़ा, तो माता-पिता की चिंता बढ़ गई। बेटी को रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महामारी के दौर में जहां परिजनों को मरीज से दूर रखा जा रहा था, तो मां डिंपल आगे आकर खुद बेटी के साथ अस्पताल में रहीं। बेटी की स्थिति लगातार गिरती जा रही थी। बेटी के स्वास्थ्य की चिंता में प्रार्थना, व्रत और सेवा की। बेटी की हालत सुधरी तो घर लेकर आए। यहां भी देखभाल की और बेटी ने कोरोना को हराया। वे बताती हैं कि बेटी ही सब कुछ है। बेटी का स्वास्थ्य खराब हुआ था, तो चिंता बढ़ गई थी। मगर भगवान ने सब कुछ ठीक कर दिया।
बेटी के लिए अस्पताल में रही मां
महानगर के रायगंज निवासी पल्लवी सहारिया के लिए छह साल की बेटी अनन्या बेटे से कम नहीं है। पल्लवी बताती हैं कि बेटी को कोरोना हो गया। छोटी उम्र में बच्ची का अकेले क्वारंटीन रहना संभव नहीं था। अस्पताल मेें भर्ती कराया, तो डाक्टर मुझे साथ रखने को तैयार नहीं थे। काफी समझाने के बाद वे माने, तो बेटी के साथ अस्पताल और घर में क्वारंटीन रही। उसकी पूरी देखभाल की। उसके लिए हर साल व्रत भी रखती हूं। मेरे लिए बेटी सब कुछ है।
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खुद को भी कर लिया क्वारंटीन
महानगर के टंडन रोड निवासी नीलम शुक्ला ने बेटी तान्या के लिए महामारी को मात दी। उनकी बेटी को भी कोरोना संक्रमण हुआ। संक्रमण के दौर में बेटी का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था। बेटी के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उन्होंने खुद को भी 14 दिन क्वारंटीन कर लिया। इस बीच खुद भी कोरोना पॉजिटिव हो र्गईं, लेकिन हौसला बनाए रखकर महामारी को हराया। वे कहती हैं कि बेटी-बेटे में कोई अंतर नहीं है। बेटी उन्हें बहुत प्यारी है।
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15 दिन अस्पताल में बिताए
महानगर के मिशन कंपाउंड निवासी राजेश अग्रवाल और डिंपल अग्रवाल की बेटी दीपाली अग्रवाल उनकी लाडली है। अप्रैल में दीपाली को कोरोना ने जकड़ा, तो माता-पिता की चिंता बढ़ गई। बेटी को रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महामारी के दौर में जहां परिजनों को मरीज से दूर रखा जा रहा था, तो मां डिंपल आगे आकर खुद बेटी के साथ अस्पताल में रहीं। बेटी की स्थिति लगातार गिरती जा रही थी। बेटी के स्वास्थ्य की चिंता में प्रार्थना, व्रत और सेवा की। बेटी की हालत सुधरी तो घर लेकर आए। यहां भी देखभाल की और बेटी ने कोरोना को हराया। वे बताती हैं कि बेटी ही सब कुछ है। बेटी का स्वास्थ्य खराब हुआ था, तो चिंता बढ़ गई थी। मगर भगवान ने सब कुछ ठीक कर दिया।
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बेटी के लिए अस्पताल में रही मां
महानगर के रायगंज निवासी पल्लवी सहारिया के लिए छह साल की बेटी अनन्या बेटे से कम नहीं है। पल्लवी बताती हैं कि बेटी को कोरोना हो गया। छोटी उम्र में बच्ची का अकेले क्वारंटीन रहना संभव नहीं था। अस्पताल मेें भर्ती कराया, तो डाक्टर मुझे साथ रखने को तैयार नहीं थे। काफी समझाने के बाद वे माने, तो बेटी के साथ अस्पताल और घर में क्वारंटीन रही। उसकी पूरी देखभाल की। उसके लिए हर साल व्रत भी रखती हूं। मेरे लिए बेटी सब कुछ है।
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खुद को भी कर लिया क्वारंटीन
महानगर के टंडन रोड निवासी नीलम शुक्ला ने बेटी तान्या के लिए महामारी को मात दी। उनकी बेटी को भी कोरोना संक्रमण हुआ। संक्रमण के दौर में बेटी का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था। बेटी के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उन्होंने खुद को भी 14 दिन क्वारंटीन कर लिया। इस बीच खुद भी कोरोना पॉजिटिव हो र्गईं, लेकिन हौसला बनाए रखकर महामारी को हराया। वे कहती हैं कि बेटी-बेटे में कोई अंतर नहीं है। बेटी उन्हें बहुत प्यारी है।