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संघर्ष करने वालों को सही रास्ता दिखाएं: शिवा
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 03 Jan 2018 01:43 AM IST
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entertainment
- फोटो : amar ujala
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मेगा स्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘हम’ में खलनायक की भूमिका से चर्चित हुए शिवा हस्तशिल्प मेले में अपनी प्रस्तुति देने आए। उन्होंने ‘अमर उजाला’ के साथ अपने फिल्मी जीवन के संघर्ष के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मायानगरी मुंबई में बहुत से युवा अपनी किस्मत बनाने जाते हैं, लेकिन वह ठगी का शिकार हो जाते हैं। यदि कोई उनके संपर्क में आता है तो वह प्रयास करते हैं कि संघर्ष करने वालों को सही रास्ता दिखाएं।
एक होटल में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि दिन-रात अपना काम करो, किस्मत खुद ब खुद आपको सफलता दिलाने लगती है। गुजरात के राजकोट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद अचानक उनका फिल्मों की ओर रुझान बढ़ा और मुंबई आ गए, लेकिन कोई गॉड फादर नहीं होने के कारण उन्हें धक्के खाने पड़े। हार नहीं मानी और एक दिन मौका मिल गया। ‘घर एक मंदिर’ उनकी पहली फिल्म थी, जिसमें छोटा रोल मिला। इसके बाद ‘कयामत से कयामत तक’ आई। बाद में सुनील शेट्टी की फिल्म ‘काला साम्राज्य’, मिथुन चक्रवर्ती की ‘गरीब’ की। ‘गरीब’ फिल्म के दौरान उनका सीन बार-बार रीटेक हो रहा था, जिससे वह मायूस हो गए। लेकिन, अमरीश पुरी ने उनका हौसला बढ़ाया। फिल्म ‘काली चट्टान’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’, ‘तारा सितारा’ और ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का सीक्वल बन रही हैं, जो जल्द पर्दे पर आएंगी।
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम के साथ वह हरिद्वार के संत कैलाश महाराज की प्रेरणा से आए। उनकी दो बेटियां हैं। वह चाहते हैं कि बेटियों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले। उन्होंने कहा कि औरत नहीं तो मां नहीं, मां नहीं तो जन्नत नहीं और जन्नत नहीं तो खुदा नहीं, इसलिए बेटियों का दर्जा बहुत बड़ा है। प्रकृति की हकीकत मां है। अभिनेता अनुपम खेर भी बेटी बचाओ अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
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मुकेश से बने शिवा
मुकेश से शिवा बनने के पीछे भी एक कहानी है। उन्होंने बताया कि ‘मेरा जवाब’ फिल्म के दौरान जैकी श्राफ ने उन्हें शिवा नाम दिया और तभी से इसी नाम से पहचान बन गई।
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एक होटल में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि दिन-रात अपना काम करो, किस्मत खुद ब खुद आपको सफलता दिलाने लगती है। गुजरात के राजकोट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद अचानक उनका फिल्मों की ओर रुझान बढ़ा और मुंबई आ गए, लेकिन कोई गॉड फादर नहीं होने के कारण उन्हें धक्के खाने पड़े। हार नहीं मानी और एक दिन मौका मिल गया। ‘घर एक मंदिर’ उनकी पहली फिल्म थी, जिसमें छोटा रोल मिला। इसके बाद ‘कयामत से कयामत तक’ आई। बाद में सुनील शेट्टी की फिल्म ‘काला साम्राज्य’, मिथुन चक्रवर्ती की ‘गरीब’ की। ‘गरीब’ फिल्म के दौरान उनका सीन बार-बार रीटेक हो रहा था, जिससे वह मायूस हो गए। लेकिन, अमरीश पुरी ने उनका हौसला बढ़ाया। फिल्म ‘काली चट्टान’, ‘डोंट वरी बी हैप्पी’, ‘तारा सितारा’ और ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का सीक्वल बन रही हैं, जो जल्द पर्दे पर आएंगी।
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‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम के साथ वह हरिद्वार के संत कैलाश महाराज की प्रेरणा से आए। उनकी दो बेटियां हैं। वह चाहते हैं कि बेटियों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले। उन्होंने कहा कि औरत नहीं तो मां नहीं, मां नहीं तो जन्नत नहीं और जन्नत नहीं तो खुदा नहीं, इसलिए बेटियों का दर्जा बहुत बड़ा है। प्रकृति की हकीकत मां है। अभिनेता अनुपम खेर भी बेटी बचाओ अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
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मुकेश से बने शिवा
मुकेश से शिवा बनने के पीछे भी एक कहानी है। उन्होंने बताया कि ‘मेरा जवाब’ फिल्म के दौरान जैकी श्राफ ने उन्हें शिवा नाम दिया और तभी से इसी नाम से पहचान बन गई।