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एक साल से शासन में अटकी फाइल, माताटीला में ठप पड़ा काम
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झांसी। अटल मिशन फॉर रिजुवेशन एंड अरबन ट्रांसफार्मेशन (अम्रुत) योजना के अंतर्गत महानगर में पेयजल आपूर्ति के लिए जलनिगम और सिंचाई विभाग के बीच एक साल से एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर दस्तखत नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण माताटीला बांध के पास जलनिगम के सीपी टैंक, पावर हाउस और स्टाफ वर्कर के लिए आवास का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। यदि जल्द ही शासन से स्वीकृति नहीं मिली तो नए साल में नए तरीके से दोबारा पूरी कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी और पेयजल योजना का काम पिछड़ जाएगा, जिससे योजना और लंबी ख्ंिाचने के आसार हैं।
पहले तो कोरोना के कारण योजना छह महीने पीछे चल रही थी, अब इसमें एक और परेशानी आ गई है। सिंचाई विभाग द्वारा शासन को एक साल पहले भेजे गए पानी के एमओयू में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दरअसल, माताटीला बांध सिंचाई विभाग के अंतर्गत आता है और जलनिगम इसमें से पानी लेना चाहता है। इस कारण किसानों को सिंचाई के लिए मिलने वाला पानी कम हो जाएगा। इस बारे में दोनों विभागों के बीच एक करार होना है। इस एमओयू में उल्लेख है कि 2022 तक 35 एमएलडी पानी लिया जाएगा, जिससे तीन हजार हेक्टेयर में सिंचाई प्रभावित होगी। इसके बाद 2022 में 60 एमएलडी पानी लिया जाएगा। इस कारण सिंचाई की सुविधा और कम हो जाएगी।
यह एमओयू शासन को एक साल पहले भेज दिया गया था। तब से लेकर अब तक शासन में ही अटका हुआ हैै। कई बार अधिकारी इसके लिए पैरवी कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका है। इसमें खास बात यह है कि यदि इस साल इसे मंजूरी नहीं मिली तो अगले साल और दिक्कत आ सकती है, क्योंकि तब सिंचाई के कार्य में लगने वाला दोगुना पानी असर डालेगा। एमओयू साइन नहीं होने के कारण जलनिगम माताटीला में काम शुरू नहीं कर पा रहा है, जिससे पानी की आपूर्ति के लिए बनाया जाने वाला सीपी टैंक नहीं बन पा रहा है। मशीनें चलाने के लिए पावर हाउस नहीं बन पा रहा है और कर्मचारियों के आवास शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
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बता दें कि जल्द ही विधानसभा चुनाव आचार संहिता लगने वाली है। इस कारण प्रशासनिक कार्य ठप हो जाएंगे और चुनावों में करीब तीन महीने का समय लगेगा। इसके बाद आने वाली सरकार नए सिरे से सभी कार्यों की मानीटरिंग करेगी, जिससे पेयजल महायोजना में और देरी होने की संभावना है।
करीब एक साल से बराबर लखनऊ में पैरवी कर रहे हैं, लेकिन अब तक एमओयू साइन नहीं हो पाया है। पूरा प्रयास है कि जल्द से जल्द एमओयू साइन हो जाए।
- मो फरीद, अधिशासी अभियंता
सिंचाई विभाग
एमओयू साइन होने के बाद ही माताटीला में काम शुरू हो पाएगा। अभी सीपी टैंक और पावर हाउस का निर्माण नहीं हो पासा है। प्रयास किया जा रहा है कि समय पर काम पूरा हो जाए।
- रोहित चौरसिया, अधिशासी अभियंता अतिरिक्त निर्माण इकाई।
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पहले तो कोरोना के कारण योजना छह महीने पीछे चल रही थी, अब इसमें एक और परेशानी आ गई है। सिंचाई विभाग द्वारा शासन को एक साल पहले भेजे गए पानी के एमओयू में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दरअसल, माताटीला बांध सिंचाई विभाग के अंतर्गत आता है और जलनिगम इसमें से पानी लेना चाहता है। इस कारण किसानों को सिंचाई के लिए मिलने वाला पानी कम हो जाएगा। इस बारे में दोनों विभागों के बीच एक करार होना है। इस एमओयू में उल्लेख है कि 2022 तक 35 एमएलडी पानी लिया जाएगा, जिससे तीन हजार हेक्टेयर में सिंचाई प्रभावित होगी। इसके बाद 2022 में 60 एमएलडी पानी लिया जाएगा। इस कारण सिंचाई की सुविधा और कम हो जाएगी।
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यह एमओयू शासन को एक साल पहले भेज दिया गया था। तब से लेकर अब तक शासन में ही अटका हुआ हैै। कई बार अधिकारी इसके लिए पैरवी कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हो सका है। इसमें खास बात यह है कि यदि इस साल इसे मंजूरी नहीं मिली तो अगले साल और दिक्कत आ सकती है, क्योंकि तब सिंचाई के कार्य में लगने वाला दोगुना पानी असर डालेगा। एमओयू साइन नहीं होने के कारण जलनिगम माताटीला में काम शुरू नहीं कर पा रहा है, जिससे पानी की आपूर्ति के लिए बनाया जाने वाला सीपी टैंक नहीं बन पा रहा है। मशीनें चलाने के लिए पावर हाउस नहीं बन पा रहा है और कर्मचारियों के आवास शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
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बता दें कि जल्द ही विधानसभा चुनाव आचार संहिता लगने वाली है। इस कारण प्रशासनिक कार्य ठप हो जाएंगे और चुनावों में करीब तीन महीने का समय लगेगा। इसके बाद आने वाली सरकार नए सिरे से सभी कार्यों की मानीटरिंग करेगी, जिससे पेयजल महायोजना में और देरी होने की संभावना है।
करीब एक साल से बराबर लखनऊ में पैरवी कर रहे हैं, लेकिन अब तक एमओयू साइन नहीं हो पाया है। पूरा प्रयास है कि जल्द से जल्द एमओयू साइन हो जाए।
- मो फरीद, अधिशासी अभियंता
सिंचाई विभाग
एमओयू साइन होने के बाद ही माताटीला में काम शुरू हो पाएगा। अभी सीपी टैंक और पावर हाउस का निर्माण नहीं हो पासा है। प्रयास किया जा रहा है कि समय पर काम पूरा हो जाए।
- रोहित चौरसिया, अधिशासी अभियंता अतिरिक्त निर्माण इकाई।