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महिला पालीटेक्निक में छात्राओं का बवाल
ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2015 02:12 AM IST
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झांसी। बृहस्पतिवार को राजकीय महिला पालीटेक्निक में जमकर बवाल हुआ। कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं से खिन्न छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार कर नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान जूनियर व सीनियर छात्राओं के बीच भी विवाद की स्थिति पैदा हो गई, जिसे मौके पर पहुंची पुलिस ने संभाला। कालेज में चार-पांच घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। बाद में संयुक्त निदेशक के आश्वासन के बाद छात्राएं मानीं।
आमतौर पर शांत रहने वाली राजकीय पालीटेक्निक की छात्राएं बृहस्पतिवार को खासी आक्रोशित नजर आईं। प्रथम व द्वितीय वर्ष की छात्राओं का आरोप था कि कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो रही है। बदइंतजामी का आलम यह है कि प्रयोगशाला तक नहीं खुलती हैं, जिससे उनके प्रैक्टिकल नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा हॉस्टल का भी बुरा हाल है। शौचालयों की नियमित रूप से सफाई नहीं होने से गंदगी व्याप्त है।
छात्राओं का कहना था कि वह कॉलेज प्रशासन को कई बार समस्याओं से अवगत करा चुकी हैं, लेकिन सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठा पा रहे हैं। इससे पठन-पाठन कार्य बुरी तरह से प्रभावित बना हुआ है, जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। गुस्साई छात्राएं नारेबाजी करते हुए कक्षाओं से बाहर निकल आईं। कालेज परिसर में नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गईं। इसी दरम्यान तृतीय वर्ष की कुछ छात्राएं भी वहां पहुंच गईं।
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वे जूनियर छात्राओं द्वारा किए जा रहे हंगामे के विरोध में उतर आईं, जिससे उनके बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई। हंगामे के बीच एक छात्रा बेहोश भी हो गई, जिससे कालेज में हड़कंप मच गया। साथी छात्राओं ने बेहोश छात्रा को पानी पिलाकर किसी तरह होश ेमें लाया।
बवाल बढ़ते देख इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्राओं को शांत कराया। सूचना पाकर संयुक्त निदेशक प्राविधिक शिक्षा डीएम सिंह भी मौके पर पहुंच गए। छात्राओं ने उन्हें कॉलेज की अव्यवस्थाओं के बारे में बताया। संयुक्त निदेशक उन्हें प्रभावी कदम उठाए जाने का भरोसा दिया। तब कहीं जाकर छात्राओं का गुस्सा शांत हुआ।
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आमतौर पर शांत रहने वाली राजकीय पालीटेक्निक की छात्राएं बृहस्पतिवार को खासी आक्रोशित नजर आईं। प्रथम व द्वितीय वर्ष की छात्राओं का आरोप था कि कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो रही है। बदइंतजामी का आलम यह है कि प्रयोगशाला तक नहीं खुलती हैं, जिससे उनके प्रैक्टिकल नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा हॉस्टल का भी बुरा हाल है। शौचालयों की नियमित रूप से सफाई नहीं होने से गंदगी व्याप्त है।
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छात्राओं का कहना था कि वह कॉलेज प्रशासन को कई बार समस्याओं से अवगत करा चुकी हैं, लेकिन सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठा पा रहे हैं। इससे पठन-पाठन कार्य बुरी तरह से प्रभावित बना हुआ है, जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। गुस्साई छात्राएं नारेबाजी करते हुए कक्षाओं से बाहर निकल आईं। कालेज परिसर में नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गईं। इसी दरम्यान तृतीय वर्ष की कुछ छात्राएं भी वहां पहुंच गईं।
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वे जूनियर छात्राओं द्वारा किए जा रहे हंगामे के विरोध में उतर आईं, जिससे उनके बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई। हंगामे के बीच एक छात्रा बेहोश भी हो गई, जिससे कालेज में हड़कंप मच गया। साथी छात्राओं ने बेहोश छात्रा को पानी पिलाकर किसी तरह होश ेमें लाया।
बवाल बढ़ते देख इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्राओं को शांत कराया। सूचना पाकर संयुक्त निदेशक प्राविधिक शिक्षा डीएम सिंह भी मौके पर पहुंच गए। छात्राओं ने उन्हें कॉलेज की अव्यवस्थाओं के बारे में बताया। संयुक्त निदेशक उन्हें प्रभावी कदम उठाए जाने का भरोसा दिया। तब कहीं जाकर छात्राओं का गुस्सा शांत हुआ।