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Jhansi News: नाबालिग छात्रा को पीटने पर पिता समेत पुत्रों को छह माह की परिवीक्षा पर
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
झांसी। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने नाबालिग के साथ छेड़खानी एवं पिटाई के एक मामले में छेड़खानी का साक्ष्य न मिलने पर पिता समेत उसके दो पुत्रों को राहत देते हुए तीनों को छह-छह माह की परिवीक्षा पर रहने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 15 अप्रैल 2017 को मऊरानीपुर थाना क्षेत्र निवासी नाबालिग छात्रा के स्कूल जाते समय गजराज उर्फ गज्जू ने अपने पुत्र सुनील, बृजेंद्र एवं अनिल के साथ मिलकर उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर छात्रा को मिलकर बुरी तरह पीटा। चारों के खिलाफ मऊरानीपुर थाने में छेड़छाड़ एवं मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। विवेचना में छेड़छाड़ के साक्ष्य नहीं मिले। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने रंजिशन फंसाए जाने का तर्क पेश किया। जबकि विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा ने अपनी दलील में कहा कि छात्रा को बुरी तरह से पीटा गया। इस आधार पर विशेष न्यायाधीश ने पिता गजराज समेत उसके पुत्र सुनील और बृजेंद्र को छह-छह माह की परिवीक्षा पर रहने का आदेश दिया जबकि अनिल की मौत हो जाने से उससे पहले से ही केस से अलग कर दिया गया था। उनको व्यक्तिगत रूप से 20-20 हजार रुपये का बंध पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया। परिवीक्षा अवधि में किसी तरह के अपराध में शामिल न होने की शर्त रहेगी।
इनसेट
यह होती है परिवीक्षा
कोर्ट की भाषा में परिवीक्षा का मतलब होता है-किसी आरोपी या दोषी व्यक्ति को सजा सुनाने के बाद जेल भेजने के बजाय कुछ शर्तों के साथ निगरानी में रहने का मौका देना। अगर अदालत को लगता है कि अपराध बहुत गंभीर नहीं है। आरोपी का पिछला रिकॉर्ड साफ है। उसे सुधार का मौका दिया जा सकता है, तो कोर्ट उसे तुरंत जेल न भेजकर परिवीक्षा पर छोड़ सकता है। इस दौरान व्यक्ति को अच्छा आचरण, दोबारा अपराध न करना, समय पर परिवीक्षा अधिकारी के सामने हाजिर होना जैसी शर्त होती है।
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झांसी। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी की अदालत ने नाबालिग के साथ छेड़खानी एवं पिटाई के एक मामले में छेड़खानी का साक्ष्य न मिलने पर पिता समेत उसके दो पुत्रों को राहत देते हुए तीनों को छह-छह माह की परिवीक्षा पर रहने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 15 अप्रैल 2017 को मऊरानीपुर थाना क्षेत्र निवासी नाबालिग छात्रा के स्कूल जाते समय गजराज उर्फ गज्जू ने अपने पुत्र सुनील, बृजेंद्र एवं अनिल के साथ मिलकर उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर छात्रा को मिलकर बुरी तरह पीटा। चारों के खिलाफ मऊरानीपुर थाने में छेड़छाड़ एवं मारपीट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। विवेचना में छेड़छाड़ के साक्ष्य नहीं मिले। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने रंजिशन फंसाए जाने का तर्क पेश किया। जबकि विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा ने अपनी दलील में कहा कि छात्रा को बुरी तरह से पीटा गया। इस आधार पर विशेष न्यायाधीश ने पिता गजराज समेत उसके पुत्र सुनील और बृजेंद्र को छह-छह माह की परिवीक्षा पर रहने का आदेश दिया जबकि अनिल की मौत हो जाने से उससे पहले से ही केस से अलग कर दिया गया था। उनको व्यक्तिगत रूप से 20-20 हजार रुपये का बंध पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया। परिवीक्षा अवधि में किसी तरह के अपराध में शामिल न होने की शर्त रहेगी।
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यह होती है परिवीक्षा
कोर्ट की भाषा में परिवीक्षा का मतलब होता है-किसी आरोपी या दोषी व्यक्ति को सजा सुनाने के बाद जेल भेजने के बजाय कुछ शर्तों के साथ निगरानी में रहने का मौका देना। अगर अदालत को लगता है कि अपराध बहुत गंभीर नहीं है। आरोपी का पिछला रिकॉर्ड साफ है। उसे सुधार का मौका दिया जा सकता है, तो कोर्ट उसे तुरंत जेल न भेजकर परिवीक्षा पर छोड़ सकता है। इस दौरान व्यक्ति को अच्छा आचरण, दोबारा अपराध न करना, समय पर परिवीक्षा अधिकारी के सामने हाजिर होना जैसी शर्त होती है।
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