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झांसी में पांच साल में नहीं बढ़ा एक भी किसान, प्रवासी भी वापस शहरों को लौटे
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झांसी। बुंदेलखंड में पिछले कई वर्षों से किसानों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। सरकारी आकड़ें यही बताते हैं। झांसी में पांच साल पहले 295520 किसान पंजीकृत थे, किसानों की यह संख्या आज भी जस की तस है। कोविड के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी गांव लौटे। शुरूआत में उन्होंने खेती की कोशिश की लेकिन, फायदे का सौदा न होने से अधिकांश प्रवासी अपने कामकाजी ठिकानों की ओर लौट चुके हैं।
सूखा ग्रस्त इलाका होने के नाते सरकार बुंदेलखंड में खेती को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं चला रही लेकिन, हकीकत में खेती की ओर रुझान बढ़ता नजर नहीं आता। सरकारी आकड़ें बताते हैं वर्ष 2015 में झांसी में कुल 295520 किसान पंजीकृत थे। दिसंबर माह में आई पीएम सम्मान निधि में भी 295520 किसानों को ही शामिल किया गया है। इस तरह यह संख्या जस की तस है जबकि कोविड-19 के दौरान करीब 30 हजार प्रवासी अपने गांव वापस लौटे। वापस लौटने पर प्रवासियों ने खेती में दिलचस्पी दिखाई थी। चिरगांव, मऊरानीपुर एवं बामौर ब्लॉक में खरीफ की फसल की बुवाई के दौरान बंटाई पर भी प्रवासियों ने खेत लिए। बंटाई के बढ़े चलन के चलते उस दौरान दाम भी अचानक से बढ़ गए लेकिन, खरीफ फसल की लागत भी न निकल पाने से प्रवासियों का मोहभंग हो गया। रबी की बुवाई में इन प्रवासियों ने अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई। अधिकांश प्रवासी अब वापस लौट चुके हैं। वहीं, जिनके पास पम्परागत खेती है, वह भी सिंचाई की सुविधा न मिलने से अपने खेत को खाली छोड़ देने को मजबूर होते हैं।
झांसी जनपद का कुल क्षेत्रफल- 5.013 लाख हेक्टेयर
खेती योग्य भूमि- 3.34 लाख हे.
खरीफ की बुवाई- 2.12 लाख हे.
रबी की बुवाई- 3.49 लाख हे.
सिंचित क्षेत्रफल- 3.09 लाख हे.
कुल बुवाई का क्षेत्रफल- 5.92 लाख हे.
कुल किसानों की संख्या- 295520
सिंचाई की सुविधा का न होना एक बड़ी वजह
जनपद में खेती-किसानी की ओर रूझान न होने की एक बड़ी वजह यहां सिंचाई की सहुलियत का न होना है। जनपद में कुल करीब 5 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य बताई जाती है लेकिन, सिंचाई का साधन सिर्फ 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही है। यहां भी करीब पचास हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाता, इस वजह से खेती प्रभावित होती है। सिंचाई की सहुलियत न होने की वजह से ही यहां तिल, दलहन जैसी फसलों की बुवाई अधिक होती है।
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किसानों को मदद पहुंचाने के लिए केसीसी, बीज आदि की व्यवस्था की जाती है। कृषि बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक हुआ है।
कमलेश सिंह, प्रभारी उपनिदेशक, कृषि
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सूखा ग्रस्त इलाका होने के नाते सरकार बुंदेलखंड में खेती को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं चला रही लेकिन, हकीकत में खेती की ओर रुझान बढ़ता नजर नहीं आता। सरकारी आकड़ें बताते हैं वर्ष 2015 में झांसी में कुल 295520 किसान पंजीकृत थे। दिसंबर माह में आई पीएम सम्मान निधि में भी 295520 किसानों को ही शामिल किया गया है। इस तरह यह संख्या जस की तस है जबकि कोविड-19 के दौरान करीब 30 हजार प्रवासी अपने गांव वापस लौटे। वापस लौटने पर प्रवासियों ने खेती में दिलचस्पी दिखाई थी। चिरगांव, मऊरानीपुर एवं बामौर ब्लॉक में खरीफ की फसल की बुवाई के दौरान बंटाई पर भी प्रवासियों ने खेत लिए। बंटाई के बढ़े चलन के चलते उस दौरान दाम भी अचानक से बढ़ गए लेकिन, खरीफ फसल की लागत भी न निकल पाने से प्रवासियों का मोहभंग हो गया। रबी की बुवाई में इन प्रवासियों ने अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई। अधिकांश प्रवासी अब वापस लौट चुके हैं। वहीं, जिनके पास पम्परागत खेती है, वह भी सिंचाई की सुविधा न मिलने से अपने खेत को खाली छोड़ देने को मजबूर होते हैं।
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झांसी जनपद का कुल क्षेत्रफल- 5.013 लाख हेक्टेयर
खेती योग्य भूमि- 3.34 लाख हे.
खरीफ की बुवाई- 2.12 लाख हे.
रबी की बुवाई- 3.49 लाख हे.
सिंचित क्षेत्रफल- 3.09 लाख हे.
कुल बुवाई का क्षेत्रफल- 5.92 लाख हे.
कुल किसानों की संख्या- 295520
सिंचाई की सुविधा का न होना एक बड़ी वजह
जनपद में खेती-किसानी की ओर रूझान न होने की एक बड़ी वजह यहां सिंचाई की सहुलियत का न होना है। जनपद में कुल करीब 5 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य बताई जाती है लेकिन, सिंचाई का साधन सिर्फ 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही है। यहां भी करीब पचास हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाता, इस वजह से खेती प्रभावित होती है। सिंचाई की सहुलियत न होने की वजह से ही यहां तिल, दलहन जैसी फसलों की बुवाई अधिक होती है।
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किसानों को मदद पहुंचाने के लिए केसीसी, बीज आदि की व्यवस्था की जाती है। कृषि बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक हुआ है।
कमलेश सिंह, प्रभारी उपनिदेशक, कृषि