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पीसीएफ की लापरवाही से किसानों के फंसे तेरह लाख
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झांसी। मंडल में हुई गेहूं खरीद में एक बड़ी गड़बड़ी प्रकाश में आई है। पीसीएफ के ललितपुर केंद्र से खरीदा गया 67.80 मीट्रिक टन गेहूं का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज ही नहीं हुआ। इस वजह से 17 किसानों के 13.05 लाख रुपये का भुगतान अब अधर में फंस गया। मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग के अफसरों में खलबली मची है। इन किसानों का भुगतान तभी हो पाएगा, जब पोर्टल दुबारा खुले हालांकि इसके दुबारा खुलने की उम्मीद बेहद कम बताई जा रही। वहीं, लाखों रुपये फंस जाने से किसान भी परेशान हैं।
गेहूं खरीद जुलाई महीने में खत्म हो गई। खरीद खत्म होने के साथ ही इसका पूरा ब्योरा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना होता है। यूपी सहकारी संघ की ओर से साधन सहकारी समिति, पिपरई, बिरधा में भी खरीद हुई थी। सभी केंद्रों में 31 जुलाई को खरीद खत्म होने के साथ ही पूरा ब्योरा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए था लेकिन, पीसीएफ अफसरों की लापरवाही से 17 किसानों के ब्योरे 31 जुलाई के बजाए 1 अगस्त को अपलोड किए गए। समय सीमा खत्म होने के बाद इन ब्योरों के अपलोड होने से इन किसानों का भुगतान फंस गया।
पीसीएफ अधिकारियों के मुताबिक 17 किसानों से कुल 67.80 मीट्रिक टन की मात्रा अपलोड नहीं हुई। इस वजह से किसानों का कुल 1305150 रुपया का भुगतान नहीं हो सका। जिन किसानों का भुगतान नहीं हो रहा उनमें मादौन के अरविंद मिश्रा, विपिन कुमार, वीर सिंह, अवध नारायण, विमला, शियाबाई, नत्थू सिंह, रामदयाल, अमोल सिंह, अशोक, रहमान खान, राजेश कुमार, मुन्नी लाल, मान सिंह, इमरत, सुरेश कुमार यादव एवं बलवीर सिंह शामिल हैं। वहीं, इस मामले के प्रकाश में आते ही अफसरों के बीच खलबली मच गई। ललितपुर पीसीएफ के जिला प्रबंधक ने फीडिंग में विलंब की वजह खराब नेटवर्क को बताते हुए संभागीय खाद्य नियंत्रक से पोर्टल खुलवाने को लेकर पत्र लिखा है। आरएफसी नरेंद्र कुमार का कहना है कि इस बारे में पीसीएफ की ओर से पत्र मिला है। पोर्टल कब तक खुलेगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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पीसीएफ की ओर से किसानों के भुगतान में भी काफी टालमटोल किया जा रहा। झांसी मंडल में ही किसानों का दस करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है जबकि सरकार ने गेहूं खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान कर दिए जाने का भरोसा दिलाया था।
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गेहूं खरीद जुलाई महीने में खत्म हो गई। खरीद खत्म होने के साथ ही इसका पूरा ब्योरा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना होता है। यूपी सहकारी संघ की ओर से साधन सहकारी समिति, पिपरई, बिरधा में भी खरीद हुई थी। सभी केंद्रों में 31 जुलाई को खरीद खत्म होने के साथ ही पूरा ब्योरा केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए था लेकिन, पीसीएफ अफसरों की लापरवाही से 17 किसानों के ब्योरे 31 जुलाई के बजाए 1 अगस्त को अपलोड किए गए। समय सीमा खत्म होने के बाद इन ब्योरों के अपलोड होने से इन किसानों का भुगतान फंस गया।
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पीसीएफ अधिकारियों के मुताबिक 17 किसानों से कुल 67.80 मीट्रिक टन की मात्रा अपलोड नहीं हुई। इस वजह से किसानों का कुल 1305150 रुपया का भुगतान नहीं हो सका। जिन किसानों का भुगतान नहीं हो रहा उनमें मादौन के अरविंद मिश्रा, विपिन कुमार, वीर सिंह, अवध नारायण, विमला, शियाबाई, नत्थू सिंह, रामदयाल, अमोल सिंह, अशोक, रहमान खान, राजेश कुमार, मुन्नी लाल, मान सिंह, इमरत, सुरेश कुमार यादव एवं बलवीर सिंह शामिल हैं। वहीं, इस मामले के प्रकाश में आते ही अफसरों के बीच खलबली मच गई। ललितपुर पीसीएफ के जिला प्रबंधक ने फीडिंग में विलंब की वजह खराब नेटवर्क को बताते हुए संभागीय खाद्य नियंत्रक से पोर्टल खुलवाने को लेकर पत्र लिखा है। आरएफसी नरेंद्र कुमार का कहना है कि इस बारे में पीसीएफ की ओर से पत्र मिला है। पोर्टल कब तक खुलेगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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पीसीएफ की ओर से किसानों के भुगतान में भी काफी टालमटोल किया जा रहा। झांसी मंडल में ही किसानों का दस करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है जबकि सरकार ने गेहूं खरीद के 72 घंटे के भीतर भुगतान कर दिए जाने का भरोसा दिलाया था।