{"_id":"6331fc79ef9cac1e517bc2c3","slug":"enleggal-khanan-jhansi-news-jhs2296365184","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूं ही खफा नहीं योगी जी: नेता और अफसरों के गठजोड़ से हो रहा अवैध खनन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूं ही खफा नहीं योगी जी: नेता और अफसरों के गठजोड़ से हो रहा अवैध खनन
विज्ञापन
झांसी। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की ओर से की गई सख्ती नेता और अफसरों के गठजोड़ के आगे धराशायी हो गई। स्थिति यह है कि खनिज विभाग ने भले ही 25 पट्टे जारी कर रखे हैं, लेकिन यहां घाट-घाट से बालू निकाली जा रही है। इन हालातों पर मुख्यमंत्री ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग में अधिकारियों को फटकार लगाते हुए खनन माफियाओं की संपत्ति जब्त कर 10 दिन में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही खनन कार्य को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने की कोशिशें शुरू कर दीं गईं थीं। इसी के तहत जनपद में 11 खनन माफिया चिह्नित किए गए थे। साथ ही खनिज पट्टों की नीलामी की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। लेकिन, सरकार की यह सख्ती भी इस अवैध कारोबार के सामने ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। अवैध कारोबार करने वालों के चेहरे ही बदले, परंतु अवैध खनन बदस्तूर रूप से जारी रहा। सरकारी तंत्र न तो चिह्नित माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई कर पाया और न ही अवैध खनन रोक पाया। यहां तक कि खनन माफियाओं के नाम सार्वजनिक तक नहीं किए गए। इसी का नतीजा है कि खनिज विभाग द्वारा जनपद में बालू खनन के 25 पट्टे जारी किए गए हैं, परंतु बालू 40 से अधिक स्थानों से निकाली जाती है। बारिश के सीजन में एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए बालू खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था, परंतु इस दरम्यान में बेधड़क बालू निकाली जाती रही।
153 दिन में 274 मामले पकड़े
झांसी। जिले में बेतहाशा रूप से होने वाले अवैध खनन का अंदाजा खनिज विभाग के आंकड़ों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। विभाग द्वारा अप्रैल से लेकर सितंबर माह (153 दिन) अवैध खनन व परिवहन के 274 मामले पकड़े जा चुके हैं। इन मामलों में 96 लाख 19 हजार रुपये की रॉयल्टी जमा कराई गई, बावजूद अवैध कारोबारियों की सेहत पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। उनका कारोबार बदस्तूर जारी है।
विज्ञापन
सत्ता के साथ बदल जाते हैं चेहरे
झांसी। प्रदेश की सत्ता बदलने पर खनन माफियाओं के चेहरे भर बदलते है, काम बदस्तूर जारी रहता है। एक प्रकार से सत्ताधीशों को खनिज संपदा उपहार में मिलती है, जो उनकी बेतहाशा कमाई का जरिया बन जाती है। बालू खनन का पट्टा लेने वाली बाहरी कंपनियां भी अपने कारोबार में स्थानीय प्रभावशाली लोगों को जोड़ लेती हैं। उनकी उनकी रसूख और सांठगांठ के चलते यह कारोबार बदस्तूर रूप से जारी रहता है।
बालू का स्टॉक नहीं होता खत्म
झांसी। एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए बालू खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इस दौरान पट्टाधारकों को स्टॉक में रखी बालू ही बेचने की ही इजाजत होती है। इसमें भी बड़ा खेल होता है। स्टॉक बालू का पूरा रिकॉर्ड कारोबारियों को विभाग को देना होता है। जितनी बालू का स्टॉक रिकार्ड में दर्शाया जाता है, उतनी हमेशा सुरक्षित मिलती है। जानकारों के अनुसार दिन के उजाले में स्टॉक में रखी बालू बेची जाती है, जबकि रात में नदी से बालू निकालकर स्टॉक में रख दी जाती है।
सरकार की भी मोटी कमाई का है जरिया
झांसी। बालू का खनन सरकार की मोटी कमाई का भी जरिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रदेश सरकार को जनपद से एक अरब 99 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ था। इस बार सवा दो अरब रुपये का राजस्व इकट्ठा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
अवैध खनन के खिलाफ सख्ती जारी है। जांच कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध खनन पकड़े जाने पर रॉयल्टी भी वसूल की जा रही है। सूचना मिलने पर विभागीय टीम तत्काल कार्रवाई अमल में लाती है।
- बीपी यादव, जिला खान अधिकारी
विज्ञापन
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही खनन कार्य को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने की कोशिशें शुरू कर दीं गईं थीं। इसी के तहत जनपद में 11 खनन माफिया चिह्नित किए गए थे। साथ ही खनिज पट्टों की नीलामी की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। लेकिन, सरकार की यह सख्ती भी इस अवैध कारोबार के सामने ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। अवैध कारोबार करने वालों के चेहरे ही बदले, परंतु अवैध खनन बदस्तूर रूप से जारी रहा। सरकारी तंत्र न तो चिह्नित माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई कर पाया और न ही अवैध खनन रोक पाया। यहां तक कि खनन माफियाओं के नाम सार्वजनिक तक नहीं किए गए। इसी का नतीजा है कि खनिज विभाग द्वारा जनपद में बालू खनन के 25 पट्टे जारी किए गए हैं, परंतु बालू 40 से अधिक स्थानों से निकाली जाती है। बारिश के सीजन में एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए बालू खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था, परंतु इस दरम्यान में बेधड़क बालू निकाली जाती रही।
विज्ञापन
153 दिन में 274 मामले पकड़े
झांसी। जिले में बेतहाशा रूप से होने वाले अवैध खनन का अंदाजा खनिज विभाग के आंकड़ों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। विभाग द्वारा अप्रैल से लेकर सितंबर माह (153 दिन) अवैध खनन व परिवहन के 274 मामले पकड़े जा चुके हैं। इन मामलों में 96 लाख 19 हजार रुपये की रॉयल्टी जमा कराई गई, बावजूद अवैध कारोबारियों की सेहत पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। उनका कारोबार बदस्तूर जारी है।
विज्ञापन
सत्ता के साथ बदल जाते हैं चेहरे
झांसी। प्रदेश की सत्ता बदलने पर खनन माफियाओं के चेहरे भर बदलते है, काम बदस्तूर जारी रहता है। एक प्रकार से सत्ताधीशों को खनिज संपदा उपहार में मिलती है, जो उनकी बेतहाशा कमाई का जरिया बन जाती है। बालू खनन का पट्टा लेने वाली बाहरी कंपनियां भी अपने कारोबार में स्थानीय प्रभावशाली लोगों को जोड़ लेती हैं। उनकी उनकी रसूख और सांठगांठ के चलते यह कारोबार बदस्तूर रूप से जारी रहता है।
बालू का स्टॉक नहीं होता खत्म
झांसी। एक जुलाई से 30 सितंबर तक के लिए बालू खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इस दौरान पट्टाधारकों को स्टॉक में रखी बालू ही बेचने की ही इजाजत होती है। इसमें भी बड़ा खेल होता है। स्टॉक बालू का पूरा रिकॉर्ड कारोबारियों को विभाग को देना होता है। जितनी बालू का स्टॉक रिकार्ड में दर्शाया जाता है, उतनी हमेशा सुरक्षित मिलती है। जानकारों के अनुसार दिन के उजाले में स्टॉक में रखी बालू बेची जाती है, जबकि रात में नदी से बालू निकालकर स्टॉक में रख दी जाती है।
सरकार की भी मोटी कमाई का है जरिया
झांसी। बालू का खनन सरकार की मोटी कमाई का भी जरिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रदेश सरकार को जनपद से एक अरब 99 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ था। इस बार सवा दो अरब रुपये का राजस्व इकट्ठा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
अवैध खनन के खिलाफ सख्ती जारी है। जांच कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध खनन पकड़े जाने पर रॉयल्टी भी वसूल की जा रही है। सूचना मिलने पर विभागीय टीम तत्काल कार्रवाई अमल में लाती है।
- बीपी यादव, जिला खान अधिकारी