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कागज की नाव के समान है अहंकार: प्रणम्य सागर
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जैन तीर्थ करगुवां जी में मुनि श्री ने दिए प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी ने कहा कि अहंकार कागज की नाव के समान है, जो एक दिन अवश्य ले डूबेगी। मनुष्य को अहंकार के वशीभूत होकर सत्य को नहीं भूलना चाहिए।
प्राचीन तीर्थ अतिशय क्षेत्र करगुवां जी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि अहंकार सदैव विनाश का कारण बनता है। अभिमान मनुष्य के भीतर नीति और प्रीति को खा जाता है। मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं को सामाजिक सरोकारों के लिए आगे आना चाहिए। सर्वजन कल्याण ही धर्म का दूसरा स्वरूप है। धर्मसभा में पंचायत महामंत्री कमल जैन, शिरोमणि जैन, राजेंद्र जैन, रविंद्र जैन, अशोक जैनिथ ने किया। इस दौरान निलय जैन, अशोक जैन लाला, अनूप जैन, ललित जैन, इंजी. हुकुम चंद्र जैन, देवव्रत जैन, विजयवर्धन जैन आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी ने कहा कि अहंकार कागज की नाव के समान है, जो एक दिन अवश्य ले डूबेगी। मनुष्य को अहंकार के वशीभूत होकर सत्य को नहीं भूलना चाहिए।
प्राचीन तीर्थ अतिशय क्षेत्र करगुवां जी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा कि अहंकार सदैव विनाश का कारण बनता है। अभिमान मनुष्य के भीतर नीति और प्रीति को खा जाता है। मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं को सामाजिक सरोकारों के लिए आगे आना चाहिए। सर्वजन कल्याण ही धर्म का दूसरा स्वरूप है। धर्मसभा में पंचायत महामंत्री कमल जैन, शिरोमणि जैन, राजेंद्र जैन, रविंद्र जैन, अशोक जैनिथ ने किया। इस दौरान निलय जैन, अशोक जैन लाला, अनूप जैन, ललित जैन, इंजी. हुकुम चंद्र जैन, देवव्रत जैन, विजयवर्धन जैन आदि मौजूद रहे।
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