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डॉ. अंबेडकर का साहित्य पढ़ें युवा: वीसी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Dec 2016 01:05 AM IST
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- फोटो : demo
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डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। युवाओं को बाबा साहब द्वारा रचित साहित्य पढ़ना चाहिए। यह बात बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में डॉ. अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर हुए कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था करके बाबा साहब ने देश को हिंसा के रास्ते पर जाने से रोका था। कुलानुशासक प्रो. एमएल मौर्य ने कहा कि हमें समता मूलक समाज की स्थापना के प्रति प्रयासरत रहना चाहिए। वित्त अधिकारी धर्मपाल ने कहा कि भारत ही नहीं विश्व के अन्य देशों में भी गैर बराबरी का माहौल रहा है। इस दौरान चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रतियोगिता हुई। चित्रकला में पुष्पेंद्र कुमार ने प्रथम, राजकुमार ने द्वितीय और अजय सिंह ने तृतीय स्थान हासिल किया। मूर्तिकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कुलदीप सिंह गौतम, द्वितीय स्थान नरेंद्र प्रजापति और तृतीय स्थान पुष्पेंद्र कुमार को मिला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुनीता रहीं। संचालन डॉ. पुष्पा गौतम ने किया।
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उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में आरक्षण की व्यवस्था करके बाबा साहब ने देश को हिंसा के रास्ते पर जाने से रोका था। कुलानुशासक प्रो. एमएल मौर्य ने कहा कि हमें समता मूलक समाज की स्थापना के प्रति प्रयासरत रहना चाहिए। वित्त अधिकारी धर्मपाल ने कहा कि भारत ही नहीं विश्व के अन्य देशों में भी गैर बराबरी का माहौल रहा है। इस दौरान चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रतियोगिता हुई। चित्रकला में पुष्पेंद्र कुमार ने प्रथम, राजकुमार ने द्वितीय और अजय सिंह ने तृतीय स्थान हासिल किया। मूर्तिकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कुलदीप सिंह गौतम, द्वितीय स्थान नरेंद्र प्रजापति और तृतीय स्थान पुष्पेंद्र कुमार को मिला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुनीता रहीं। संचालन डॉ. पुष्पा गौतम ने किया।
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