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कोरोना काल में झांसी में बिकी साढ़े तीन करोड़ की डोलो-650
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झांसी। कोरोना काल में झांसी में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की डोलो-650 की बिक्री हुई है। डॉक्टरों ने तो ये दवा खूब लिखी है। साथ ही आम लोगों ने भी बुखार के दौरान ये दवा काफी खाई। अभी भी हर महीने लगभग पांच लाख की डोलो-650 दवा बिक जाती है।
डोलो-650 में पैरासिटामोल सॉल्ट होता है। ये दवा बुखार के मरीजों को दी जाती है। कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों को भी कई-कई दिनों तक बुखार रहा। ऐसे में कोविड रोगियों को ये दवा काफी दी गई। यहां तक कि कई मेडिकल स्टोरों पर जो कोविड किट रखी थी, उसमें भी डोलो-650 दवा होती थी। झांसी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी ने बताया कि जिले में डोलो-650 की बिक्री करने वाले 14 स्टॉकिस्ट हैं। कोरोना काल में इस दवा की बिक्री में दस गुना से भी ज्यादा का उछाल आ गया था। जब कोविड पीक पर पहुंचा, तो लगभग 50 लाख रुपये की दवा हर महीने बिकी। कोरोना काल के इन दो वर्षों में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की डोलो-650 की बिक्री हुई है। अभी भी हर महीने लगभग पांच लाख रुपये की दवा बिक जाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर तो ये दवा खूब लिखते ही हैं। बुखार पर आम जन खुद भी ये दवा खरीदकर ले जाते हैं।
2.26 रुपये की होती है एक गोली
केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि डोलो-650 दवा का एक पत्ता 15 गोलियों का होता है, जिसकी कीमत 34 रुपये है। ऐसे में एक दवा का मूल्य 2.26 रुपये होता है।
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डॉक्टरों को एक हजार करोड़ के तोहफे देने का आरोप
झांसी। डोलो-650 को लेकर फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने कहा है कि बुखार से निपटने के लिए आम उपयोग हो रही डोलो-650 टैबलेट लोकप्रिय करने के लिए दवा कंपनी ने भारत में डॉक्टरों को करीब एक हजार करोड़ रुपये के तोहफे दिए हैं। इस पर पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को दस दिन में सरकार का पक्ष रखने को कहा है।
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डोलो-650 में पैरासिटामोल सॉल्ट होता है। ये दवा बुखार के मरीजों को दी जाती है। कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों को भी कई-कई दिनों तक बुखार रहा। ऐसे में कोविड रोगियों को ये दवा काफी दी गई। यहां तक कि कई मेडिकल स्टोरों पर जो कोविड किट रखी थी, उसमें भी डोलो-650 दवा होती थी। झांसी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव नितिन मोदी ने बताया कि जिले में डोलो-650 की बिक्री करने वाले 14 स्टॉकिस्ट हैं। कोरोना काल में इस दवा की बिक्री में दस गुना से भी ज्यादा का उछाल आ गया था। जब कोविड पीक पर पहुंचा, तो लगभग 50 लाख रुपये की दवा हर महीने बिकी। कोरोना काल के इन दो वर्षों में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की डोलो-650 की बिक्री हुई है। अभी भी हर महीने लगभग पांच लाख रुपये की दवा बिक जाती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर तो ये दवा खूब लिखते ही हैं। बुखार पर आम जन खुद भी ये दवा खरीदकर ले जाते हैं।
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2.26 रुपये की होती है एक गोली
केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि डोलो-650 दवा का एक पत्ता 15 गोलियों का होता है, जिसकी कीमत 34 रुपये है। ऐसे में एक दवा का मूल्य 2.26 रुपये होता है।
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डॉक्टरों को एक हजार करोड़ के तोहफे देने का आरोप
झांसी। डोलो-650 को लेकर फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने कहा है कि बुखार से निपटने के लिए आम उपयोग हो रही डोलो-650 टैबलेट लोकप्रिय करने के लिए दवा कंपनी ने भारत में डॉक्टरों को करीब एक हजार करोड़ रुपये के तोहफे दिए हैं। इस पर पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को दस दिन में सरकार का पक्ष रखने को कहा है।