विज्ञापन

हड़ताल पर रहे निजी अस्पतालों के डॉक्टर

अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 07 Jun 2017 01:18 AM IST
hospital, jhansi news
hospital, jhansi news - फोटो : demo
विज्ञापन
ख़बर सुनें
झांसी।
विज्ञापन
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर झांसी के निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल रही। इसके चलते पुराने मरीजों का तो इलाज जारी रखा गया लेकिन नए मरीज न तो भर्ती और न ही ओपीडी में देखे गए। इससे मरीजों को थोड़ी परेशानी तो हुई लेकिन उन्होंने जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में जाकर इलाज करवाया।
निजी नर्सिंग होम, क्लीनिकों पर होने वाली मारपीट, तोड़फोड़ के विरोध में आईएमए ने राष्ट्रव्यापी रैली, धरना प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। इसी के चलते मंगलवार को सुबह आठ से रात आठ बजे तक झांसी के सभी क्लीनिक, अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी और आकस्मिक सेवाएं बंद रहीं।

डॉक्टर अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिल्ली के राजघाट में होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए चले गए। इस कारण नए मरीजों को न तो ओपीडी में देखा गया और न ही भर्ती किया गया। हालांकि, पुराने मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखी गईं। इससे नए मरीजों को परेशानी हुई और वह सरकारी अस्पतालों जैसे जिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने चले गए। वहीं, कलेक्ट्रेट में डॉक्टरों ने मौन जुलूस निकालकर विभिन्न मांगों से संबोधित ज्ञापन अपर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। इस दौरान आईएमए सचिव डॉ. महेंद्र सिंह भुसारी, नर्सिंग होम एसोसिएशन सचिव निलय जैन, डॉ. प्रवीण जैन, डॉ. ओमशंकर चौरसिया, डॉ. पंकज सोनकिया, डॉ. नवल खुराना, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. अमित आदि मौजूद रहे।

सरकारी अस्पतालों में बढ़ी भीड़
प्राइवेट अस्पतालों की बंदी होने पर मरीजों का सहारा सरकारी अस्पताल बने। हालांकि, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में लाइनों में खड़े होकर मरीजों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ा लेकिन डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं लिखीं। जानकारी पर पता चला कि आम दिनों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में 15 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ गई।

ये हैं मांगें
- केंद्रीय स्तर से चिकित्सकों, चिकित्सा संस्थानों पर हिंसा व उपद्रव के खिलाफ कड़ा कानून बने।
- मेडिकल छात्रों पर नेशनल एग्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज किया जाए।
- डॉक्टरों व प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से हो।
- डॉक्टरों का पर्चा लिखने का स्वायत्तता अधिकार रहे।
- एलोपैथिक दवाओं का पर्चा लिखने का अधिकार सिर्फ एमबीबीएस एवं बीडीएस डॉक्टरों को रहे।
- हेल्थ सेक्टर का बजट एक से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत किया जाए, ताकि मरीजों को आसानी हो।
- झोला छाप डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाया जाए।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Jhansi

पति की हत्या कर शव पेड़ पर लटकाया

थाना रक्सा इलाके में रहने वाली एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की गला दबाकर हत्या कर दी। मामले को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को रस्सी के सहारे फंदा लगाकर पेड़ पर लटका दिया।

22 अक्टूबर 2018

विज्ञापन
Jhansi

आगजनी

20 अक्टूबर 2018

Related Videos

VIDEO: स्कूल में पढ़ाई की बजाए बच्चों से करवाया जा रहा ये काम

देश के प्रधानमंत्री ने लोगों से स्वच्छता अभियान से जुड़ने की बात कही। लेकिन झांसी के एक स्कूल में बच्चों से सफाई करवाने के नाम पर झाड़ू लगवाई जा रही है।

25 सितंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree