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दो कारतूस व एक तमंचे का चल रहा खेल
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झांसी। पुलिस का खेल भी निराला है। अधिकांश बदमाशों के पास से पुलिस को एक तमंचा व दो कारतूस ही मिलते हैं। इसी आरोप में बदमाशों का चालान किया जाता है। इसके बाद पुलिस इन बदमाशों से यह जानने का भी प्रयास नहीं करती कि यह तमंचा व कारतूस उन्हें कहां से मिले। पिछले कई सालों में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है जिसमें पुलिस यह पता लगा सकी हो कि बदमाशों ने ये कारतूस किससे और कैसे हासिल किए। यही कारण है कि कारतूसों को अवैध रूप से बेचने का खेल धड़ल्ले से जारी है।
जिले में बदमाशों की गिरफ्तारी के मामले हर दूसरे दिन सामने आते हैं। कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने शातिर बदमाशों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस एक तमंचा व दो कारतूस बरामद दिखाती है। बदमाश की प्रोफाइल के हिसाब से तमंचे बरामद होते हैं। हाईप्रोफाइल बदमाशों के पास से पिस्टल और रिवाल्वर मिल जाती हैं। जबकि, ज्यादातर के पास से पुलिस को 32 बोर के तमंचे ही बरामद होते हैं। अधिकांश मामलों में एक तमंचे के साथ दो कारतूस बरामद होते हैं। यदि गिरफ्तारी फर्द में बदमाश ने पुलिस पर गोली दागी है तो एक कारतूस और दूसरा खोखा शामिल होता है। कभीकभार तमंचों के बारे में तो पुलिस पता बताती है कि यह तमंचा बदमाश ने किससे खरीदा था, लेकिन कारतूस का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। लंबा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस कारतूस के एक भी सौदागरों को नहीं दबोच सकी।
खेल खेलती पुलिस, साथ देते तमंचा कारतूस
पूर्व में ऐसे मामले सामने आए हैं कि मुकदमे की एक धारा बढ़ाने के लिए तमंचा और कारतूस पुलिस बरामद दिखा देती थी। लेकिन, सख्ती बढ़ने और परीक्षण होने की वजह से पुलिस ने इस हथियार का गिरफ्तारी में इस्तेमाल कम कर दिया है। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं कि पुलिस ने अपने पास से तमंचा और कारतूस लगा दिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसा भी होता रहा है कि ज्यादा संख्या में कारतूस मिलने पर पुलिस उन्हें अपने पास रख लेती। जरूरत के अनुसार किसी बदमाश के पास से इन्हें बरामद दिखा देती।
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लाइसेंसी को देना होता है ब्योरा
जानकारों का कहना है कि अवैध असलहा रखने वालों को कारतूस की सप्लाई लाइसेंसी करते हैं। परिचित होने या फिर अधिक रुपए के लालच में कारतूस को बेच देते हैं। इसलिए लाइसेंस पर कारतूस खरीदने के दौरान खोखा दिखाने की प्रक्रिया शुरू की गई। खोखा दिखाने के साथ-साथ इस बात का सबूत भी देना होता है कि फायरिंग कब और क्यों हुई है। यह नियम लागू होने के बाद कारतूस की अवैध बिक्री में कमी आई है। लेकिन, अवैध असलहा रखने वाले कहीं न कहीं से कारतूसों का जुगाड़ कर लेते हैं।
तमंचे और कारतूस की बरामदगी पर जांच बैठाई जाती है। मुकदमे के विवेचक बताते हैं कि अभियुक्त को कहां से तमंचा और कारतूस मिला था। अभियुक्त के पास जितनी बरामदगी होती है, उसकी बाकायदा लिखा पढ़ी की जाती है।
राहुल मिठास, एएसपी
केस नंबर 1
24 जनवरी को नवाबाद पुलिस ने गल्ला मंडी क्षेत्र के एक घर में चोरी की नीयत से घुसे छतरपुर निवासी मुकेश कुशवाहा को पकड़ा था। आरोपी छतरपुर में हुई एक चोरी के मामले में भी वांछित चल रहा था। आरोपी के पास से से एक तमंचा व कारतूस भी मिले थे।
केस नंबर 2
25 जनवरी ट्रक चालक सोहनपाल की हत्या के मामले में बबीना पुलिस ने करैरा थाना क्षेत्र के डबरा गांव निवासी रामस्वरूप राजपूत उसका पुत्र पुरुषोत्तम राजपूत व रक्सा क्षेत्र के गांव बसाई निवासी भांजे दिनेश कुमार राजपूत को पकड़ा था। इनके पास से दो तमंचे व तीन कारतूस मिले थे।
केस नंबर 3
26 जनवरी को दो जिले के ईनामी बदमाश कुरैश नगर निवासी सद्दाम कुरैशी को भी पकड़ा। इसके पास से भी पुलिस ने तमंचा व दो कारतूस बरामद किए।
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जिले में बदमाशों की गिरफ्तारी के मामले हर दूसरे दिन सामने आते हैं। कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने शातिर बदमाशों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस एक तमंचा व दो कारतूस बरामद दिखाती है। बदमाश की प्रोफाइल के हिसाब से तमंचे बरामद होते हैं। हाईप्रोफाइल बदमाशों के पास से पिस्टल और रिवाल्वर मिल जाती हैं। जबकि, ज्यादातर के पास से पुलिस को 32 बोर के तमंचे ही बरामद होते हैं। अधिकांश मामलों में एक तमंचे के साथ दो कारतूस बरामद होते हैं। यदि गिरफ्तारी फर्द में बदमाश ने पुलिस पर गोली दागी है तो एक कारतूस और दूसरा खोखा शामिल होता है। कभीकभार तमंचों के बारे में तो पुलिस पता बताती है कि यह तमंचा बदमाश ने किससे खरीदा था, लेकिन कारतूस का कोई हिसाब-किताब नहीं होता। लंबा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस कारतूस के एक भी सौदागरों को नहीं दबोच सकी।
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खेल खेलती पुलिस, साथ देते तमंचा कारतूस
पूर्व में ऐसे मामले सामने आए हैं कि मुकदमे की एक धारा बढ़ाने के लिए तमंचा और कारतूस पुलिस बरामद दिखा देती थी। लेकिन, सख्ती बढ़ने और परीक्षण होने की वजह से पुलिस ने इस हथियार का गिरफ्तारी में इस्तेमाल कम कर दिया है। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं कि पुलिस ने अपने पास से तमंचा और कारतूस लगा दिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऐसा भी होता रहा है कि ज्यादा संख्या में कारतूस मिलने पर पुलिस उन्हें अपने पास रख लेती। जरूरत के अनुसार किसी बदमाश के पास से इन्हें बरामद दिखा देती।
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लाइसेंसी को देना होता है ब्योरा
जानकारों का कहना है कि अवैध असलहा रखने वालों को कारतूस की सप्लाई लाइसेंसी करते हैं। परिचित होने या फिर अधिक रुपए के लालच में कारतूस को बेच देते हैं। इसलिए लाइसेंस पर कारतूस खरीदने के दौरान खोखा दिखाने की प्रक्रिया शुरू की गई। खोखा दिखाने के साथ-साथ इस बात का सबूत भी देना होता है कि फायरिंग कब और क्यों हुई है। यह नियम लागू होने के बाद कारतूस की अवैध बिक्री में कमी आई है। लेकिन, अवैध असलहा रखने वाले कहीं न कहीं से कारतूसों का जुगाड़ कर लेते हैं।
तमंचे और कारतूस की बरामदगी पर जांच बैठाई जाती है। मुकदमे के विवेचक बताते हैं कि अभियुक्त को कहां से तमंचा और कारतूस मिला था। अभियुक्त के पास जितनी बरामदगी होती है, उसकी बाकायदा लिखा पढ़ी की जाती है।
राहुल मिठास, एएसपी
केस नंबर 1
24 जनवरी को नवाबाद पुलिस ने गल्ला मंडी क्षेत्र के एक घर में चोरी की नीयत से घुसे छतरपुर निवासी मुकेश कुशवाहा को पकड़ा था। आरोपी छतरपुर में हुई एक चोरी के मामले में भी वांछित चल रहा था। आरोपी के पास से से एक तमंचा व कारतूस भी मिले थे।
केस नंबर 2
25 जनवरी ट्रक चालक सोहनपाल की हत्या के मामले में बबीना पुलिस ने करैरा थाना क्षेत्र के डबरा गांव निवासी रामस्वरूप राजपूत उसका पुत्र पुरुषोत्तम राजपूत व रक्सा क्षेत्र के गांव बसाई निवासी भांजे दिनेश कुमार राजपूत को पकड़ा था। इनके पास से दो तमंचे व तीन कारतूस मिले थे।
केस नंबर 3
26 जनवरी को दो जिले के ईनामी बदमाश कुरैश नगर निवासी सद्दाम कुरैशी को भी पकड़ा। इसके पास से भी पुलिस ने तमंचा व दो कारतूस बरामद किए।