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तीन साल में जमीन पर नहीं उतरा माननीयों के वादों का ‘हवाई जहाज’
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dispointment
झांसी। विधानसभा के लिए चुने गए हमारे जनप्रतिनिधियों का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। लेकिन, इस अवधि में विधायक जनता को कोई यादगार सौगात नहीं दे पाए। जबकि, जिले के चारों विधायक केंद्र और प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से ही हैं। ऐसे में मतदाताओं को अपने नुमाइंदों से ढेरों उम्मीदें थीं, परंतु धरातल पर जनप्रतिनिधि कोई बड़ा करिश्मा नहीं दिखा पाए। जबकि, विधानसभा चुनाव में मनपसंद प्रतिनिधियों के चुने जाने और प्रदेश में भाजपा की सरकार बन जाने के बाद से जनता बड़ी-बड़ी आस लगाए बैठी थी।
झांसी महानगर के यातायात की बड़ी बाधा ग्वालियर रोड व ललितपुर रोड पर हंसारी में बनी रेलवे क्रॉसिंग हैं, जिनके निर्माण की दिशा में अब तक कोई पुख्ता काम नहीं हो पाया। महानगर में अभी भी पार्किंग स्थलों का अभाव बना हुआ है। लोगों को बाजारों में जाम से जूझना पड़ता है। हवाई अड्डा भी अभी हवा में ही अटका हुआ है। जबकि, पांच साल बाद भी स्मार्ट सिटी योजना भी अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाई है। सीपरी बाजार में निर्माणाधीन ओवरब्रिज का काम भी छह साल में पूरा नहीं
स्मार्ट सिटी के कामों की शुरुआत हो गई है। ग्वालियर रोड ओवरब्रिज का प्लान शासन को भेज दिया है। साल के अंत तक सीपरी ओवरब्रिज का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। स्मार्ट सिटी के काम शुरू हो गए हैं। महानगर पेयजल योजना के तहत मेडिकल, गुमनावारा जैसे संकटग्रस्त इलाकों में नलों से पानी पहुंचने लगा है। हवाई अड्डा भी जल्द धरातल पर उतरेगा।
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रवि शर्मा, सदर विधायक
दशकों से बबीना क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी बनी हुई है। क्षेत्र का अधिकांश इलाका वर्षा जल पर निर्भर है। बुंदेलखंड में अक्सर मेघ रूठे रहते हैं। ऐसे में किसानों को खेती से हाथ धोना पड़ जाता है। ये स्थिति अन्नदाताओं पर भारी गुजरती है। इतना ही नहीं, क्षेत्र के तमाम हिस्सों में पेयजल के भी गंभीर संकट आते है। मार्च माह से ही यहां भूगर्भ जल साथ छोड़ देता है, जिससे हैंडपंप पानी उगलना बंद कर देते हैं। बड़ी आबादी टैंकों पर निर्भर हो जाती है। पानी की इस समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई बड़ी परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
पानी की समस्या के समाधान की दिशा में आजादी के बाद से बबीना में जो काम नहीं हुआ, वो अब जाकर हुआ है। मुख्यमंत्री ने स्वयं बबीना में आकर बुढ़पुरा पेयजल योजना का शुभारंभ किया। ढाई सौ करोड़ से अधिक की ये परियोजना दो साल में पूरी हो जाएगी। बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए शुरू की गई इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बबीना क्षेत्र के लोगों को मिला।
- राजीव सिंह पारीछा, विधायक बबीना
बबीना की तरह ही गरौठा विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में जल संकट व्याप्त है। हालांकि, इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश की पिछली सरकार में एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना की नींव रखी गई थी। माना जा रहा था कि ये परियोजना क्षेत्र के जल संकट को दूर कर देगी। लेकिन, करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ये परियोजना अधूरी पड़ी हुई है। क्षेत्र की ज्यादातर खेती अब भी बारिश के पानी पर ही निर्भर है। खास बात ये है कि हर साल की तरह इस मानसून में भी जिले के अन्य इलाकों के मुकाबले इस क्षेत्र में मानसूनी बारिश कम हुई। ऐसे में किसानों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा हुआ है।
पानी की समस्या के समाधान की दिशा में क्षेत्र में कई कार्य किए जा चुके हैं, जिनका क्षेत्रीय लोगों को लाभ मिलना भी शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, सड़क निर्माण की भी कई बड़ी परियोजना धरातल पर उतर चुकी हैं। बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर भी गरौठा विधानसभा क्षेत्र में ही बनने जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। इसमें सीधे तौर पर हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।
- जवाहर लाल राजपूत, गरौठा विधायक
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झांसी महानगर के यातायात की बड़ी बाधा ग्वालियर रोड व ललितपुर रोड पर हंसारी में बनी रेलवे क्रॉसिंग हैं, जिनके निर्माण की दिशा में अब तक कोई पुख्ता काम नहीं हो पाया। महानगर में अभी भी पार्किंग स्थलों का अभाव बना हुआ है। लोगों को बाजारों में जाम से जूझना पड़ता है। हवाई अड्डा भी अभी हवा में ही अटका हुआ है। जबकि, पांच साल बाद भी स्मार्ट सिटी योजना भी अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाई है। सीपरी बाजार में निर्माणाधीन ओवरब्रिज का काम भी छह साल में पूरा नहीं
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स्मार्ट सिटी के कामों की शुरुआत हो गई है। ग्वालियर रोड ओवरब्रिज का प्लान शासन को भेज दिया है। साल के अंत तक सीपरी ओवरब्रिज का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। स्मार्ट सिटी के काम शुरू हो गए हैं। महानगर पेयजल योजना के तहत मेडिकल, गुमनावारा जैसे संकटग्रस्त इलाकों में नलों से पानी पहुंचने लगा है। हवाई अड्डा भी जल्द धरातल पर उतरेगा।
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रवि शर्मा, सदर विधायक
दशकों से बबीना क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी बनी हुई है। क्षेत्र का अधिकांश इलाका वर्षा जल पर निर्भर है। बुंदेलखंड में अक्सर मेघ रूठे रहते हैं। ऐसे में किसानों को खेती से हाथ धोना पड़ जाता है। ये स्थिति अन्नदाताओं पर भारी गुजरती है। इतना ही नहीं, क्षेत्र के तमाम हिस्सों में पेयजल के भी गंभीर संकट आते है। मार्च माह से ही यहां भूगर्भ जल साथ छोड़ देता है, जिससे हैंडपंप पानी उगलना बंद कर देते हैं। बड़ी आबादी टैंकों पर निर्भर हो जाती है। पानी की इस समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई बड़ी परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
पानी की समस्या के समाधान की दिशा में आजादी के बाद से बबीना में जो काम नहीं हुआ, वो अब जाकर हुआ है। मुख्यमंत्री ने स्वयं बबीना में आकर बुढ़पुरा पेयजल योजना का शुभारंभ किया। ढाई सौ करोड़ से अधिक की ये परियोजना दो साल में पूरी हो जाएगी। बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए शुरू की गई इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बबीना क्षेत्र के लोगों को मिला।
- राजीव सिंह पारीछा, विधायक बबीना
बबीना की तरह ही गरौठा विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में जल संकट व्याप्त है। हालांकि, इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश की पिछली सरकार में एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना की नींव रखी गई थी। माना जा रहा था कि ये परियोजना क्षेत्र के जल संकट को दूर कर देगी। लेकिन, करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ये परियोजना अधूरी पड़ी हुई है। क्षेत्र की ज्यादातर खेती अब भी बारिश के पानी पर ही निर्भर है। खास बात ये है कि हर साल की तरह इस मानसून में भी जिले के अन्य इलाकों के मुकाबले इस क्षेत्र में मानसूनी बारिश कम हुई। ऐसे में किसानों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा हुआ है।
पानी की समस्या के समाधान की दिशा में क्षेत्र में कई कार्य किए जा चुके हैं, जिनका क्षेत्रीय लोगों को लाभ मिलना भी शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, सड़क निर्माण की भी कई बड़ी परियोजना धरातल पर उतर चुकी हैं। बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर भी गरौठा विधानसभा क्षेत्र में ही बनने जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र की तस्वीर बदल देगी। इसमें सीधे तौर पर हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।
- जवाहर लाल राजपूत, गरौठा विधायक