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रेलवे में सिर्फ शंटिंग करते नजर आएंगे डीजल इंजन
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झांसी। आने वाले दिनों में स्टेशन पर डीजल इंजन सिर्फ कोचों को एक जगह से दूसरी जगह (शंटिंग) ले जाने के काम आएंगे। दरअसल, मंडल के सभी सेक्शनों में बिजली से इंजन दौड़ने लगे हैं। बिजली की कमी को नए ट्रैक्शन सबस्टेशन पूरा करने लगे हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये के ईंधन (डीजल) को बचाने के लिए रेलवे ने धीरे- धीरे डीजल इंजनों का संचालन बंद करना शुरू कर दिया है।
रेल मंडल में कुछ साल पहले तक दिल्ली- भोपाल मुख्य ट्रैक पर ही इलेक्ट्रिक इंजनों से ट्रेनें दौड़तीं थीं। झांसी- कानपुर, झांसी- मानिकपुर और भीमसेन- बांदा ट्रैक पर ओएचई लाइन नहीं थी। इन सेक्शनों में डीजल इंजन की मदद से ही ट्रेनें व मालगाड़ियां चलाईं जातीं थीं। इसके लिए मंडल के पास 125 डीजल इंजन हैं, जिनकी मरम्मत के लिए झांसी में डीजल शेड बना है। मगर, अब मंडल के सभी सेक्शनों में बिजली की लाइन (ओएचई) डल गई है। बिजली से ज्यादा से ज्यादा इंजन दौड़ सकें, इसके लिए ट्रैक्शन सबस्टेशनों की क्षमता बढ़ाने का काम लगातार चल रहा है। इलेक्ट्रिक इंजन से ईंधन की आधी खपत होती है। दूसरा इंजनों की उम्र भी 35 साल होती है, उस हिसाब से भी रेल मंडल के अधिकांश इंजन बूढ़े होते जा रहे हैं। यही कारण है कि रेलवे धीरे- धीरे डीजल इंजन का प्रयोग बंद करता जा रहा है। डीजल शेड में भी इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत शुरू कर दी गई है। इलेक्ट्रिक शेड के पास 240 इंजन हैं, जिसमें 25 इंजन मरम्मत के लिए डीजल शेड को दे दिए गए हैं।
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रेल मंडल में कुछ साल पहले तक दिल्ली- भोपाल मुख्य ट्रैक पर ही इलेक्ट्रिक इंजनों से ट्रेनें दौड़तीं थीं। झांसी- कानपुर, झांसी- मानिकपुर और भीमसेन- बांदा ट्रैक पर ओएचई लाइन नहीं थी। इन सेक्शनों में डीजल इंजन की मदद से ही ट्रेनें व मालगाड़ियां चलाईं जातीं थीं। इसके लिए मंडल के पास 125 डीजल इंजन हैं, जिनकी मरम्मत के लिए झांसी में डीजल शेड बना है। मगर, अब मंडल के सभी सेक्शनों में बिजली की लाइन (ओएचई) डल गई है। बिजली से ज्यादा से ज्यादा इंजन दौड़ सकें, इसके लिए ट्रैक्शन सबस्टेशनों की क्षमता बढ़ाने का काम लगातार चल रहा है। इलेक्ट्रिक इंजन से ईंधन की आधी खपत होती है। दूसरा इंजनों की उम्र भी 35 साल होती है, उस हिसाब से भी रेल मंडल के अधिकांश इंजन बूढ़े होते जा रहे हैं। यही कारण है कि रेलवे धीरे- धीरे डीजल इंजन का प्रयोग बंद करता जा रहा है। डीजल शेड में भी इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत शुरू कर दी गई है। इलेक्ट्रिक शेड के पास 240 इंजन हैं, जिसमें 25 इंजन मरम्मत के लिए डीजल शेड को दे दिए गए हैं।
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