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Jhansi News: धमनाखुर्द का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है बीमार
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संवाद न्यूज एजेंसी
चिरगांव। शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। इसका अंदाजा चिरगांव के धमनाखुर्द में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें न चिकित्सक हैं और न ही फार्मासिस्ट। अस्पताल का भवन भी जर्जर स्थिति में है।
शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चिरगांव ब्लाॅक के ग्राम धमनाखुर्द में वर्ष 2008 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया था। उस समय चिकित्सक, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, एएनएम व सफाई कर्मचारी की तैनाती की गई थी। इस अस्पताल में क्षेत्र के ग्राम इटौरा, खड़ेसर, पच्चरगढ़, उजयान, सारौल, बारेई, पठा डेरा, पहाड़ी खुर्द, धमना खुुर्द, तजपुरा, इटवांखुर्द, धवारा, भरौल सहित सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांंवों से भी लोग इलाज केे लिए आते थे। लेकिन, धीरे-धीरे स्टाफ कम होता गया। पिछले साल छह दिसंबर को अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा. सुमन राव ने त्याग पत्र दे दिया था। इसके बाद दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। जबकि, कोविड के दौरान फार्मासिस्ट को यहां से हटाकर झांसी भेज दिया गया था। तब से कोई दूसरा फार्मासिस्ट नहीं आया है। इस समय वार्ड ब्वाय देव सिंह, स्टाफ नर्स विमल तिवारी व स्वीपर पूरन लाल ही अस्पताल में तैनात हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाज के लिए झोलाछापों के भरोसे हैं।
स्टाफ नर्स विमल तिवारी ने बताया कि अस्पताल के भवन की हालत बहुत खराब है। थोड़ी सी बारिश होने पर सभी कमरों में पानी टपकता है। इस कारण कहीं पर खड़े होने की जगह नहीं बचती है। दो साल पूर्व अस्पताल परिसर में कोविड कक्ष बनाया गया था। उसमें भी पानी टपक रहा है। वार्ड ब्वाय देव सिंह ने बताया कि एक माह पूर्व बिजली गिरने से अस्पताल के बाहर रखी डीपी जल गई थी, तब से अस्पताल की बत्ती गुल है। बिजली न आने से अस्पताल के फ्रिज में रखी वैक्सीन, जीवन रक्षक दवाएं खराब हो रही हैैं। बारिश से अस्पताल की बाउंड्री भी गिर गई है, जिससे छुट्टा जानवर अंदर आ जाते हैं।
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धमनाखुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। जल्द व्यवस्था होगी।
- डा. राजेश सिंह, अधीक्षक-सीएचसी
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चिरगांव। शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। इसका अंदाजा चिरगांव के धमनाखुर्द में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें न चिकित्सक हैं और न ही फार्मासिस्ट। अस्पताल का भवन भी जर्जर स्थिति में है।
शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चिरगांव ब्लाॅक के ग्राम धमनाखुर्द में वर्ष 2008 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया था। उस समय चिकित्सक, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वाय, एएनएम व सफाई कर्मचारी की तैनाती की गई थी। इस अस्पताल में क्षेत्र के ग्राम इटौरा, खड़ेसर, पच्चरगढ़, उजयान, सारौल, बारेई, पठा डेरा, पहाड़ी खुर्द, धमना खुुर्द, तजपुरा, इटवांखुर्द, धवारा, भरौल सहित सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांंवों से भी लोग इलाज केे लिए आते थे। लेकिन, धीरे-धीरे स्टाफ कम होता गया। पिछले साल छह दिसंबर को अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा. सुमन राव ने त्याग पत्र दे दिया था। इसके बाद दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। जबकि, कोविड के दौरान फार्मासिस्ट को यहां से हटाकर झांसी भेज दिया गया था। तब से कोई दूसरा फार्मासिस्ट नहीं आया है। इस समय वार्ड ब्वाय देव सिंह, स्टाफ नर्स विमल तिवारी व स्वीपर पूरन लाल ही अस्पताल में तैनात हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाज के लिए झोलाछापों के भरोसे हैं।
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स्टाफ नर्स विमल तिवारी ने बताया कि अस्पताल के भवन की हालत बहुत खराब है। थोड़ी सी बारिश होने पर सभी कमरों में पानी टपकता है। इस कारण कहीं पर खड़े होने की जगह नहीं बचती है। दो साल पूर्व अस्पताल परिसर में कोविड कक्ष बनाया गया था। उसमें भी पानी टपक रहा है। वार्ड ब्वाय देव सिंह ने बताया कि एक माह पूर्व बिजली गिरने से अस्पताल के बाहर रखी डीपी जल गई थी, तब से अस्पताल की बत्ती गुल है। बिजली न आने से अस्पताल के फ्रिज में रखी वैक्सीन, जीवन रक्षक दवाएं खराब हो रही हैैं। बारिश से अस्पताल की बाउंड्री भी गिर गई है, जिससे छुट्टा जानवर अंदर आ जाते हैं।
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धमनाखुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। जल्द व्यवस्था होगी।
- डा. राजेश सिंह, अधीक्षक-सीएचसी