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कॉपियों की डिकोडिंग पूरी, जल्द खुलेंगे जालसाजों के नाम
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झांसी। बीएएमएस छात्र-छात्राओं की कॉपियों में नंबर बढ़ाने के खेल की जांच के दौरान कमेटी ने सभी उत्तर पुस्तिकाओं की डिकोडिंग पूरी कर ली है। इसमें कॉपियों में हैश टैग चिह्न बनाने वाले छात्रों और कॉलेज के नाम भी सामने आ गए हैं। जल्द ही कमेटी के हाथ फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों के गिरेबां तक पहुंच जाएंगे।
हैश टैग प्रकरण की जांच कर रही दो सदस्यीय कमेटी ने चिह्न वाली 500 कॉपियों के बजाए सभी 3200 उत्तर पुस्तिकाओं की डिकोडिंग शुरू की। इसके जरिए देखा गया कि हैश टैग चिह्न बनी और अन्य कॉॅपियों के मूल्यांकन के दौरान क्या नंबर दिए गए हैं। ताकि, स्पष्ट हो सके कि हैश टैग बनी कॉपियों में औसत से ज्यादा नंबर मिले हैं या नहीं। सूत्रों ने बताया कि कमेटी को जांच के दौरान हैश टैग चिह्न बनी कॉपियों में औसत से ज्यादा नंबर देने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा चिह्न बनाने वाले छात्र-छात्राओं और कॉलेज का नाम भी उजागर हो गया है। कमेटी ने भी जांच का प्रारूप तैयार किया है। एक-एक कर कमेटी तथ्य इकट्ठा कर रही है। जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट कुलपति को कार्रवाई के लिए सौंप देगी।
बीएएमएस की कॉपियों के पहले पन्ने पर बने हैश टैग चिह्न की जांच दो सदस्यीय कमेटी कर रही है। जांच में अहम चीजें निकलकर आईं हैं। तीन से चार सप्ताह में जांच पूरी हो सकती है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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हैश टैग प्रकरण की जांच कर रही दो सदस्यीय कमेटी ने चिह्न वाली 500 कॉपियों के बजाए सभी 3200 उत्तर पुस्तिकाओं की डिकोडिंग शुरू की। इसके जरिए देखा गया कि हैश टैग चिह्न बनी और अन्य कॉॅपियों के मूल्यांकन के दौरान क्या नंबर दिए गए हैं। ताकि, स्पष्ट हो सके कि हैश टैग बनी कॉपियों में औसत से ज्यादा नंबर मिले हैं या नहीं। सूत्रों ने बताया कि कमेटी को जांच के दौरान हैश टैग चिह्न बनी कॉपियों में औसत से ज्यादा नंबर देने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा चिह्न बनाने वाले छात्र-छात्राओं और कॉलेज का नाम भी उजागर हो गया है। कमेटी ने भी जांच का प्रारूप तैयार किया है। एक-एक कर कमेटी तथ्य इकट्ठा कर रही है। जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट कुलपति को कार्रवाई के लिए सौंप देगी।
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बीएएमएस की कॉपियों के पहले पन्ने पर बने हैश टैग चिह्न की जांच दो सदस्यीय कमेटी कर रही है। जांच में अहम चीजें निकलकर आईं हैं। तीन से चार सप्ताह में जांच पूरी हो सकती है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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