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जलसे में 23 हाफिजों की हुई दस्तारबंदी
Thu, 02 May 2019 01:12 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 02 May 2019 01:12 AM IST
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mushayra
- फोटो : demo
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खैलार स्थित मदरसा जामिया इस्लामिया दारुल उलूम में जलसे का आयोजन हुआ। इस दौरान मदरसे में कुरान हिफ्ज करने वाले 23 हाफिजों की दस्तारबंदी की गई। जलसे में मौजूद उलमा ने तकरीर कर शिक्षा के स्तर को सुधारने पर जोर दिया। जलसे की शुरूआत कुशीनगर के कारी सुहैल ने ऐसी महफिल में रोज आया करो, जिक्र अल्लाह का गुनगुनाया करो, नात पढ़ कर की।
इस दौरान बाराबंकी से आए मौलाना फ य्याज ने लोगों को बताया कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है जिससे सभी जाति व धर्मों का सम्मान करने का हुक्म दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईमान का दूसरा नाम ही मुसलमान है। लेकिन आज के दौर में लोग अल्लाह के बताये रास्ते से भटक रहे हैं। ऐसे लोग गुमराहियत के रास्ते पर चल रहे हैं। जो दुनिया व आखिरत के नुकसान दायक है। बताया कि आज के दौर में मुस्लिम कौम शिक्षा के स्तर से पिछड़ रही है। हर किसी को अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देना चाहिए। शिक्षा को हथियार बना लेना चाहिए। रामपुर के मुफ्ती साजिद कासमी ने कहा कि हर मोमिन को अल्लाह के बताये हुए रास्ते पर चलना चाहिए। आज के दौर में नौजवान अल्लाह के बताये हुए रास्ते से भटक रहे है। हर मोमिन को अल्लाह के सामने पेश होना है। हम सभी को आखिरत के दिन के लिए तैयारी करना है। अल्लाह ने हम सभी को इंसान व मोमिन बनाया यह अल्लाह का बेहतर इनाम है। कन्नौज के मुफ्ती तारिक जमील ने लोगों को बताया कि इस्लाम में मर्दों के बराबर ही औरतों को दर्जा दिया गया है। इस्लाम में औरत को नायाब हीरा बताया गया है। औरत की इज्जत करना हर किसी मोमिन का फर्ज है। लड़कियों को अच्छी व बेहतर शिक्षा देना उनका हक है। हर मुस्लिम को उनका हक अदा करना चाहिए। इस मौके पर कुरान का हिफ्ज करने पर मोहम्मद फारूख, मोहम्मद सईद, मोहम्मद जैद, इमरान, ताहिर, खालिद, सफीउल्लाह, नौसीब, आतिफ, रिजवान उल्ला, मुर्तजा, आजाद, आरिफ, कामिल, असलम, इमाम उद्दीन, मोहम्मद आसिम, कयाम उद्दीन, समीर, शमशाद आलम, अब्दुल बारी व आदिल की दस्तारबंदी की गई। संचालन व आभार मौलाना सैफउद्दीन ने व्यक्त किया। इस मौके पर मौलाना फतेह आलम, परवेज खान, जमील खान (डिस्क वाले), राशिद खान, सुमेर खान, अदनान, शहरुख खान, अनीस उद्दीन, कारी अनवार, कारी वसीम, कारी कमाल मौजूद रहे।
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इस दौरान बाराबंकी से आए मौलाना फ य्याज ने लोगों को बताया कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है जिससे सभी जाति व धर्मों का सम्मान करने का हुक्म दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईमान का दूसरा नाम ही मुसलमान है। लेकिन आज के दौर में लोग अल्लाह के बताये रास्ते से भटक रहे हैं। ऐसे लोग गुमराहियत के रास्ते पर चल रहे हैं। जो दुनिया व आखिरत के नुकसान दायक है। बताया कि आज के दौर में मुस्लिम कौम शिक्षा के स्तर से पिछड़ रही है। हर किसी को अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देना चाहिए। शिक्षा को हथियार बना लेना चाहिए। रामपुर के मुफ्ती साजिद कासमी ने कहा कि हर मोमिन को अल्लाह के बताये हुए रास्ते पर चलना चाहिए। आज के दौर में नौजवान अल्लाह के बताये हुए रास्ते से भटक रहे है। हर मोमिन को अल्लाह के सामने पेश होना है। हम सभी को आखिरत के दिन के लिए तैयारी करना है। अल्लाह ने हम सभी को इंसान व मोमिन बनाया यह अल्लाह का बेहतर इनाम है। कन्नौज के मुफ्ती तारिक जमील ने लोगों को बताया कि इस्लाम में मर्दों के बराबर ही औरतों को दर्जा दिया गया है। इस्लाम में औरत को नायाब हीरा बताया गया है। औरत की इज्जत करना हर किसी मोमिन का फर्ज है। लड़कियों को अच्छी व बेहतर शिक्षा देना उनका हक है। हर मुस्लिम को उनका हक अदा करना चाहिए। इस मौके पर कुरान का हिफ्ज करने पर मोहम्मद फारूख, मोहम्मद सईद, मोहम्मद जैद, इमरान, ताहिर, खालिद, सफीउल्लाह, नौसीब, आतिफ, रिजवान उल्ला, मुर्तजा, आजाद, आरिफ, कामिल, असलम, इमाम उद्दीन, मोहम्मद आसिम, कयाम उद्दीन, समीर, शमशाद आलम, अब्दुल बारी व आदिल की दस्तारबंदी की गई। संचालन व आभार मौलाना सैफउद्दीन ने व्यक्त किया। इस मौके पर मौलाना फतेह आलम, परवेज खान, जमील खान (डिस्क वाले), राशिद खान, सुमेर खान, अदनान, शहरुख खान, अनीस उद्दीन, कारी अनवार, कारी वसीम, कारी कमाल मौजूद रहे।
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