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धसान नदी का पानी नहीं होगा बर्बाद, पहली बार अर्जुन बांध को मिलेगा
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झांसी। बारिश के दिनों में धसान नदी के ओवर फ्लो से होने वाली पानी की बर्बादी अब काफी हद तक रूक जाएगी। इस मानसून में पहली बार नदी के ओवर फ्लो पानी का इस्तेमाल नवर्निमित अर्जुन बांध को भरने में होगा। इसके लिए 41 किमी लंबे अर्जुन सहायक फीडर का काम पूरा हो चुका। इस बांध परियोजना की मदद से झांसी के सीमावर्ती समेत महोबा के दर्जनों इलाकों को पीने का पानी मिल सकेगा।
बुंदेलखंड में बेतवा के बाद धसान सबसे बड़ी नदी में शुमार की जाती है। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद से निकली इस नदी का शुरूआती कैचमेंट ही करीब सौ किमी से अधिक लंबा है। इस नदी से अभी सुजारा, पहाड़ी एवं लहचूरा बांध भरे जाते हैं। पहाड़ी बांध पुराना होने से यहां काफी सिल्ट जमा है। यहां काफी कम पानी स्टोर हो पाता है। पहाड़ी एवं लहचूरा बांध में कुल मिलाकर करीब 57 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी भर पाता है, शेष पानी बाहर छोड़ना पड़ता है। बरसाती सीजन में हजारों एमसीएम पानी नदी में छोड़ना पड़ता है। धसान नदी में पानी की क्षमता को देखते हुए लहचूरा बांध से नीचे अर्जुन बांध का निर्माण कराया गया, लेकिन अर्जुन सहायक फीडर तैयार न होने से कई वर्षों तक यह भरा नहीं जा सका। अभी तक प्राकृतिक वजहों से ही इस बांध में पानी रहता था, लेकिन इस बार 41.60 किमी लंबे अर्जुन फीडर का काम पूरा हो जाने से इस बांध को भी भरा जा सकेगा। अभियंताओं के मुताबिक यहां कुल करीब 70.13 एमसीएम पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इसकी मदद से बामौर ब्लॉक और महोबा से सटे निकटवर्ती गांव समेत बड़े भू-भाग को पीने का पानी मिल सकेगा। सूखाग्रस्त इलाकों की सिंचाई भी हो सकेगी।
अर्जुन बांध को इस मानसून में भरा जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इसकी मदद से तीन दर्जन से अधिक गांवों को पीने का पानी मिल सकेगा। बारिश में बर्बाद होने वाले धसान नदी के पानी का भी इस्तेमाल हो सकेगा।
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रमाशंकर राजपूत, अधिशासी अभियंता, सपरार प्रखंड
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बुंदेलखंड में बेतवा के बाद धसान सबसे बड़ी नदी में शुमार की जाती है। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद से निकली इस नदी का शुरूआती कैचमेंट ही करीब सौ किमी से अधिक लंबा है। इस नदी से अभी सुजारा, पहाड़ी एवं लहचूरा बांध भरे जाते हैं। पहाड़ी बांध पुराना होने से यहां काफी सिल्ट जमा है। यहां काफी कम पानी स्टोर हो पाता है। पहाड़ी एवं लहचूरा बांध में कुल मिलाकर करीब 57 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी भर पाता है, शेष पानी बाहर छोड़ना पड़ता है। बरसाती सीजन में हजारों एमसीएम पानी नदी में छोड़ना पड़ता है। धसान नदी में पानी की क्षमता को देखते हुए लहचूरा बांध से नीचे अर्जुन बांध का निर्माण कराया गया, लेकिन अर्जुन सहायक फीडर तैयार न होने से कई वर्षों तक यह भरा नहीं जा सका। अभी तक प्राकृतिक वजहों से ही इस बांध में पानी रहता था, लेकिन इस बार 41.60 किमी लंबे अर्जुन फीडर का काम पूरा हो जाने से इस बांध को भी भरा जा सकेगा। अभियंताओं के मुताबिक यहां कुल करीब 70.13 एमसीएम पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इसकी मदद से बामौर ब्लॉक और महोबा से सटे निकटवर्ती गांव समेत बड़े भू-भाग को पीने का पानी मिल सकेगा। सूखाग्रस्त इलाकों की सिंचाई भी हो सकेगी।
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अर्जुन बांध को इस मानसून में भरा जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इसकी मदद से तीन दर्जन से अधिक गांवों को पीने का पानी मिल सकेगा। बारिश में बर्बाद होने वाले धसान नदी के पानी का भी इस्तेमाल हो सकेगा।
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रमाशंकर राजपूत, अधिशासी अभियंता, सपरार प्रखंड