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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन से पता चल जाएगा हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज
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- आधुनिक सीटी स्कैन मशीन आई, सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी भी हो सकेगी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आधुनिक सीटी स्कैन मशीन आ गई है। इससे सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी भी हो सकेगी। इससे हृदय की धमनियों में होने वाले ब्लॉकेज का पता चल जाएगा। रामनवमी से नई मशीन से जांच होने लगेगी।
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में जो नई सीटी स्कैन मशीन आई है, वो 128 स्लाइस की है। मौजूदा समय में 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन लगी हुई है, जो 10 साल से भी ज्यादा पुरानी हो चुकी है। ऐसे में यह मशीन अक्सर खराब हो जाती है। इससे मरीजों को निजी सेंटर पर जाकर महंगी दरों पर जांच करानी पड़ती है।
अब नई मशीन आने के बाद अगले सप्ताह से यह समस्या दूर हो जाएगी। कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि नई मशीन से सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी जांच भी हो सकेगी। इससे हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज है या नहीं, इसका पता चल सकेगा। रामनवमी से नई मशीन से जांच शुरू हो जाएगी। आधुनिक मशीन से बेहद सटीक रिपोर्ट आएगी। अभी बुंदेलखंड में कहीं भी ऐसी मशीन नहीं लगी है।
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अभी कैथ लैब में होना पड़ता है भर्ती
एंजियोग्राफी कराने पर अभी मरीज को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की कार्डियोलॉजी यूनिट की कैथ लैब में भर्ती होना पड़ता है। बताया गया कि यहां हाथ या फिर पैर की नस में तार डालकर ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है। जांच के बाद भी मरीज को कुछ देर के लिए अस्पताल में ही रखा जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आधुनिक सीटी स्कैन मशीन आ गई है। इससे सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी भी हो सकेगी। इससे हृदय की धमनियों में होने वाले ब्लॉकेज का पता चल जाएगा। रामनवमी से नई मशीन से जांच होने लगेगी।
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में जो नई सीटी स्कैन मशीन आई है, वो 128 स्लाइस की है। मौजूदा समय में 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन लगी हुई है, जो 10 साल से भी ज्यादा पुरानी हो चुकी है। ऐसे में यह मशीन अक्सर खराब हो जाती है। इससे मरीजों को निजी सेंटर पर जाकर महंगी दरों पर जांच करानी पड़ती है।
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अब नई मशीन आने के बाद अगले सप्ताह से यह समस्या दूर हो जाएगी। कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि नई मशीन से सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी जांच भी हो सकेगी। इससे हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज है या नहीं, इसका पता चल सकेगा। रामनवमी से नई मशीन से जांच शुरू हो जाएगी। आधुनिक मशीन से बेहद सटीक रिपोर्ट आएगी। अभी बुंदेलखंड में कहीं भी ऐसी मशीन नहीं लगी है।
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अभी कैथ लैब में होना पड़ता है भर्ती
एंजियोग्राफी कराने पर अभी मरीज को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की कार्डियोलॉजी यूनिट की कैथ लैब में भर्ती होना पड़ता है। बताया गया कि यहां हाथ या फिर पैर की नस में तार डालकर ब्लॉकेज का पता लगाया जाता है। जांच के बाद भी मरीज को कुछ देर के लिए अस्पताल में ही रखा जाता है।