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ओलावृष्टि के नुकसान के आंकलन में जुटीं टीमें
jhansi
Updated Sun, 29 Jan 2017 12:47 AM IST
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फसल
- फोटो : amar ujala
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झांसी। बृहस्पतिवार - शुक्रवार की रात बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से जिले में रबी की फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। किसानों की ओर से मुआवजे की मांग की जाने लगी है। राजस्व विभाग व कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने क्षति का आंकलन शुरू कर दिया है। इसकी जल्द रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी।
मौसम में उतार - चढ़ाव का दौर जारी है। बृहस्पतिवार को दिन भर धूप खिली रही, परंतु रात तकरीबन आठ बजे मौसम एकाएक पलटी मार गया। आंधी चलने लगी और बूंदाबांदी भी हुई। रात डेढ़ बजे बारिश के साथ ओले आफत बनकर बरसने लगे। जिले में कहीं कम तो कहीं ज्यादा ओलावृष्टि हुई। इससे गेहूं व दलहनी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर फसलें ओले की मार से जमीन में बिछ गई हैं। शुक्रवार से ही राजस्व विभाग व कृषि विभाग की टीमों ने क्षति का आंकलन शुरू कर दिया है। इसकी रिपोर्ट तहसील स्तर पर तैयार की जा रही है। पांचों तहसीलों की संकलित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
पिछले नुकसान का 55 करोड़ है बाकी
फरवरी 2015 में जिले में अचानक हुई ओलावृष्टि - अतिवृष्टि से रबी की पकी हुई फसल चौपट हो गई थी। दो दिन की आपदा में किसानों को तीन अरब छप्पन करोड़ पचास लाख रुपये की क्षति हुई थी। इसकी पुष्टि प्रदेश व केंद्र सरकार से आईं टीमों ने की थी। फसल खराब होने से किसानों में हाहाकार की स्थिति पैदा हो गई थी। तब केंद्र व प्रदेश सरकारों ने किसानों को त्वरित मदद का भरोसा दिया था, लेकिन यह भरोसा हकीकत में नहीं बदल पाया। स्थिति यह है कि अब तक पचास हजार किसानों को मुआवजे की एक पाई भी नहीं मिल पाई है। उन्हें मुआवजे की पचपन करोड़ पचास लाख रुपये की धनराशि अब भी इंतजार है।
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33 फीसदी नुकसान पर मुआवजा
दैवी आपदा से फसल को तैंतीस फीसदी या इससे अधिक नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाता है। इससे कम नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। राजस्व व कृषि विभाग की टीमें इसमें जुटी हुई हैं। जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
- विजय बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी
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मौसम में उतार - चढ़ाव का दौर जारी है। बृहस्पतिवार को दिन भर धूप खिली रही, परंतु रात तकरीबन आठ बजे मौसम एकाएक पलटी मार गया। आंधी चलने लगी और बूंदाबांदी भी हुई। रात डेढ़ बजे बारिश के साथ ओले आफत बनकर बरसने लगे। जिले में कहीं कम तो कहीं ज्यादा ओलावृष्टि हुई। इससे गेहूं व दलहनी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर फसलें ओले की मार से जमीन में बिछ गई हैं। शुक्रवार से ही राजस्व विभाग व कृषि विभाग की टीमों ने क्षति का आंकलन शुरू कर दिया है। इसकी रिपोर्ट तहसील स्तर पर तैयार की जा रही है। पांचों तहसीलों की संकलित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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पिछले नुकसान का 55 करोड़ है बाकी
फरवरी 2015 में जिले में अचानक हुई ओलावृष्टि - अतिवृष्टि से रबी की पकी हुई फसल चौपट हो गई थी। दो दिन की आपदा में किसानों को तीन अरब छप्पन करोड़ पचास लाख रुपये की क्षति हुई थी। इसकी पुष्टि प्रदेश व केंद्र सरकार से आईं टीमों ने की थी। फसल खराब होने से किसानों में हाहाकार की स्थिति पैदा हो गई थी। तब केंद्र व प्रदेश सरकारों ने किसानों को त्वरित मदद का भरोसा दिया था, लेकिन यह भरोसा हकीकत में नहीं बदल पाया। स्थिति यह है कि अब तक पचास हजार किसानों को मुआवजे की एक पाई भी नहीं मिल पाई है। उन्हें मुआवजे की पचपन करोड़ पचास लाख रुपये की धनराशि अब भी इंतजार है।
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33 फीसदी नुकसान पर मुआवजा
दैवी आपदा से फसल को तैंतीस फीसदी या इससे अधिक नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाता है। इससे कम नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। राजस्व व कृषि विभाग की टीमें इसमें जुटी हुई हैं। जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
- विजय बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी