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पैसे की हवस ने गुनाहगार बना दिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2016 01:40 AM IST
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murder case, jhansi news
- फोटो : demo
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न तो इनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि है और न ही इनके खिलाफ इसके पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ। दरअसल कम समय में अधिक पैसा बनाने की हवस में ये चादर के बाहर पैर फैलाते चले गए, कर्ज से लद गए और इससे उबरने का कोई रास्ता नहीं दिखा तो अपराध की डगर पकड़ ली।
अब तक की पुलिस जांच-पड़ताल में पता लगा है कि पिता-पुत्री की हत्या, लूटपाट और इसके पहले नंदनपुरा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में डकैती जैसा जघन्य अपराध करने वाले ये तीनों आरोपी पेशेवर बदमाश नहीं हैं। वे तो बस किसी भी तरह करोड़ों रुपये बनाने का सपना देख रहे थे। इनके घरों के आसपास रहने वालों, नाते-रिश्तेदारों और परिचितों को तो एकबारगी यकीन ही नहीं हो रहा कि इनके भीतर इतना बड़ा शैतान छिपा था।
तिलियानी बजरिया निवासी संघर्ष सिंह की अंकित और विशाल से गहरी छनती थी। मिनर्वा टाकीज के पीछे रहने वाले अंकित सैनी की मां ने मकान बनाने के लिए बैंक से 12 लाख रुपये का कर्ज लिया था। साथ ही अंकित ने पार्टनरशिप में एक्वेरियम शॉप खोली लेकिन पार्टनर से नहीं बनी तो अलग हो गया। उसे किसी भी तरह ज्यादा पैसा कमाने की हवस थी और फिर उसकी संगत ऐसे ही लोगों से बढ़ने लगी तो खुद भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते थे। इस बीच घर की कुर्की और मां की गिरफ्तारी की नौबत आ गई। कर्ज चुकाने के दूसरे और रास्ते छोड़ वह अपराध के रास्ते पर निकल पड़ा। उसने संघर्ष और विशाल बाथम के साथ पीएनबी में डाके की योजना बनाई।
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सोचा करोड़ों हाथ लगेंगे और कर्ज चुकाने के बाद ऐश भी करेंगे। पर बैंक से मात्र ढाई लाख ही लूट सके और फिर एक बार फिर कहीं और हाथ आजमाने की प्लानिंग शुरू कर दी। इस बीच राजीव नारायण माथुर की हैसियत, उनके बेटे की शादी की तैयारी देख के लिए खरीददारी की बातें सुन अंकित की नीयत खराब हो गई। उसने अपने वकील दोस्त संघर्ष और विशाल के सामने योजना रखी। संघर्ष की न तो ज्यादा वकालत चलती है और विशाल का स्कूल की बस नाम का है, लेकिन इन्हें अमीर बनने की बहुत ललक थी।
अपराध की इस योजना भी में सब एकमत हो गए और फिर वारदात कर डाली। चार वर्ष की बच्ची का पिता विशाल भी साढ़े चार लाख रुपये के कर्ज में डूबा है। उसका स्कूल घाटे में चल रहा है। कुल मिलाकर बिना मेहनत अमीर बनने की हवस ने इन्हें अपराध के गर्त में धकेल दिया और तबाह कर दिया। संघर्ष और अंकित के घर ताले पड़े हैं और मोहल्ले वाले चुप्पी साधे हैं।
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अब तक की पुलिस जांच-पड़ताल में पता लगा है कि पिता-पुत्री की हत्या, लूटपाट और इसके पहले नंदनपुरा स्थित पंजाब नेशनल बैंक में डकैती जैसा जघन्य अपराध करने वाले ये तीनों आरोपी पेशेवर बदमाश नहीं हैं। वे तो बस किसी भी तरह करोड़ों रुपये बनाने का सपना देख रहे थे। इनके घरों के आसपास रहने वालों, नाते-रिश्तेदारों और परिचितों को तो एकबारगी यकीन ही नहीं हो रहा कि इनके भीतर इतना बड़ा शैतान छिपा था।
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तिलियानी बजरिया निवासी संघर्ष सिंह की अंकित और विशाल से गहरी छनती थी। मिनर्वा टाकीज के पीछे रहने वाले अंकित सैनी की मां ने मकान बनाने के लिए बैंक से 12 लाख रुपये का कर्ज लिया था। साथ ही अंकित ने पार्टनरशिप में एक्वेरियम शॉप खोली लेकिन पार्टनर से नहीं बनी तो अलग हो गया। उसे किसी भी तरह ज्यादा पैसा कमाने की हवस थी और फिर उसकी संगत ऐसे ही लोगों से बढ़ने लगी तो खुद भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते थे। इस बीच घर की कुर्की और मां की गिरफ्तारी की नौबत आ गई। कर्ज चुकाने के दूसरे और रास्ते छोड़ वह अपराध के रास्ते पर निकल पड़ा। उसने संघर्ष और विशाल बाथम के साथ पीएनबी में डाके की योजना बनाई।
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सोचा करोड़ों हाथ लगेंगे और कर्ज चुकाने के बाद ऐश भी करेंगे। पर बैंक से मात्र ढाई लाख ही लूट सके और फिर एक बार फिर कहीं और हाथ आजमाने की प्लानिंग शुरू कर दी। इस बीच राजीव नारायण माथुर की हैसियत, उनके बेटे की शादी की तैयारी देख के लिए खरीददारी की बातें सुन अंकित की नीयत खराब हो गई। उसने अपने वकील दोस्त संघर्ष और विशाल के सामने योजना रखी। संघर्ष की न तो ज्यादा वकालत चलती है और विशाल का स्कूल की बस नाम का है, लेकिन इन्हें अमीर बनने की बहुत ललक थी।
अपराध की इस योजना भी में सब एकमत हो गए और फिर वारदात कर डाली। चार वर्ष की बच्ची का पिता विशाल भी साढ़े चार लाख रुपये के कर्ज में डूबा है। उसका स्कूल घाटे में चल रहा है। कुल मिलाकर बिना मेहनत अमीर बनने की हवस ने इन्हें अपराध के गर्त में धकेल दिया और तबाह कर दिया। संघर्ष और अंकित के घर ताले पड़े हैं और मोहल्ले वाले चुप्पी साधे हैं।