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खून निकालने वाले गिरोह का सरगना पकड़ से दूर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:24 AM IST
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blood, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। खून का काला कारोबार करने वाला गिरोह के सरगना तक अब तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन उसके दो मोबाइल नंबर मिल गए हैं, जिन्हें सर्विलांस पर लगाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने अन्य जानकारियां भी जुटाने की कोशिश की है, लेकिन ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया है।
शुक्रवार को दिगारा गांव में शराब पिलाकर लोगों का खून निकालने के धंधे का पर्दाफाश हुआ था। मौके से गिरोह का मुख्य सरगना अनूप बचकर भागने में कामयाब हो गया था। जबकि, उसके दो साथी अरविंद यादव और मनीष कटारया पकड़े गए थे, जिन्हें जेल भेज दिया गया। जबकि, सरगना की तलाश में पुलिस लगातार हाथ पैर मार रही है। पड़ताल में पुलिस को मालूम चला कि अनूप लखीमपुर खीरी के थाना पलिया के अहिरन वन का रहने वाला है। लेकिन, वहां उसके बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी हाथ नहीं लग पाई। पता चला कि लखीमपुर से वह दस साल पहले मकान बेचकर चला गया था।
यहां मेडिकल कालेज के पीछे पिछोर में जहां वह पहले रहता था, वहां भी लोगों से पूछताछ की गई है, परंतु ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। बड़ागांव थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि जांच में पुलिस के हाथ अनूप के दो मोबाइल नंबर लगे हैं। अब इन्हें सर्विलांस पर लगातार कॉल डिटेल निकाली जाएगी, जिससे जांच आगे बढ़ेगी।
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शुक्रवार को दिगारा गांव में शराब पिलाकर लोगों का खून निकालने के धंधे का पर्दाफाश हुआ था। मौके से गिरोह का मुख्य सरगना अनूप बचकर भागने में कामयाब हो गया था। जबकि, उसके दो साथी अरविंद यादव और मनीष कटारया पकड़े गए थे, जिन्हें जेल भेज दिया गया। जबकि, सरगना की तलाश में पुलिस लगातार हाथ पैर मार रही है। पड़ताल में पुलिस को मालूम चला कि अनूप लखीमपुर खीरी के थाना पलिया के अहिरन वन का रहने वाला है। लेकिन, वहां उसके बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी हाथ नहीं लग पाई। पता चला कि लखीमपुर से वह दस साल पहले मकान बेचकर चला गया था।
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यहां मेडिकल कालेज के पीछे पिछोर में जहां वह पहले रहता था, वहां भी लोगों से पूछताछ की गई है, परंतु ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। बड़ागांव थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि जांच में पुलिस के हाथ अनूप के दो मोबाइल नंबर लगे हैं। अब इन्हें सर्विलांस पर लगातार कॉल डिटेल निकाली जाएगी, जिससे जांच आगे बढ़ेगी।
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