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पुलिस हिरासत में ग्रामीण की मौत

Wed, 13 Mar 2019 01:51 AM IST
amarujala Published by: देवेंद्र कुमार Updated Wed, 13 Mar 2019 01:51 AM IST
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police hirasat me gramin ki mot
police, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
उल्दन थाना पुलिस की हिरासत में पत्नी की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए ग्रामीण की तबीयत बिगड़ गई। उनको उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने भी आनन फानन में पोस्टमार्टम कराके मंगलवार की सुबह दस बजे ही श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार करा दिया।  
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थाना उल्दन के हाटी निवासी जगदीश पत्नी शांतिदेवी व बच्चों के साथ थाना नवाबाद स्थित करगुवां में रहते थे। हाटी गांव में उनका मकान औैर खेती है। विगत नौ मार्च को जगदीश व शांतिदेवी फसल देखने और लोगों से मिलने गांव गए थे। शाम को सभी से मिलने के बाद वे गांव मेें ही बने घर में सोने चले गए। रात में शांतिदेवी की धारदार हथियार से किसी ने हत्या कर दी। सुबह जगदीश बिना किसी को कुछ बताए करगुवां लौट आए थे। मां को साथ न देखकर बच्चों ने पिता से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। शक होने पर बच्चों ने गांववालोें से मां की जानकारी ली। गांव वाले घर पहुंचे तो पता चला कि शांतिदेवी खून से लथपथ हालत में मृत पड़ी थीं। यह देखकर गांव वालों ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी पाते ही पुलिस नेे मौके पर पहुंचकर छानबीन कर शव को कब्जे में लिया था। हालांकि, पुलिस को मौके से र्कोई भी धारदार हथियार नहीं मिला था।
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इस मामले में बेटे पूरन ने अपने पिता पर संदेह जताया। पुलिस ने पुत्र की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। साथ ही, पुलिस ने जगदीश को पूछताछ के लिए पकड़ लिया था। सोमवार की शाम जगदीश की थाने में तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने उनको मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, जहां देर रात उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार की सुबह ही पोस्टमार्टम कराने के बाद शव का श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार भी करा दिया। उधर, पूरन और अन्य परिजन इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
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इधर, इस मामले में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राहुल मिठास का कहना है कि पता चल गया था कि जगदीश ने ही पत्नी की हत्या की थी। सबूत जुटाए जा रहे थे। जिसके लिए पूछताछ चल रही थी, मगर जगदीश कुछ बता नहीं रहे थे। इसलिए उनको बैठा रखा था। जिस वक्त उनकी तबीयत बिगड़ी, उनके तीनों लड़के थाने में ही मौजूद थे। लड़के ही उनको थाने लेकर आए थे। खून से रंगे कपड़े भी सौंपे थे। चूंकि, परिजन बहुत थक गए थे। उनके आग्रह पर ही पोस्टमार्टम जल्दी कराकर शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।
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