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व्यापारी का नहीं लगा सुराग, परिजन एसएसपी से मिले

Fri, 22 Sep 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 22 Sep 2017 01:42 AM IST
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not any clue of business men
police, jhansi news - फोटो : demo
कोतवाली क्षेत्र के बाहर बड़ागांव गेट स्थित आरआर कालोनी नारायण बाग निवासी व्यापारी अजय साहू का तीसरे दिन भी सुराग नहीं लग सका। बृहस्पतिवार को परिजनों ने शुभचिंतकों और रिश्तेदारों के साथ एसएसपी से मुलाकात कर मदद की गुहार की।
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एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में रामबाबू साहू ने बताया कि उनका बेटा अजय नरिया बाजार पर जनरल स्टोर की दुकान खोले है। पांच साल पहले उनके बेटे ने चार लोगों के साथ मिलकर ओरछा मार्ग पर सतार नदी के पास जमीन खरीदी थी। उसके साथियों ने रुपये लेने के बाद भी उसका नाम रजिस्ट्री में दर्ज नहीं कराया था। इस बात की जानकारी होने पर वह अपने साथियों से रुपये वापस करने का आग्रह कर रहा था, मगर वे टाल मटोल कर रहे थे। मंगलवार की शाम अजय को उसके एक साथी ने मोबाइल पर कॉल कर बुलाया। वह घर से गया, लेकिन इसके बाद लौटकर नहीं आया। मोबाइल भी बंद जा रहा है। वे कोतवाली थाने मदद के लिए गए, मगर वहां से उनको भगा दिया गया। इस पर एसएसपी जेके शुक्ला ने कोतवाल को मामले की जांच के आदेश दिए। इस मौके पर उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय पटवारी, संतोष साहू, राजेश साहू, प्रभुदयाल साहू, राजू साहू, चौधरी फिरोज, शिवकुमार साहू मौजूद थे।
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मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव का आरोप
12 सितंबर को आरोपियों के खिलाफ लिखाया था मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
फर्जी तरीके से संपत्ति पर किराएदारी का हक जमाने वालों के खिलाफ मुकदमा लिखाने के कारण अब पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में झोकन बाग निवासी जसवंत सिंह ने बताया कि झोकन बाग में उन्होंने एक संपत्ति नीलामी में खरीदी थी, जिसका पैसा उन्होंने बैंक ड्राफ्ट से 21 फरवरी 2017 को जमा कर दिया था। कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर एसके तनवर ने उनको एक मार्च 2017 को संपत्ति पर भौतिक कब्जा दिला दिया था। इसके बाद उनको पता लगा कि संपत्ति देवाशीष भट्टाचार्य, शशांक भट्टाचार्य और निक्कू भट्टाचार्य ने उक्त संपत्ति पर किराएदारी साबित करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। सबूत के तौर पर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया में उनके नाम का खुला खाता नंबर दिखाया गया, जिसमें वे किराया जमा करना बताया गया। चूंकि, उन्होंने कभी सेंट्रल बैंक आफ इंडिया में खाता खुलवाया ही नहीं। इस पर वे बैंक गए तो पता लगा कि उनके नाम से फर्जी खाता खुलवाया गया है। इस पर उन्होंने नवाबाद थाने में उक्त तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब उक्त तीनों द्वारा उनके परिवार के लिए राजीनामा के लिए दबाव बनाया जा रहा है। राजीनामा न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की।
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