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गढ़मऊ की खूबसूरती को बदरंग कर रहे खनन माफिया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:38 AM IST
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mining mafia
- फोटो : demo
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शहर से सटे खूबसूरत पर्यटन स्थल गढ़मऊ पर भी खनन माफियाओं की नजरें गड़ी है। पहाड़ियों को काटकर हजारों ट्रक लाल मिट्टी निकाले जाने की वजह से इसकी तस्वीर बदरंग हो गई है।
गढ़मऊ को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने एक करोड़ सत्रह लाख रुपये की धनराशि खर्च की है। गढ़मऊ की नैसर्गिक सुंदरता अपने आप में अनूठी है। यह लाल मिट्टी की छोटी - बड़ी पहाड़ियों से घिरा गांव है, जिसके बीचों बीच प्राकृतिक झील बनी हुई है। इसकी इसी खूबी को देखते हुए सरकार ने गढ़मऊ को बड़े पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की पांच करोड़ छियासी लाख रुपये की योजना बनाई है। इस योजना पर 17 मार्च 2015 को काम शुरू किया गया था। अब तक एक करोड़ सत्रह लाख रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। 4.69 करोड़ रुपये से काम अभी और किया जाना है। लेकिन, काम पूरा होने से पहले ही गढ़मऊ की खूबसूरती पर ग्रहण लग गया है। खनन माफियाओं की निगाहें यहां की लाल मिट्टी की पहाड़ियों पर जमी हुई हैं। पिछले दो साल के दरम्यान इन पहाड़ियों से हजारों ट्रक मिट्टी धड़ल्ले से निकाली जा चुकी है। यह सिलसिला अब भी जारी है।
पहाड़ों को बचाने की जरूरत
प्रकृति ने गढ़मऊ में सुंदरता के अनूठे रंग भरे हैं। यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। यही वजह है कि सरकार इसे और भी निखारने जा रही है। इसके लिए 5.86 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर है, जिसमें से 1.17 करोड़ रुपये का काम हो भी गया है। लेकिन, यहां के पहाड़ों की कटान की वजह से इसकी तस्वीर बदरंग हो रही है। इन्हें बचाने की जरूरत है। क्योंकि, पहाड़ों से ही गढ़मऊ की सुंदरता है। पहाड़ न बचे, तो पर्यटन शून्य हो जाएगा।
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- डा. कल्याण सिंह यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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गढ़मऊ को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने एक करोड़ सत्रह लाख रुपये की धनराशि खर्च की है। गढ़मऊ की नैसर्गिक सुंदरता अपने आप में अनूठी है। यह लाल मिट्टी की छोटी - बड़ी पहाड़ियों से घिरा गांव है, जिसके बीचों बीच प्राकृतिक झील बनी हुई है। इसकी इसी खूबी को देखते हुए सरकार ने गढ़मऊ को बड़े पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की पांच करोड़ छियासी लाख रुपये की योजना बनाई है। इस योजना पर 17 मार्च 2015 को काम शुरू किया गया था। अब तक एक करोड़ सत्रह लाख रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं। 4.69 करोड़ रुपये से काम अभी और किया जाना है। लेकिन, काम पूरा होने से पहले ही गढ़मऊ की खूबसूरती पर ग्रहण लग गया है। खनन माफियाओं की निगाहें यहां की लाल मिट्टी की पहाड़ियों पर जमी हुई हैं। पिछले दो साल के दरम्यान इन पहाड़ियों से हजारों ट्रक मिट्टी धड़ल्ले से निकाली जा चुकी है। यह सिलसिला अब भी जारी है।
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पहाड़ों को बचाने की जरूरत
प्रकृति ने गढ़मऊ में सुंदरता के अनूठे रंग भरे हैं। यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। यही वजह है कि सरकार इसे और भी निखारने जा रही है। इसके लिए 5.86 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर है, जिसमें से 1.17 करोड़ रुपये का काम हो भी गया है। लेकिन, यहां के पहाड़ों की कटान की वजह से इसकी तस्वीर बदरंग हो रही है। इन्हें बचाने की जरूरत है। क्योंकि, पहाड़ों से ही गढ़मऊ की सुंदरता है। पहाड़ न बचे, तो पर्यटन शून्य हो जाएगा।
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- डा. कल्याण सिंह यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी